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Raebareli News: चिकित्सक हैं नहीं, फार्मासिस्ट संभाल रहे अस्पताल

Fri, 14 Aug 2026 01:40 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली Updated Fri, 14 Aug 2026 01:40 AM IST
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There are no doctors; pharmacists are running the hospital
रायबरेली। जिले के 38 पशु चिकित्सालयों का हाल बेहाल है। पशु चिकित्सक समय पर अस्पताल पहुंचना मुनासिब ही नहीं समझते। इसके कारण फार्मासिस्ट और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही पशुओं का उपचार कर रहे हैं। कुछ अस्पतालों को खोलकर कर्मचारी चले जाते हैं तो कुछ पर दिनभर ताला लटका रहता है। अधिकतर अस्पताल जर्जर अवस्था मेंं हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल में बृहस्पतिवार को पशु चिकित्सालयों के बदइंतजामी की पोल खोल दी। पशुपालन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि डॉक्टर, फार्मासिस्ट और अन्य कर्मचारियों की कमी पशुपालकों पर भारी पड़ रही है। भवन जर्जर हैं। पानी, बिजली व शौचालय की व्यवस्था है। टीकाकरण और कृत्रिम गर्भाधान की व्यवस्था है।
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1962 पशु एंबुलेंस सेवा का लाभ कागजों तक सीमित रह गया है। पिछले एक साल में ओपीडी में पांच लाख पशुओं का इलाज किया गया। विभाग का दावा है कि दवा व बजट की उपलब्धता रहती है। इसके उलट अस्पतालों में व्याप्त बदइंतजामी का खामियाजा पशुपालकों को उठाना पड़ रहा है।
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उधर, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. कुलदीप द्विवेदी ने बताया कि जिले के 38 पशु चिकित्सालयों में पशुओं का बेहतर इलाज किया जा रहा है। दवाओं की कोई कमी नहीं है। स्टाफ की कमी की वजह से बेहतर तरीके से अस्पताल का संचालन नहीं हो पाता है।


पशु चिकित्सालय में ताला
डीह। राजकीय पशु चिकित्सालय डीह में पशुओं के इलाज होने की बात कौन कहे, यहां पर नियमित रूप से चिकित्सक की तैनाती नहीं है। इससे पशुओं को इलाज नहीं हो पा रहा है। दवाओं की कमी है। बृहस्पतिवार को चिकित्सालय में ताला लटक रहा था। यहां पर एक कर्मचारी की तैनाती है। कर्मचारी सुबह टीके लगाने गांव चला जाता है। दोपहर में जब आता है तो अस्पताल खुलता है। पशु चिकित्सालय परशदेपुर के डॉ. यशवंत सिंह को डीह पशु चिकित्सालय का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। चिकित्सक समय मिलने पर अस्पताल आते हैं। पशुपालक दिनेश यादव, अमरेंद्र सिंह बताते हैं कि पशुओं का इलाज नहीं हो पाता है।


समय से नहीं आते चिकित्सक
डलमऊ। कस्बा स्थित पशु चिकित्सालय का भवन जर्जर अवस्था में है। स्टाफ के नाम पर एक चिकित्सक व एक फार्मासिस्ट, एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की तैनाती है। रायपुर टप्पा हवेली गांव के पशुपालक सुशील यादव बताते हैं कि अस्पताल में न तो दवाएं हैं, न ही समय पर स्टाफ मिलता है। ऐसे में हम लोग प्राइवेट चिकित्सकों पर निर्भर हैं। पशुपालक अरविंद वर्मा, सत्येंद्र यादव बताते हैं कि महज कहने के लिए अस्पताल है। यहां पर पशुओं के इलाज के लिए इंतजाम नहीं हैं।

पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विवेक सचान ने बताया कि अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में दवाएं हैं। जो दवाएं नहीं रहती हैं, उन्हें मंगाया जाता है। डलमऊ पशु चिकित्सालय में उपचार के लिए मोबाइल वैन स्वास्थ्य टीम के साथ उपलब्ध है। जरूरत के अनुसार उसे पशुओं के इलाज के लिए गांवों में भेजा जाता है।


बाहर से लेनी पड़ती हैं दवाएं
लालगंज। साकेत नगर स्थित पशु चिकित्सालय की स्थिति बेहद खराब रहती है। अस्पताल में जरूरी दवाओं की कमी रहती है। पशुपालक हरिश्चंद्र यादव, रामकिशुन बताते हैं कि अस्पताल समय से नहीं खुलता है। स्टाफ की कमी बनी है। इससे पशुओं का इलाज नहीं हो पाता है। पशुओं का इलाज हो भी गया तो दवाएं बाहर लेनी पड़ती हैं। डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि दवाएं अस्पताल में रहती हैं। पशुओं का इलाज किया जा रहा है। कहीं कोई दिक्कतें नहीं हैं।


तीनों अस्पतालों में चिकित्सक नहीं
सतांव। ब्लॉक में पशु चिकित्सा सेवाओं की स्थिति खराब है। डलमऊ ब्लॉक के मधुकरपुर पशु अस्पताल में तैनात पशु चिकित्साधिकारी डॉ. नितेंद्र सिंह को सतांव ब्लॉक के दो गोशालाओं मलिकमऊ चौबारा स्थित पूरे रत्ती और टिकरा गोशाला के साथ अटौरा बुजुर्ग और मलिकमऊ चौबारा पशु चिकित्सालय का अतिरिक्त प्रभार मिला हुआ है। हरचंदपुर पशु अस्पताल में तैनात डॉ. रमाकांत को सतांव पशु अस्पताल का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। ब्लॉक के तीनों अस्पतालों में नियमित पशु चिकित्साधिकारी की तैनाती नहीं है।


चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के भरोसे पशुओं के इलाज के इंतजाम हैं। पशुपालक गया प्रसाद तिवारी, मो. अयाज बताते हैं कि अस्पतालों में न तो दवाएं रहती हैं और न ही समय पर चिकित्सक से मिलते हैं। पशुओं का इलाज प्राइवेट चिकित्सकों से कराया जाता है। चिकित्सकों का दावा है कि अस्पतालों में मिनरल मिक्सचर, कीड़े की दवा और बुखार की सरकारी दवाएं उपलब्ध हैं।


पद स्वीकृत पद रिक्त पद भरे पद
पशु चिकित्साधिकारी 32 11 21
पशुधन प्रसार अधिकारी 63 38 27
वेटनरी फार्मासिस्ट 38 33 5
उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी 6 - 6
चतर्थु श्रेणी कर्मचारी 120 43 77
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