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रहने को घर, चलने के लिए रास्ता नहीं
Updated Fri, 01 Sep 2017 09:31 PM IST
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रामपुर बुशहर।
रामपुर उपमंडल की सरपारा और निरमंड खंड की सरघा पंचायत में बाढ़ आने के बाद लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। चलते के लिए ठीक से रास्ता, सड़क की सुविधा नहीं। ऐसे में लोगों और विद्यार्थियों को जान हथेली पर रखकर आवाजाही करनी पड़ रही है। इतना ही नहीं कई लोगों को रहने के लिए घर तक नहीं है। करीब नौ परिवार के 50 लोग लोग भारी बरसात में टैंट में जीवन बसर कर रहे हैं। एक महीने बीतने वाला है और यहां पर हालात नहीं सुधरे। कई लोगों के घरों पर क्षतिग्रस्त होने का खतरा मंडरा रहा है।
सरकार और प्रशासन के नुमाइंदों ने ग्रामीणों को जल्द हर संभव मदद देने के आश्वासन दिए थे, जो सिरे नहीं चढ़ रहे। 26 दिन बीत जाने के बाद भी न तो प्रभावितों को राहत मिल पाई है और न ही सड़कों की हालत सुधरी। क्षेत्र के बागवानों को अपनी सेब की फसल सड़क तक पहुंचाने के लिए 200 रुपये प्रति पेटी ढुलाई दाम देना पड़ रहा है। आलम यह है कि बाढ़ से प्रभावित सुघा गांव और पंचायत के लोगों को उपचार के लिए 17 किलोमीटर का सफर करना पड़ रहा है। रसोई गैस की कमी से स्कूलों में भी मिड-डे मील तक नहीं बन पा रहा। हालांकि प्रशासन ने 11 अगस्त को राशन सामग्री और सेब की ढुलाई के लिए स्पेन लगाने का वादा किया था। लेकिन आज दिन तक स्पेन की व्यवस्था तो दूर ग्रामीणों का हाल जानने में भी कोई राजनेता या अधिकारी दिलचस्पी नहीं दिखा रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि आज विभाग की जेसीबी बिना तेल के बीच रास्ते में ही फंस कर रह गई है। सरपारा पंचायत उप प्रधान अलोक नेगी, किशोर परमार, शमशेर नेगी, रमेश जिष्टू, प्रदीप जिष्टू, प्यारे लाल कपाटिया, धर्मेंद्र सिंह, जगदीश केदारटा, इंद्र राज जिष्टू, सरघा पंचायत उप प्रधान ठाकुर दास बिष्ट, पूर्व उप प्रधान जीवन चौहान, बीडीसी नरेंद्र ठाकुर सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन से जल्द से जल्द ग्रामीणों को राहत देने की मांग की है। इस बारे में एसडीएम रामपुर डॉ. निपुण जिंदल का कहना है कि गैस और स्पेन लगाने के बारे में पंचायत प्रधान को निर्देश दिए गए हैं। सड़क निरमंड लोनिवि विभाग के तहत आती है, जिसे जल्द पूरा करने के लिए एक्सईएन निरमंड को निर्देश दिए गए हैं। उधर, इस बारे में एक्सईएन निरमंड राहुल सूद ने कहा कि सरघा से सरपारा की ओर सड़क का नामोनिशान मिट गया है। 100-100 मीटर नई सड़क निर्माण का कार्य चल रहा है।
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रामपुर उपमंडल की सरपारा और निरमंड खंड की सरघा पंचायत में बाढ़ आने के बाद लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। चलते के लिए ठीक से रास्ता, सड़क की सुविधा नहीं। ऐसे में लोगों और विद्यार्थियों को जान हथेली पर रखकर आवाजाही करनी पड़ रही है। इतना ही नहीं कई लोगों को रहने के लिए घर तक नहीं है। करीब नौ परिवार के 50 लोग लोग भारी बरसात में टैंट में जीवन बसर कर रहे हैं। एक महीने बीतने वाला है और यहां पर हालात नहीं सुधरे। कई लोगों के घरों पर क्षतिग्रस्त होने का खतरा मंडरा रहा है।
सरकार और प्रशासन के नुमाइंदों ने ग्रामीणों को जल्द हर संभव मदद देने के आश्वासन दिए थे, जो सिरे नहीं चढ़ रहे। 26 दिन बीत जाने के बाद भी न तो प्रभावितों को राहत मिल पाई है और न ही सड़कों की हालत सुधरी। क्षेत्र के बागवानों को अपनी सेब की फसल सड़क तक पहुंचाने के लिए 200 रुपये प्रति पेटी ढुलाई दाम देना पड़ रहा है। आलम यह है कि बाढ़ से प्रभावित सुघा गांव और पंचायत के लोगों को उपचार के लिए 17 किलोमीटर का सफर करना पड़ रहा है। रसोई गैस की कमी से स्कूलों में भी मिड-डे मील तक नहीं बन पा रहा। हालांकि प्रशासन ने 11 अगस्त को राशन सामग्री और सेब की ढुलाई के लिए स्पेन लगाने का वादा किया था। लेकिन आज दिन तक स्पेन की व्यवस्था तो दूर ग्रामीणों का हाल जानने में भी कोई राजनेता या अधिकारी दिलचस्पी नहीं दिखा रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि आज विभाग की जेसीबी बिना तेल के बीच रास्ते में ही फंस कर रह गई है। सरपारा पंचायत उप प्रधान अलोक नेगी, किशोर परमार, शमशेर नेगी, रमेश जिष्टू, प्रदीप जिष्टू, प्यारे लाल कपाटिया, धर्मेंद्र सिंह, जगदीश केदारटा, इंद्र राज जिष्टू, सरघा पंचायत उप प्रधान ठाकुर दास बिष्ट, पूर्व उप प्रधान जीवन चौहान, बीडीसी नरेंद्र ठाकुर सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन से जल्द से जल्द ग्रामीणों को राहत देने की मांग की है। इस बारे में एसडीएम रामपुर डॉ. निपुण जिंदल का कहना है कि गैस और स्पेन लगाने के बारे में पंचायत प्रधान को निर्देश दिए गए हैं। सड़क निरमंड लोनिवि विभाग के तहत आती है, जिसे जल्द पूरा करने के लिए एक्सईएन निरमंड को निर्देश दिए गए हैं। उधर, इस बारे में एक्सईएन निरमंड राहुल सूद ने कहा कि सरघा से सरपारा की ओर सड़क का नामोनिशान मिट गया है। 100-100 मीटर नई सड़क निर्माण का कार्य चल रहा है।
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