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लगातार 72 घंटे तक चलेगा कारखाना, बनाए जाएंगे 1 हजार रेल के पहिए, आरडीएसओ से मिली अनुमति
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लालगंज (रायबरेली)। फोर्ज्ड व्हील प्लांट (रेल पहिया कारखाना) को आरडीएसओ ने कामर्शियल उत्पादन की मंजूरी दे दी है। आरडीएसओ के अधिकारी ने रेलवे बोर्ड राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड और रेल पहिया कारखाना के अफसरों को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दे दी है।
‘अमर उजाला’ ने रेल पहिया कारखाने में आठ वर्ष से एक भी पहिया न बनने की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर छपने के बाद हड़कंप मच गया था। जिसके बाद अब कारखाना व्यावसायिक उत्पादन करने के लिए तैयार है।
कारखाने के महाप्रबंधक एसके झा ने बताया कि मंगलवार देर शाम आरडीएसओ के अधिकारियों ने उन्हें कामार्शियल उत्पादन शुरू करने के लिए पत्र सौंप दिया है।
इसके लिए आरडीएसओ के विशेषज्ञों ने रेल पहिया कारखाने का कई बार दौरा कर बारीकी से परीक्षण किया। उन्होंने उत्पादन की अनुमति मिलने पर प्रसन्न्ता जताते हुए कहा कि रेल पहिया कारखाना विदेशों में भी भारत का नाम रोशन करेगा।
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जर्मन विशेषज्ञों से आएगी टीम
जीएम एसके झा ने बताया कि बुुधवार को जर्मन के विशेषज्ञों के साथ एक बैठक हुई। बैठक में ईडी एसके दास भी मौजूद थे। जर्मन विशेषज्ञ यहां 24 सितंबर तक रहेंगे। इसके बाद 27 सितंबर को जर्मन से एक अन्य टीम आएगी। इस टीम के आने के बाद कारखाने को 72 घंटे तक लगातार ऑपरेट करके रेलवे के लिए एक हजार पहिए तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। रेलवे की ओर से इन पहियों का ऑर्डर पहले ही मिला हुआ है।
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‘अमर उजाला’ ने रेल पहिया कारखाने में आठ वर्ष से एक भी पहिया न बनने की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर छपने के बाद हड़कंप मच गया था। जिसके बाद अब कारखाना व्यावसायिक उत्पादन करने के लिए तैयार है।
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कारखाने के महाप्रबंधक एसके झा ने बताया कि मंगलवार देर शाम आरडीएसओ के अधिकारियों ने उन्हें कामार्शियल उत्पादन शुरू करने के लिए पत्र सौंप दिया है।
इसके लिए आरडीएसओ के विशेषज्ञों ने रेल पहिया कारखाने का कई बार दौरा कर बारीकी से परीक्षण किया। उन्होंने उत्पादन की अनुमति मिलने पर प्रसन्न्ता जताते हुए कहा कि रेल पहिया कारखाना विदेशों में भी भारत का नाम रोशन करेगा।
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जर्मन विशेषज्ञों से आएगी टीम
जीएम एसके झा ने बताया कि बुुधवार को जर्मन के विशेषज्ञों के साथ एक बैठक हुई। बैठक में ईडी एसके दास भी मौजूद थे। जर्मन विशेषज्ञ यहां 24 सितंबर तक रहेंगे। इसके बाद 27 सितंबर को जर्मन से एक अन्य टीम आएगी। इस टीम के आने के बाद कारखाने को 72 घंटे तक लगातार ऑपरेट करके रेलवे के लिए एक हजार पहिए तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। रेलवे की ओर से इन पहियों का ऑर्डर पहले ही मिला हुआ है।