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Raebareli News: एम्स में अब श्वसनतंत्र और फेफड़ों की जांच हुई सुगम
Wed, 02 Sep 2026 01:00 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Wed, 02 Sep 2026 01:00 AM IST
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रायबरेली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायबरेली में मरीजों के लिए ब्रोंकोस्कोपी जांच सुविधा शुरू कर दी गई है। इसके शुरू होने से श्वसन तंत्र और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों की जांच के लिए मरीजों को अब लखनऊ नहीं जाना पड़ेगा। कार्यकारी निदेशक प्रो. अमिता जैन ने मंगलवार को फीता काटकर इस सुविधा का शुभारंभ किया।
एम्स प्रशासन के अनुसार ब्रोंकोस्कोपी जांच प्रत्येक मंगलवार और बृहस्पतिवार को की जाएगी। लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी, फेफड़ों में संक्रमण की आशंका, श्वसन नलिकाओं में रुकावट और अन्य फेफड़ा संबंधी समस्याओं के निदान में यह जांच उपयोगी होगी।
अपर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नीरज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि ब्रोंकोस्कोपी एक आधुनिक चिकित्सीय प्रक्रिया है, जिसमें ब्रोंकोस्कोप नामक पतली और लचीली नली के माध्यम से श्वसन नलिकाओं और फेफड़ों के भीतर की स्थिति का परीक्षण किया जाता है। इससे सूजन, संक्रमण, ट्यूमर और अन्य असामान्यताओं की पहचान की जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर जांच के दौरान बायोप्सी के लिए ऊतक का नमूना भी लिया जा सकता है, जिससे फेफड़ों के कैंसर और गंभीर संक्रमणों का सटीक निदान संभव हो पाता है।
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उन्होंने बताया कि यह जांच अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में की जाती है। मरीज की स्थिति के अनुसार स्थानीय एनेस्थीसिया या बेहोशी की दवा का उपयोग किया जाता है। एक्स-रे और सीटी स्कैन की तुलना में ब्रोंकोस्कोपी कई मामलों में अधिक सटीक जानकारी उपलब्ध कराती है।
कार्यक्रम में उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुमार धर्मेंद्र, इमरजेंसी फैकल्टी इंचार्ज डॉ. प्रणभ कुशवाह, पल्मोनरी विभाग की डॉ. कृष्ण प्रिया, डॉ. सुमित कुमार जैन समेत अन्य चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।
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एम्स प्रशासन के अनुसार ब्रोंकोस्कोपी जांच प्रत्येक मंगलवार और बृहस्पतिवार को की जाएगी। लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी, फेफड़ों में संक्रमण की आशंका, श्वसन नलिकाओं में रुकावट और अन्य फेफड़ा संबंधी समस्याओं के निदान में यह जांच उपयोगी होगी।
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अपर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नीरज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि ब्रोंकोस्कोपी एक आधुनिक चिकित्सीय प्रक्रिया है, जिसमें ब्रोंकोस्कोप नामक पतली और लचीली नली के माध्यम से श्वसन नलिकाओं और फेफड़ों के भीतर की स्थिति का परीक्षण किया जाता है। इससे सूजन, संक्रमण, ट्यूमर और अन्य असामान्यताओं की पहचान की जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर जांच के दौरान बायोप्सी के लिए ऊतक का नमूना भी लिया जा सकता है, जिससे फेफड़ों के कैंसर और गंभीर संक्रमणों का सटीक निदान संभव हो पाता है।
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उन्होंने बताया कि यह जांच अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में की जाती है। मरीज की स्थिति के अनुसार स्थानीय एनेस्थीसिया या बेहोशी की दवा का उपयोग किया जाता है। एक्स-रे और सीटी स्कैन की तुलना में ब्रोंकोस्कोपी कई मामलों में अधिक सटीक जानकारी उपलब्ध कराती है।
कार्यक्रम में उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुमार धर्मेंद्र, इमरजेंसी फैकल्टी इंचार्ज डॉ. प्रणभ कुशवाह, पल्मोनरी विभाग की डॉ. कृष्ण प्रिया, डॉ. सुमित कुमार जैन समेत अन्य चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।