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रास्ते में सड़ गया कई क्विंटल मटर
Updated Wed, 30 Aug 2017 09:39 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सांगला (किन्नौर)।
डेरा प्रमुख प्रकरण के चलते पंजाब और हरियाणा में लगाई गई धारा 144 का असर किन्नौर जिले के पूह खंड के हजारों किसानों-बागवानों पर पड़ा है। पूह खंड के अंतर्गत गांव स्पीलो करला, कानम, सुन्नम, ज्ञाबुंग, रौपावैली, आसरंग व लिप्पा के हजारों बागवानों को नकदी फसल मटर को अच्छा भाव नहीं मिल सका। पूह खंड में हजारों लोगों की नकदी फसल मटर का सीजन 20 अगस्त से 10 सितंबर तक चरम सीमा में होता है। इन दिनों भी मटर का सीजन चरम सीमा पर है।
कई कृषकों की कई क्विंटल नकदी फसल चंडीगढ़ मंडियों में न पहुंचकर रास्ते में सड़ गई। कई क्विंटल मटर सस्ते भाव में रामपुर, शिमला, रोहड़ू सहित कई अन्य लोकल मंडियों में ही बेचने पड़े। कई किसानों ने मटर का तुड़ान नहीं किया। इससे किसानों-बागवानों को लाखों रुपये का नुकसान झेलना पड़ा। तीन दिन के र्क्फयू के चलते किन्नौर के कई किसनों-बागवानों को अच्छा भाव नहीं मिल सका। पूह खंड के कर्ण लोक्टस, राजेंद्र लामा, ईश्वर नेगी, ईश्वर लासपा, कीर्ति नेगी, संजीव नेगी, दावा नेगी, ज्ञानचंद नेगी, यशवंत नेगी, सुनीता नेगी, अनीता नेगी, कविता नेगी, रविना नेगी, प्रियंका नेगी, रेखा नेगी, कुसुम नेगी आदि ने कहा कि डेरा प्रमुख प्रकरण के चलते बागवानों को अच्छे दाम नहीं मिल सके।
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सांगला (किन्नौर)।
डेरा प्रमुख प्रकरण के चलते पंजाब और हरियाणा में लगाई गई धारा 144 का असर किन्नौर जिले के पूह खंड के हजारों किसानों-बागवानों पर पड़ा है। पूह खंड के अंतर्गत गांव स्पीलो करला, कानम, सुन्नम, ज्ञाबुंग, रौपावैली, आसरंग व लिप्पा के हजारों बागवानों को नकदी फसल मटर को अच्छा भाव नहीं मिल सका। पूह खंड में हजारों लोगों की नकदी फसल मटर का सीजन 20 अगस्त से 10 सितंबर तक चरम सीमा में होता है। इन दिनों भी मटर का सीजन चरम सीमा पर है।
कई कृषकों की कई क्विंटल नकदी फसल चंडीगढ़ मंडियों में न पहुंचकर रास्ते में सड़ गई। कई क्विंटल मटर सस्ते भाव में रामपुर, शिमला, रोहड़ू सहित कई अन्य लोकल मंडियों में ही बेचने पड़े। कई किसानों ने मटर का तुड़ान नहीं किया। इससे किसानों-बागवानों को लाखों रुपये का नुकसान झेलना पड़ा। तीन दिन के र्क्फयू के चलते किन्नौर के कई किसनों-बागवानों को अच्छा भाव नहीं मिल सका। पूह खंड के कर्ण लोक्टस, राजेंद्र लामा, ईश्वर नेगी, ईश्वर लासपा, कीर्ति नेगी, संजीव नेगी, दावा नेगी, ज्ञानचंद नेगी, यशवंत नेगी, सुनीता नेगी, अनीता नेगी, कविता नेगी, रविना नेगी, प्रियंका नेगी, रेखा नेगी, कुसुम नेगी आदि ने कहा कि डेरा प्रमुख प्रकरण के चलते बागवानों को अच्छे दाम नहीं मिल सके।
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