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मीटर बदलने के नाम पर चल रहा अवैध वसूली का धंधा
Updated Sat, 30 Sep 2017 12:53 AM IST
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मीटर बदलने के नाम पर चल रहा वसूली का धंधा
रामपुर। शहर में बिजली मीटर बदलने के नाम पर वसूली का खेल चल रहा है। उपभोक्ताओं को स्टोर रीडिंग और मीटर टेंपरिंग की धमकी देकर तीन हजार रुपये से लेकर दस हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं। इससे न सिर्फ उपभोक्ता परेशान हैं, बल्कि विभाग को भी नुकसान हो रहा है। उपभोक्ताओं ने इसकी शिकायत अधिकारियों से की है।
जिले में खराब मीटर बदलने के लिए अभियान ठेके पर चल रहा है। शहर में ही तीन ठेकेदार यह काम कर रहे हैं। मीटर बदलने वाले ठेकेदार उपभोक्ताओं को धमका रहे हैं। मीटर चार्ज के नाम पर ही एक हजार रुपये से लेकर तीन हजार रुपये तक की वसूली की जा रही है। जबकि शासन से नि:शुल्क मीटर बदलवाए जा रहे हैं। कोई उपभोक्ता रुपये न दे तो उसके बिल में उल्टी सीधी रीडिंग भरकर बिल थमा दिया जाता है। रीडिंग मीटर में स्टोर दिखाई जाती है। रजा इंटर कालेज, अजीतपुर, पहाड़ी गेट समेत शहर के तमाम इलाकों से ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। निगम के अफसर ठेकेदारों पर शिकंजा नहीं कस पा रहे हैं। इससे उपभोक्ता तो परेशान हैं ही, विभाग को भी बड़े पैमाने पर चूना लगाया जा रहा है।
ठेकेदार बड़े पैमाने पर सही मीटर को भी खराब दिखाकर बदल रहे हैं। इसमें चौंकाने वाली बात यह है कि जितने भी खराब मीटर बदले जा रहे हैं, उनमें से अधिकांश मीटर फुंके हुए लैब में आते हैं, जिस कारण अधिकारी भी मीटर की वास्तविक स्थिति का आंकलन नहीं कर पाते।
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रामपुर। शहर में बिजली मीटर बदलने के नाम पर वसूली का खेल चल रहा है। उपभोक्ताओं को स्टोर रीडिंग और मीटर टेंपरिंग की धमकी देकर तीन हजार रुपये से लेकर दस हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं। इससे न सिर्फ उपभोक्ता परेशान हैं, बल्कि विभाग को भी नुकसान हो रहा है। उपभोक्ताओं ने इसकी शिकायत अधिकारियों से की है।
जिले में खराब मीटर बदलने के लिए अभियान ठेके पर चल रहा है। शहर में ही तीन ठेकेदार यह काम कर रहे हैं। मीटर बदलने वाले ठेकेदार उपभोक्ताओं को धमका रहे हैं। मीटर चार्ज के नाम पर ही एक हजार रुपये से लेकर तीन हजार रुपये तक की वसूली की जा रही है। जबकि शासन से नि:शुल्क मीटर बदलवाए जा रहे हैं। कोई उपभोक्ता रुपये न दे तो उसके बिल में उल्टी सीधी रीडिंग भरकर बिल थमा दिया जाता है। रीडिंग मीटर में स्टोर दिखाई जाती है। रजा इंटर कालेज, अजीतपुर, पहाड़ी गेट समेत शहर के तमाम इलाकों से ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। निगम के अफसर ठेकेदारों पर शिकंजा नहीं कस पा रहे हैं। इससे उपभोक्ता तो परेशान हैं ही, विभाग को भी बड़े पैमाने पर चूना लगाया जा रहा है।
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ठेकेदार बड़े पैमाने पर सही मीटर को भी खराब दिखाकर बदल रहे हैं। इसमें चौंकाने वाली बात यह है कि जितने भी खराब मीटर बदले जा रहे हैं, उनमें से अधिकांश मीटर फुंके हुए लैब में आते हैं, जिस कारण अधिकारी भी मीटर की वास्तविक स्थिति का आंकलन नहीं कर पाते।
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