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Raebareli News: निगरानी बढ़ी तो वाट्सएप पर लिख रहे दवा
Sun, 01 Jun 2025 01:11 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Sun, 01 Jun 2025 01:11 AM IST
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रायबरेली। जिला अस्पताल और सीएचसी-पीएचसी के डॉक्टर सुधर नहीं रहे हैं। निगरानी बढ़ते ही डॉक्टरों ने मरीजों को बाजार की दवा खरीदवाने का नया फॉर्मूला निकाल लिया। अस्पतालों में दवा की परची तो कम हो गई है लेकिन सेटिंग वाले दुकानदार को वाट्सएप पर दवाएं लिखकर भेजने का खेल शुरू हो गया है। मरीजों को सीधे दुकान पर जाकर दवा लेने के लिए कहा जा रहा है। कई मरीजों को तो दुकान पर पहुंचकर बात कराने की सलाह दी जा रही है।
शनिवार को जिला अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में चिकित्सीय सलाह लेने के लिए आए शिवगढ़ के राम कुमार का कहना है कि उसे पैर में समस्या है। इलाज कराने के लिए जिला अस्पताल आए हैं। एक चिकित्सक ने अस्पताल के काउंटर से दवा लेकर दिखाने के लिए दोबारा बुलाया। ओपीडी में दोबारा पहुंचने पर अस्पताल चौराहा स्थित दवा की एक दुकान पर जाकर शेष दवाएं लेने की सलाह दी।
मेडिकल स्टोर पर पहुंचते ही दुकानदार ने नाम पूछा और 320 रुपये लेने के बाद दवा दे दी। इसी तरह अस्पताल आए कई और मरीजों को मेडिकल स्टोर पर भेजकर बाजार से दवाएं खरीदवाई गईं। अस्पताल चौराहा स्थित एक मेडिकल स्टोर संचालक का कहना है कि बाजार से दवाएं खरीदने के खेल को कोई रोकवा नहीं सकता है। डॉक्टरों से सीधे संपर्क है। परची नहीं तो मोबाइल में मैसेज भेजा जा रहा है। इसकी भनक भी किसी को नहीं लग पाती है।
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ओपीडी कक्षों में बाहरी लोगों की क्या जरूरत
जिला अस्पताल के ओपीडी कक्षों में मरीजों और डॉक्टरों के अलावा बाहरी लोग आसानी से देखे जा सकते हैं। ये बाहरी लोग बाजार की दवा लिखवाने वाले कारोबारियों के प्रतिनिधि बताए जा रहे हैं। कारोबारी ऐसा इसलिए करते हैं कि चिकित्सक अधिक से अधिक संख्या में उनकी दवाएं ही मरीजों को लिखें।
शासन स्तर से सभी सीएमओ और सीएमएस को पत्र जारी कर मरीजों को सारी दवाएं अस्पतालों से दिलाने के आदेश हैं। बाजार से खरीदने के लिए दवा परची लिखने वाले डॉक्टरों को चिह्नित कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
- डॉ. जीपी गुप्ता, अपर निदेशक (चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण)
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शनिवार को जिला अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में चिकित्सीय सलाह लेने के लिए आए शिवगढ़ के राम कुमार का कहना है कि उसे पैर में समस्या है। इलाज कराने के लिए जिला अस्पताल आए हैं। एक चिकित्सक ने अस्पताल के काउंटर से दवा लेकर दिखाने के लिए दोबारा बुलाया। ओपीडी में दोबारा पहुंचने पर अस्पताल चौराहा स्थित दवा की एक दुकान पर जाकर शेष दवाएं लेने की सलाह दी।
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मेडिकल स्टोर पर पहुंचते ही दुकानदार ने नाम पूछा और 320 रुपये लेने के बाद दवा दे दी। इसी तरह अस्पताल आए कई और मरीजों को मेडिकल स्टोर पर भेजकर बाजार से दवाएं खरीदवाई गईं। अस्पताल चौराहा स्थित एक मेडिकल स्टोर संचालक का कहना है कि बाजार से दवाएं खरीदने के खेल को कोई रोकवा नहीं सकता है। डॉक्टरों से सीधे संपर्क है। परची नहीं तो मोबाइल में मैसेज भेजा जा रहा है। इसकी भनक भी किसी को नहीं लग पाती है।
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ओपीडी कक्षों में बाहरी लोगों की क्या जरूरत
जिला अस्पताल के ओपीडी कक्षों में मरीजों और डॉक्टरों के अलावा बाहरी लोग आसानी से देखे जा सकते हैं। ये बाहरी लोग बाजार की दवा लिखवाने वाले कारोबारियों के प्रतिनिधि बताए जा रहे हैं। कारोबारी ऐसा इसलिए करते हैं कि चिकित्सक अधिक से अधिक संख्या में उनकी दवाएं ही मरीजों को लिखें।
शासन स्तर से सभी सीएमओ और सीएमएस को पत्र जारी कर मरीजों को सारी दवाएं अस्पतालों से दिलाने के आदेश हैं। बाजार से खरीदने के लिए दवा परची लिखने वाले डॉक्टरों को चिह्नित कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
- डॉ. जीपी गुप्ता, अपर निदेशक (चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण)