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Rampur News: पीलाखार नदी पर पुल न होने से 30 हजार की आबादी प्रभावित
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स्वार। स्वार के ग्राम भगवंत नगर में पीलाखार नदी पर पुल न होने से क्षेत्र की लगभग 30 हजार की आबादी तहसील मुख्यालय से सीधे नहीं जुड़ पा रही है।
नदी पार के लोगों को वाया मिलक खानम होकर 15 किलोमीटर अधिक दूरी तय करके तहसील और ब्लॉक मुख्यालय जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसके अलावा भगवंत नगर समेत पश्चिम दिशा के दर्जनों गांवों के लोग रुद्रपुर से नहीं जुड़ पा रहे हैं। पुल न बनने से रोगियों, विद्यार्थियों और कारोबारियों को भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
भगवंतनगर ग्राम पंचायत के लगभग छह गांव की लगभग दस हजार से अधिक की आबादी नदी पार बसी है। मझरा बेवक्ता निवासी सेवानिवृत सैनिक सोम प्रकाश का कहना है कि मांग को लेकर मजरा बेवकता, कुंवरपुर, माचियागढ़ आदि लगभग छह गांव के लोग पुल न होने के कारण बरसात के दिनों में वाया मिलकखानम होकर 25 किलोमीटर दूरी तय करके स्वार पहुंचते हैं। यदि पुल बन जाए तो यह दूरी केवल दस किलोमीटर ही रह जाएगी।
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लकड़ी के अस्थायी पुल से गुजरते हैं लोग
बरसात के दिनों को छोड़ कर आसपास के ग्रामीणों द्वारा नदी पर वर्षों से लकड़ी का अस्थायी पुल बनाकर आवागमन किया जाता है, जिसे ग्रामीण चंदा इकट्ठा करके तैयार करते हैं। देखरेख के लिए 20 रुपये प्रति मोटरसाइकिल और 10 रुपये प्रति साइकिल प्रतीकात्मक शुल्क लिया जाता है। बरसात आते ही यह पुल बह जाता है और क्षेत्र के गांवों का संपर्क टूट जाता है।
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किसानों को उपज ले जाने में होती है दिक्कत
पक्का पुल न होने से किसानों को अनाज मंडी तक पहुंचने में 20–25 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। इसी के साथ रुद्रपुर मंडी, अस्पताल और शिक्षा जैसी सुविधाओं के लिए प्रतिदिन भगवंतनगर क्षेत्र के सैकड़ों लोग कई किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने कहा कि पुल बनने से पूरे क्षेत्र को सीधा लाभ मिलेगा।
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छात्रों को होती है परेशानी
मझरा बेवक्ता गांव के मनदीप कम्बोज का कहना है कि उसके आसपास के गांव के बच्चों को नदी पार करके राययपुर चुन्ना वाला समेत अन्य स्कूलों में पढ़ने के लिए बिना पुल की नदी पार करनी पड़ती है। बरसात के दिनों में इधर से गुजरना जान जोखिम में डालना होता है।
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पुल के लिए दो बार हो चुका है सर्वे
बेवक्ता का मझरा निवासी सेवानिवृत सैनिक सोम प्रकाश ने बताया कि अधिकारियों द्वारा दो बार सर्वे हो चुका है, लेकिन स्थिति जस की तस है। सर्वे के बावजूद पुल का निर्माण होने की दिशा में अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है। इस संबंध में विभाग भी कुछ बताने को तैयार नहीं है।
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इस पुल के निर्माण के लिए क्षेत्र के लोग उनसे मिले हैं। हालांकि यह प्रस्तावित पुल चमरौआ विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। इसके बावजूद भी जनहित में इसे अपनी प्राथमिकता में रखा है। वह शासन को पत्र लिख चुके हैं।
शफीक अहमद, अंसारी स्वार विधायक
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नदी पार के लोगों को वाया मिलक खानम होकर 15 किलोमीटर अधिक दूरी तय करके तहसील और ब्लॉक मुख्यालय जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसके अलावा भगवंत नगर समेत पश्चिम दिशा के दर्जनों गांवों के लोग रुद्रपुर से नहीं जुड़ पा रहे हैं। पुल न बनने से रोगियों, विद्यार्थियों और कारोबारियों को भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
भगवंतनगर ग्राम पंचायत के लगभग छह गांव की लगभग दस हजार से अधिक की आबादी नदी पार बसी है। मझरा बेवक्ता निवासी सेवानिवृत सैनिक सोम प्रकाश का कहना है कि मांग को लेकर मजरा बेवकता, कुंवरपुर, माचियागढ़ आदि लगभग छह गांव के लोग पुल न होने के कारण बरसात के दिनों में वाया मिलकखानम होकर 25 किलोमीटर दूरी तय करके स्वार पहुंचते हैं। यदि पुल बन जाए तो यह दूरी केवल दस किलोमीटर ही रह जाएगी।
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लकड़ी के अस्थायी पुल से गुजरते हैं लोग
बरसात के दिनों को छोड़ कर आसपास के ग्रामीणों द्वारा नदी पर वर्षों से लकड़ी का अस्थायी पुल बनाकर आवागमन किया जाता है, जिसे ग्रामीण चंदा इकट्ठा करके तैयार करते हैं। देखरेख के लिए 20 रुपये प्रति मोटरसाइकिल और 10 रुपये प्रति साइकिल प्रतीकात्मक शुल्क लिया जाता है। बरसात आते ही यह पुल बह जाता है और क्षेत्र के गांवों का संपर्क टूट जाता है।
किसानों को उपज ले जाने में होती है दिक्कत
पक्का पुल न होने से किसानों को अनाज मंडी तक पहुंचने में 20–25 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। इसी के साथ रुद्रपुर मंडी, अस्पताल और शिक्षा जैसी सुविधाओं के लिए प्रतिदिन भगवंतनगर क्षेत्र के सैकड़ों लोग कई किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने कहा कि पुल बनने से पूरे क्षेत्र को सीधा लाभ मिलेगा।
छात्रों को होती है परेशानी
मझरा बेवक्ता गांव के मनदीप कम्बोज का कहना है कि उसके आसपास के गांव के बच्चों को नदी पार करके राययपुर चुन्ना वाला समेत अन्य स्कूलों में पढ़ने के लिए बिना पुल की नदी पार करनी पड़ती है। बरसात के दिनों में इधर से गुजरना जान जोखिम में डालना होता है।
पुल के लिए दो बार हो चुका है सर्वे
बेवक्ता का मझरा निवासी सेवानिवृत सैनिक सोम प्रकाश ने बताया कि अधिकारियों द्वारा दो बार सर्वे हो चुका है, लेकिन स्थिति जस की तस है। सर्वे के बावजूद पुल का निर्माण होने की दिशा में अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है। इस संबंध में विभाग भी कुछ बताने को तैयार नहीं है।
इस पुल के निर्माण के लिए क्षेत्र के लोग उनसे मिले हैं। हालांकि यह प्रस्तावित पुल चमरौआ विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। इसके बावजूद भी जनहित में इसे अपनी प्राथमिकता में रखा है। वह शासन को पत्र लिख चुके हैं।
शफीक अहमद, अंसारी स्वार विधायक