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UP: हाईकोर्ट बोला- ध्वनि प्रदूषण मामले में डीजीपी, परिवहन आयुक्त, यूपी पीसीबी करें कार्रवाई

Thu, 02 Apr 2026 09:07 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला नेटवर्क, रायबरेली
अमर उजाला नेटवर्क, रायबरेली Published by: Akash Dwivedi Updated Thu, 02 Apr 2026 09:07 PM IST
सार

लखनऊ हाईकोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए डीजीपी, परिवहन आयुक्त और यूपी पीसीबी को सख्त निर्देश दिए। मोडिफाइड साइलेंसर और हूटर से होने वाले शोर को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए कार्रवाई करनी होगी। अगली सुनवाई 20 मई को होगी, तब कार्रवाई रिपोर्ट पेश करनी अनिवार्य होगी।

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UP: High Court Directs DGP, Transport Commissioner, and UP PCB to Take Action in Noise Pollution Case
हाईकोर्ट । - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने ध्वनि प्रदूषण के मामले में बृहस्पतिवार को सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक, परिवहन आयुक्त और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपी पीसीबी) के सदस्य–सचिव को निर्देश दिए कि वे वाहनों के मोडिफाइड साइलेंसरों से होने वाले शोर को रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई करें। 

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कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 20 मई को निर्धारित की और उस दिन कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने को कहा। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने यह आदेश वर्ष 2021 में ‘मोडिफाइड साइलेंसरों से ध्वनि प्रदूषण’ शीर्षक से दर्ज स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर दिया।

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परिवहन आयुक्त को उपस्थित होने का आदेश दिया था

इससे पहले कोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये डीजीपी और परिवहन आयुक्त को उपस्थित होने का आदेश दिया था। कोर्ट ने उनसे पूछा कि पिछले पांच वर्षों में मोडिफाइड साइलेंसरों और हूटरों के निर्माण एवं बिक्री को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए।

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सुनवाई के दौरान दोनों आला अधिकारी और यूपी पीसीबी के सदस्य–सचिव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश हुए और अपने द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी दी। हालांकि, कोर्ट इससे संतुष्ट नहीं हुआ और ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए अधिक प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह केवल आंकड़े नहीं जानना चाहती, बल्कि वास्तविक और प्रभावी कार्यप्रणाली की जानकारी चाहती है।


कोर्ट ने पहले सुनवाई में ही सभी संबंधित विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों को मिलाकर एक समिति बनाने का आदेश दिया था। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अधिवक्ता ने बताया कि समिति बन गई है।  अदालत ने कहा कि हम सभी गवाह हैं कि मोडिफाइड साइलेंसर और हूटर आदि का शोर शहर में आधी रात तक भी सुनाई देता है। प्राथमिक जिम्मेदारी गृह और परिवहन विभाग पर है कि वे ऐसे ध्वनि प्रदूषण को रोकें।

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