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48 घंटे में ट्रांसफार्मर न बदलना पड़ा महंगा
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे
Updated Sat, 06 May 2017 12:24 AM IST
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बिजली
- फोटो : अमर उजाला
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सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 48 घंटे में ट्रांसफार्मर बदलने के निर्देश दिए हैं, लेकिन जिले में ऐसा संभव नहीं हो रहा है। यही वजह है कि डिस्ट्रीब्यूशन के अफसरों से ट्रांसफार्मर बदलने का कार्य छीन लिया गया। अब वर्कशॉप को ट्रांसफार्मर बदलने की जिम्मेदारी दे दी गई है। इसका आदेश यहां आते ही विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। ऐसा होने से अब ट्रांसफार्मर बदलने की प्रक्रिया में तेजी आने की बात कही जा रही है।
जिले में विभिन्न क्षमता के करीब 12 हजार ट्रांसफार्मर लगे हैं। निजी नलकूप उपभोक्ताओं के अलावा अन्य ट्रांसफार्मर खराब होने की जिम्मेदारी पावर कॉर्पोरेशन की है। अब तक ट्रांसफार्मर बदलवाने का काम डिस्टीब्यूशन के अधिकारियों की निगरानी में होता था।
लापरवाह अभियंताओं और ठेकेदार की मनमानी की वजह से 72 घंटे में ट्रांसफार्मर नहीं बदल पा रहे थे। योगी सरकार ने इस समय को घटाकर 48 घंटे कर दिया है। तय समय में ट्रांसफार्मर नहीं बदलने के चलते डिस्टीब्यूशन से ट्रांसफार्मर बदलने का काम छीन लिया गया है। अब वर्कशाप ही ट्रांसफार्मरों की मरम्मत कराने के साथ-साथ खराब ट्रांसफार्मरों को बदलवाएगा।
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डिस्ट्रीब्यूशन के अधिकारियों से ट्रांसफार्मर बदलने का कार्य छीन जाने के बाद अब इन अफसरों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। माना जा रहा है कि जिस तरह कार्य में बदलाव किया गया, उससे लापरवाह अधिकारी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
डिस्ट्रीब्यूशन के अधिकारी कार्य अधिक होने से तय समय पर ट्रांसफार्मर न बदलने की वजह बता रहे हैं। फिलहाल जिस तरह इस मामले में कार्रवाई की गई, उससे जाहिर है कि अफसरों पर भी जल्द उच्चाधिकारी कार्रवाई कर सकते हैं।
पिछले तीन साल से एक ही ठेकेदार को ट्रांसफार्मर बदलवाने का ठेका दिया जा रहा है। हर साल ट्रांसफार्मर बदलने के नाम पर करीब 60 लाख रुपये का वारा-न्यारा होता है। ई-टेंडरिंग का निर्देश होने के बावजूद पावर कॉर्पोरेशन के अफसर पुराने ठेकेदार को ही काम काम दिलाने में लगे हैं।
पावर कॉर्पोरेशन के चीफ इंजीनियर एके श्रीवास्तव खराब ट्रांसफार्मरों को बनाने और बदलने का काम वर्कशाप को सौंप दिया गया है। डिस्टीब्यूशन पर वर्कलोड होने के चलते यह काम वर्कशाप को सौंपा गया है।
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जिले में विभिन्न क्षमता के करीब 12 हजार ट्रांसफार्मर लगे हैं। निजी नलकूप उपभोक्ताओं के अलावा अन्य ट्रांसफार्मर खराब होने की जिम्मेदारी पावर कॉर्पोरेशन की है। अब तक ट्रांसफार्मर बदलवाने का काम डिस्टीब्यूशन के अधिकारियों की निगरानी में होता था।
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लापरवाह अभियंताओं और ठेकेदार की मनमानी की वजह से 72 घंटे में ट्रांसफार्मर नहीं बदल पा रहे थे। योगी सरकार ने इस समय को घटाकर 48 घंटे कर दिया है। तय समय में ट्रांसफार्मर नहीं बदलने के चलते डिस्टीब्यूशन से ट्रांसफार्मर बदलने का काम छीन लिया गया है। अब वर्कशाप ही ट्रांसफार्मरों की मरम्मत कराने के साथ-साथ खराब ट्रांसफार्मरों को बदलवाएगा।
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डिस्ट्रीब्यूशन के अधिकारियों से ट्रांसफार्मर बदलने का कार्य छीन जाने के बाद अब इन अफसरों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। माना जा रहा है कि जिस तरह कार्य में बदलाव किया गया, उससे लापरवाह अधिकारी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
डिस्ट्रीब्यूशन के अधिकारी कार्य अधिक होने से तय समय पर ट्रांसफार्मर न बदलने की वजह बता रहे हैं। फिलहाल जिस तरह इस मामले में कार्रवाई की गई, उससे जाहिर है कि अफसरों पर भी जल्द उच्चाधिकारी कार्रवाई कर सकते हैं।
पिछले तीन साल से एक ही ठेकेदार को ट्रांसफार्मर बदलवाने का ठेका दिया जा रहा है। हर साल ट्रांसफार्मर बदलने के नाम पर करीब 60 लाख रुपये का वारा-न्यारा होता है। ई-टेंडरिंग का निर्देश होने के बावजूद पावर कॉर्पोरेशन के अफसर पुराने ठेकेदार को ही काम काम दिलाने में लगे हैं।
पावर कॉर्पोरेशन के चीफ इंजीनियर एके श्रीवास्तव खराब ट्रांसफार्मरों को बनाने और बदलने का काम वर्कशाप को सौंप दिया गया है। डिस्टीब्यूशन पर वर्कलोड होने के चलते यह काम वर्कशाप को सौंपा गया है।