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Raebareli News: अघोषित बिजली कटौती ने छीना चैन
Mon, 29 Sep 2025 01:09 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Mon, 29 Sep 2025 01:09 AM IST
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शहर के गोराबाजार में ट्रांफार्मर का तार जोड़ता कर्मचारी।
रायबरेली। गर्मी और उमस के बीच बिजली की किल्लत बढ़ गई है। शहर में बिजली की आवाजाही से लोग परेशान हैं। ग्रामीण अंचलों में फॉल्ट और अघोषित कटौती ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दिन में महज तीन से चार घंटे बिजली मिल रही है। इससे उपभोक्ताओं को बिजली संकट से जूझना पड़ रहा है। ओवरलोड उपकरण आए दिन फुंक रहे हैं। इससे किसान धान की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। बिजली बिना लोग गर्मी और उमस से जूझ रहे हैं।
अगस्त में बिजली की मांग 300 मेगावाट के आसपास थी। सितंबर में तेज धूप और गर्मी के चलते बिजली की मांग 375 मेगावाट पहुंच गई है। इससे उपकेंद्र पर लगे उपकरण ओवरलोड हैं। शहर में कहीं एलटी केबल तो कहीं ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं को बिजली संकट से जूझना पड़ रहा है।
शहर के तेलियाकोट, गोराबाजार, इंदिरा नगर प्रगतिपुरम, आईटीआई उपकेंद्र से जुड़े उपभोक्ता बिजली की आवाजाही से परेशान हैं। सबसे खराब हाल ग्रामीण क्षेत्रों का है। उपकेंद्र में लगे उपकरण ओवरलोड होने के कारण इससे वोल्टेज बहुत कम मिल रहा है। हालत यह है कि घरों में लगे सबमर्सिबल पंप नहीं चल पा रहे हैं। सबसे खराब हालत विद्युत वितरण खंड द्वितीय के अंतर्गत आने वाले उपकेंद्रों की है। इन उपकेंद्रों की 33 केवी लाइन और 11 केवी लाइनों की लंबाई अधिक होने के कारण उपभोक्ताओं को भरपूर बिजली नहीं मिल पा रही है।
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पानी बिना सूख रही फसल
इस समय धान की फसल की बालियां निकल रही हैं। ऐसे वक्त में फसल को पानी की बहुत जरूरत रहती है। नहरों में पानी नहीं आ रहा है। अटौरा के किसान रामकुमार, सोइठा के मदन तिवारी, हरचंदपुर के अतुल शुक्ला, गुरुबख्शगंज के रामउजेर ने बताया कि वोल्टेज इतना कम रहता है कि नलकूप की मोटर जलने का खतरा बना रहता है। घरों में लगे सबमर्सिबल पंप नहीं चल पा रहे हैं। हैंडपंपों का दूषित पानी पीना पड़ रहा है।
मरम्मत के नाम पर धन की बंदरबांट
उपकेंद्रों में लगे उपकरणों और ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि में हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। मरम्मत के नाम पर धन का बंदरबांट किया जाता है। यही वजह है कि मामूली हवा चलने या फिर बारिश होने से बिजली गुल हो जाती है। जर्जर तार बदलने के नाम पर केवल औपचारिकता हो रही है। इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।
शेड्यूल के हिसाब से हो रही आपूर्ति
बिजली की कोई किल्लत नहीं है। शेड्यूल के हिसाब से आपूर्ति हो रही है। अघोषित कटौती ऊपर से होती है। लोकल स्तर पर आने वाले फॉल्ट को समय से ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं।
- नेकी राम, अधीक्षण अभियंता विद्युत वितरण मंडल प्रथम
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अगस्त में बिजली की मांग 300 मेगावाट के आसपास थी। सितंबर में तेज धूप और गर्मी के चलते बिजली की मांग 375 मेगावाट पहुंच गई है। इससे उपकेंद्र पर लगे उपकरण ओवरलोड हैं। शहर में कहीं एलटी केबल तो कहीं ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं को बिजली संकट से जूझना पड़ रहा है।
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शहर के तेलियाकोट, गोराबाजार, इंदिरा नगर प्रगतिपुरम, आईटीआई उपकेंद्र से जुड़े उपभोक्ता बिजली की आवाजाही से परेशान हैं। सबसे खराब हाल ग्रामीण क्षेत्रों का है। उपकेंद्र में लगे उपकरण ओवरलोड होने के कारण इससे वोल्टेज बहुत कम मिल रहा है। हालत यह है कि घरों में लगे सबमर्सिबल पंप नहीं चल पा रहे हैं। सबसे खराब हालत विद्युत वितरण खंड द्वितीय के अंतर्गत आने वाले उपकेंद्रों की है। इन उपकेंद्रों की 33 केवी लाइन और 11 केवी लाइनों की लंबाई अधिक होने के कारण उपभोक्ताओं को भरपूर बिजली नहीं मिल पा रही है।
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पानी बिना सूख रही फसल
इस समय धान की फसल की बालियां निकल रही हैं। ऐसे वक्त में फसल को पानी की बहुत जरूरत रहती है। नहरों में पानी नहीं आ रहा है। अटौरा के किसान रामकुमार, सोइठा के मदन तिवारी, हरचंदपुर के अतुल शुक्ला, गुरुबख्शगंज के रामउजेर ने बताया कि वोल्टेज इतना कम रहता है कि नलकूप की मोटर जलने का खतरा बना रहता है। घरों में लगे सबमर्सिबल पंप नहीं चल पा रहे हैं। हैंडपंपों का दूषित पानी पीना पड़ रहा है।
मरम्मत के नाम पर धन की बंदरबांट
उपकेंद्रों में लगे उपकरणों और ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि में हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। मरम्मत के नाम पर धन का बंदरबांट किया जाता है। यही वजह है कि मामूली हवा चलने या फिर बारिश होने से बिजली गुल हो जाती है। जर्जर तार बदलने के नाम पर केवल औपचारिकता हो रही है। इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।
शेड्यूल के हिसाब से हो रही आपूर्ति
बिजली की कोई किल्लत नहीं है। शेड्यूल के हिसाब से आपूर्ति हो रही है। अघोषित कटौती ऊपर से होती है। लोकल स्तर पर आने वाले फॉल्ट को समय से ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं।
- नेकी राम, अधीक्षण अभियंता विद्युत वितरण मंडल प्रथम