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Raebareli News: इमरजेंसी से वार्ड तक का रास्ता मरीजों का बढ़ा रहा दर्द
Thu, 28 Aug 2025 01:36 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Thu, 28 Aug 2025 01:36 AM IST
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जिला अस्पताल में खस्ताहाल सड़क से गंभीर रूप से बीमार मरीज को व्हीलचेयर से इमरजेंसी से वार्ड ले
रायबरेली। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में गंभीर हालत में आने वाले मरीजों को भर्ती होने के बाद वार्ड में पहुंचना दुश्वारी भरा हो गया है। इमरजेंसी से वार्ड जाने के लिए सीधे रास्ते को बंद कर दिया गया है। ऐसे में भर्ती होने वाले मरीजों को परिसर में स्थित खस्ताहाल सड़क से होकर वार्ड पहुंचना पड़ रहा है।
सड़क पर जगह-जगह गड्ढे होने के कारण मरीजों का दर्द और बढ़ जाता है, लेकिन अस्पताल प्रशासन की लापरवाही और बदइंतजामी के कारण मरीजों व तीमारदारों को दर्द सहना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में आने वाले गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद वार्डों में भर्ती होने के लिए भेजा जाता है। इमरजेंसी से ऑक्सीजन प्लांट के बगल से सीधे वार्ड के लिए पहुंचने का रास्ता है, लेकिन गेट को बंद कर दिया गया है। ऐसे में मरीजों को मोर्चुरी हाउस के पास से होकर वार्डों में पहुंचना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में लंबी दूरी तय करने के साथ ही उन्हें खराब जर्जर सड़क से गुजरना पड़ रहा है।
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स्ट्रेचर व व्हील चेयर से वार्ड पहुंचने वाले मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। बीमारी के दर्द के साथ ही गड्ढों से पटे सडक़ की दुश्वारी भी उनको सहना पड़ रहा है। इसकी शिकायतें करने के बाद भी बदइंतजामी से निजात नहीं मिल पा रही है। इसका खामियाजा गंभीर मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
30 मीटर दूर वार्ड, चलना पड़ता 100 मीटर
इमरजेंसी से मात्र 30 मीटर की दूरी पर वार्ड दो और तीन हैं। सीधा रास्ता बंद होने के कारण मरीजों को 100 मीटर से अधिक की दूरी तय करनी पड़ रही है। साथ ही खस्ताहाल सड़क की दुश्वारी भी झेलनी पड़ रही है। पीडियाट्रिक आईसीयू में भर्ती होने के लिए बच्चों व उनके अभिभावकों को भी लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। जबकि पीडियाट्रिक आईसीयू इमरजेंसी से सबसे नजदीक है।
-- - वर्जन-- -
इमरजेंसी से वार्ड तक जाने वाली सड़क की मरम्मत को लेकर इंजीनियर से बात की गई है। जल्द ही बजट की व्यवस्था होते ही सड़क को बनवाया जाएगा। अस्पताल में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने का प्रयास किया जा रहा है।
- डॉ. पुष्पेंद्र कुमार, सीएमएस जिला अस्पताल
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सड़क पर जगह-जगह गड्ढे होने के कारण मरीजों का दर्द और बढ़ जाता है, लेकिन अस्पताल प्रशासन की लापरवाही और बदइंतजामी के कारण मरीजों व तीमारदारों को दर्द सहना पड़ रहा है।
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जिला अस्पताल की इमरजेंसी में आने वाले गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद वार्डों में भर्ती होने के लिए भेजा जाता है। इमरजेंसी से ऑक्सीजन प्लांट के बगल से सीधे वार्ड के लिए पहुंचने का रास्ता है, लेकिन गेट को बंद कर दिया गया है। ऐसे में मरीजों को मोर्चुरी हाउस के पास से होकर वार्डों में पहुंचना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में लंबी दूरी तय करने के साथ ही उन्हें खराब जर्जर सड़क से गुजरना पड़ रहा है।
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स्ट्रेचर व व्हील चेयर से वार्ड पहुंचने वाले मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। बीमारी के दर्द के साथ ही गड्ढों से पटे सडक़ की दुश्वारी भी उनको सहना पड़ रहा है। इसकी शिकायतें करने के बाद भी बदइंतजामी से निजात नहीं मिल पा रही है। इसका खामियाजा गंभीर मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
30 मीटर दूर वार्ड, चलना पड़ता 100 मीटर
इमरजेंसी से मात्र 30 मीटर की दूरी पर वार्ड दो और तीन हैं। सीधा रास्ता बंद होने के कारण मरीजों को 100 मीटर से अधिक की दूरी तय करनी पड़ रही है। साथ ही खस्ताहाल सड़क की दुश्वारी भी झेलनी पड़ रही है। पीडियाट्रिक आईसीयू में भर्ती होने के लिए बच्चों व उनके अभिभावकों को भी लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। जबकि पीडियाट्रिक आईसीयू इमरजेंसी से सबसे नजदीक है।
इमरजेंसी से वार्ड तक जाने वाली सड़क की मरम्मत को लेकर इंजीनियर से बात की गई है। जल्द ही बजट की व्यवस्था होते ही सड़क को बनवाया जाएगा। अस्पताल में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने का प्रयास किया जा रहा है।
- डॉ. पुष्पेंद्र कुमार, सीएमएस जिला अस्पताल