{"_id":"686c15d4ad0c85961802f8a4","slug":"two-fraudsters-arrested-for-gst-theft-of-rs-1076-crore-raebareli-news-c-101-1-slko1031-136643-2025-07-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Raebareli News: 10.76 करोड़ की जीएसटी चोरी में दो जालसाज गिरफ्तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Raebareli News: 10.76 करोड़ की जीएसटी चोरी में दो जालसाज गिरफ्तार
Tue, 08 Jul 2025 12:15 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Tue, 08 Jul 2025 12:15 AM IST
विज्ञापन
रायबरेली। 10.76 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी में सदर कोतवाली पुलिस ने सोमवार शाम गाजियाबाद के रहने वाले दो जालसाजों को गिरफ्तार किया। पुलिस की माने तो पकड़े गए दोनों आरोपी फर्जी सेल कंपनी बनाकर मनी लॉन्ड्रिंग करने के संगठित गिरोह के सदस्य हैं। पुलिस के मुताबिक शाम छह बजे डिग्री कॉलेज चौराहा के पास से गाजियाबाद जिले के सिहानी गेट थाना क्षेत्र के 277 मालीवारा निवासी योगेश गर्ग और वेब सिटी थाना क्षेत्र के डब्लू-16 गोल्फ लिंक डायमंड फ्लाईओवर के पास रहने वाले संजय ठाकुर को गिरफ्तार किया गया है।
सर्वश्री राजधानी इंटरप्राइजेज के नाम से एक फर्म रायबरेली में रजिस्टर्ड की गई थी। उस फर्म को रजिस्टर्ड कराने के दौरान लगाए गए मोबाइल नंबर के आधार पर गहन जानकारी करके अन्य फर्जी (सेल कंपनी) मनी लॉन्ड्रिंग करने के लिए रजिस्टर्ड की गई। जांच में पता चला कि योगेश गर्ग उर्फ मोनू के कागजात फर्जी कंपनी रजिस्टर्ड कराने में प्रयोग किए गए थे, जिसमें जीएसटी का कुछ प्रतिशत पैसा मिलता था।
योगेश ने बताया कि वह संजय ठाकुर के अधीन काम करता है। संजय ने बताया कि वह नरेश राणा नाम के व्यक्ति व उनके अन्य साथियों के साथ मिलकर काम करता है। वह माल का फर्जी बिल तैयार करता है, जिससे 18 फीसदी जीएसटी बनती है। उसमें जो कमीशन मिलता है, उसे वह योगेश को कमीशन देता है। सदर कोतवाली प्रभारी राजेश कुमार सिंह ने बताया कि रायबरेली में रजिस्टर्ड की गई फर्म के मामले का केस दर्ज कराया गया था।
विज्ञापन
जांच में पकड़े गए आरोपियों के नाम प्रकाश में आए थे। दोनों आरोपी केस के सिलसिले में अधिवक्ता से मिलने आए थे, तभी दबोच लिए गए। इन दोनों ने मिलकर 10.76 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी की थी।
शासन ने लिया था संज्ञान, निलंबित किए गए थे अधिकारी
रायबरेली। जीएसटी चोरी के मामले को शासन ने गंभीरता से लिया था। यही वजह थी कि राज्यकर विभाग के डिप्टी कमिश्नर मनीष कुमार और असिस्टेंट कमिश्नर रीतेश कुमार बरनवाल को निलंबित कर दिया गया था। अधिकारियों ने कार्रवाई से बचने के लिए 17 जून 2025 को सदर कोतवाली क्षेत्र के सत्यनगर निवासी रमेशचंद्र के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में जिस व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया, उसने अधिकारियों को शिकायतीपत्र भेजकर मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की थी।
आरोप लगाया कि उसने दो साल पहले ही जीएसटी सरेंडर कर दी थी। उसके आधार और मोबाइल नंबर का प्रयोग करके फर्जीवाड़ा किया गया। ऑनलाइन मुकदमा भी दर्ज कराया था। बीती 24 फरवरी को राजधानी इंटरप्राइजेज फर्म को सस्पेंड किए जाने के बाद भी अधिकारियों की मिलीभगत से जालसाजों ने बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट आईटीसी जनरेट करके जीएसटी का खेल जारी रखा था। दिल्ली की शिव इंटरप्राइजेज के साथ काम कर 57.35 करोड़ की समान की आपूर्ति कर 10.76 करोड़ की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) ट्रांसफर करा ली थी।
विज्ञापन
सर्वश्री राजधानी इंटरप्राइजेज के नाम से एक फर्म रायबरेली में रजिस्टर्ड की गई थी। उस फर्म को रजिस्टर्ड कराने के दौरान लगाए गए मोबाइल नंबर के आधार पर गहन जानकारी करके अन्य फर्जी (सेल कंपनी) मनी लॉन्ड्रिंग करने के लिए रजिस्टर्ड की गई। जांच में पता चला कि योगेश गर्ग उर्फ मोनू के कागजात फर्जी कंपनी रजिस्टर्ड कराने में प्रयोग किए गए थे, जिसमें जीएसटी का कुछ प्रतिशत पैसा मिलता था।
विज्ञापन
योगेश ने बताया कि वह संजय ठाकुर के अधीन काम करता है। संजय ने बताया कि वह नरेश राणा नाम के व्यक्ति व उनके अन्य साथियों के साथ मिलकर काम करता है। वह माल का फर्जी बिल तैयार करता है, जिससे 18 फीसदी जीएसटी बनती है। उसमें जो कमीशन मिलता है, उसे वह योगेश को कमीशन देता है। सदर कोतवाली प्रभारी राजेश कुमार सिंह ने बताया कि रायबरेली में रजिस्टर्ड की गई फर्म के मामले का केस दर्ज कराया गया था।
विज्ञापन
जांच में पकड़े गए आरोपियों के नाम प्रकाश में आए थे। दोनों आरोपी केस के सिलसिले में अधिवक्ता से मिलने आए थे, तभी दबोच लिए गए। इन दोनों ने मिलकर 10.76 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी की थी।
शासन ने लिया था संज्ञान, निलंबित किए गए थे अधिकारी
रायबरेली। जीएसटी चोरी के मामले को शासन ने गंभीरता से लिया था। यही वजह थी कि राज्यकर विभाग के डिप्टी कमिश्नर मनीष कुमार और असिस्टेंट कमिश्नर रीतेश कुमार बरनवाल को निलंबित कर दिया गया था। अधिकारियों ने कार्रवाई से बचने के लिए 17 जून 2025 को सदर कोतवाली क्षेत्र के सत्यनगर निवासी रमेशचंद्र के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में जिस व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया, उसने अधिकारियों को शिकायतीपत्र भेजकर मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की थी।
आरोप लगाया कि उसने दो साल पहले ही जीएसटी सरेंडर कर दी थी। उसके आधार और मोबाइल नंबर का प्रयोग करके फर्जीवाड़ा किया गया। ऑनलाइन मुकदमा भी दर्ज कराया था। बीती 24 फरवरी को राजधानी इंटरप्राइजेज फर्म को सस्पेंड किए जाने के बाद भी अधिकारियों की मिलीभगत से जालसाजों ने बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट आईटीसी जनरेट करके जीएसटी का खेल जारी रखा था। दिल्ली की शिव इंटरप्राइजेज के साथ काम कर 57.35 करोड़ की समान की आपूर्ति कर 10.76 करोड़ की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) ट्रांसफर करा ली थी।