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Raebareli News: लोन के खेल में लखनऊ के दो बैंक खातों का खुलासा

Thu, 22 Jan 2026 12:19 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली Updated Thu, 22 Jan 2026 12:19 AM IST
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Two Lucknow bank accounts exposed in loan scam
हाथी पार्क ​स्थित बीओबी की मुख्य शाखा।
रायबरेली। बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) की मुख्य शाखा में 9.2 करोड़ रुपये के लोन फर्जीवाड़े की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इस मामले में ''सोर्स ऑफ इनकम'' के तौर पर इस्तेमाल किए गए दो बैंक खाते लखनऊ के पाए गए हैं, जो यूको बैंक में संचालित हो रहे थे। पुलिस अब इस मामले की तह तक जाने के लिए लखनऊ जाएगी और संबंधित बैंक अधिकारियों से पूछताछ करेगी।
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बीते दिनों बैंक ऑफ बड़ौदा की मुख्य शाखा, रायबरेली में जाली दस्तावेजों के आधार पर 48 आवेदकों को 9.2 करोड़ रुपये का लोन दिए जाने का मामला सामने आया था। इस संबंध में बैंक के मुख्य प्रबंधक मुकेश की तहरीर पर सदर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। पुलिस की शुरुआती जांच में यह पाया गया कि लोन हासिल करने के लिए लखनऊ सचिवालय, जिला पंचायत, परिवार कल्याण, शिक्षा सहित 15 विभागों के जाली वेतन प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया गया था। इतना ही नहीं, आरोपियों के आधारकार्ड में पते भी बदले हुए पाए गए थे।
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आदर्श ट्रेडर्स और रायबरेली ट्रेजर के नाम से खुले बैंक खातों से सोर्स आफ इनकम (सैलरी अकाउंट) दिखाकर बीओबी की मुख्य शाखा से आवेदकों के ऋण लेने का खुलासा हुआ था। सूत्रों का दावा है कि रायबरेली ट्रेजर और आदर्श ट्रेजर संबंधित खाते लखनऊ स्थित यूको बैंक के हैं।
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ऐसे में सैलरी अकाउंट बनने वाले खातों से फर्जीवाड़े से जुड़ी संबंधित जानकारी जुटाने के लिए पुलिस जल्द लखनऊ जाएगी। यूको बैंक के अधिकारियों से पुलिस जानने का प्रयास करेगी कि वास्तव में यह खाते यूको बैंक के हैं या नहीं। यदि यूको बैंक के खाते हैं तो इन खातों को किसने खोलवाया था। इन खातों को खोलवाने का मकसद क्या था।

लखनऊ सिंडिकेट की आशंका
इस फर्जीवाड़े में लखनऊ के किसी सिंडिकेट के शामिल होने की आशंका भी जताई जा रही है। यह माना जा रहा है कि वर्ष 2024 और 2025 में जाली दस्तावेजों के जरिये बीओबी से इतनी बड़ी राशि का लोन आसानी से ले लिया गया और बैंक के अधिकारियों व कर्मचारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। एफआईआर दर्ज होने के बाद जब पुलिस जांच कर रही है, तब हर दिन नए तथ्य सामने आ रहे हैं। यदि सैलरी अकाउंट का खुलासा नहीं होता, तो शायद यह लोन मिलना संभव नहीं होता।



बीओबी में हुए फर्जीवाड़े की जांच तेजी से कराई जा रही है। फर्जीवाड़े से संबंधित अहम सुराग पुलिस के हाथ लगे हैं। फर्जीवाड़े में सिंडिकेट से जुड़ने वाले लोगों को चिह्नित किया रहा है।
- अरुण कुमार नौहवार, सीओ सदर
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