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Raebareli News: भारी पड़ रही मीटर रीडरों की कमी, नहीं मिल रहे बिजली बिल
Sat, 13 Jun 2026 12:33 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Sat, 13 Jun 2026 12:33 AM IST
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रायबरेली। मीटर रीडरों की कमी साढ़े तीन लाख उपभोक्ताओं पर भारी पड़ रही है। लोगों को समय से बिजली का बिल नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में त्रुटिपूर्ण बिल लेकर उपभोक्ताओं को अभियंताओं के चक्कर काटने की परेशानी उठाना पड़ रही है। बिलिंग एजेंसी की इस लापरवाही की जानकारी आला अफसरों को होने के बावजूद इसके निस्तारण को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जो मीटर रीडर काम भी कर रहे हैं, वह उपभोक्ताओं के घर नहीं जाते हैं।
जिले में करीब पांच लाख बिजली उपभोक्ता हैं। इन उपभोक्ताओं के यहां इलेक्ट्रानिक मीटर लगे है, जिन्हें बदलकर स्मार्ट मीटर लगाया जाना है। अब तक करीब डेढ़ लाख उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। जिन उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगे हैं, उसका बिल हर महीने के 10 तारीख को बिल बन जाता है, लेकिन जिनके यहां अभी इलेक्ट्रॉनिक मीटर लगे हैं। उनके यहां रीडरों को पहुंचकर बिल बनाना है। कार्यदायी एजेंसी के पास रीडरों की कमी है। ऐसे में उपभोक्ताओं को त्रुटिपूर्ण बिल मिल रहे हैं। उधर, अधीक्षण अभियंता अखिलेश कुमार ने बताया कि बिलिंग एजेंसी को हर महीने बिजली बिल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
250 की जगह काम कर रहे 60 रीडर
जिले में करीब वैसे तो 1350 उपभोक्ताओं पर एक रीडर की जरूरत होती है। इस हिसाब से करीब 250 मीटर रीडर होने चाहिए, लेकिन 60 रीडर ही काम कर रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं को समय से बिजली का बिल नहीं मिल पा रहा है। इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।
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काटना पड़ रहा चक्कर
त्रिपुला उपखंड कार्यालय में मछेछर गांव के रामकिशोर ज्यादा बिल आने की शिकायत लेकर पहुंचे। बताया कि पिछले मई माह में चार हजार 213 रुपये का बिल था। जून में यह बिल बढ़कर आठ हजार हो गया। इसी तरह हिलगी गांव निवासी राजदेव तिवारी ने बताया कि गांव में कोई बिल निकालने नहीं आता है। कभी ज्यादा, तो कभी कम बिल आ रहा है। जगतपुर के रामप्रसाद ने बताया कि दो किलोवाट का व्यवसायिक कनेक्शन है, लेकिन बिल निकालने कोई नहीं आता। ऐसे में समय से बिल जमा करने में दिक्कत हो रही है।
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जिले में करीब पांच लाख बिजली उपभोक्ता हैं। इन उपभोक्ताओं के यहां इलेक्ट्रानिक मीटर लगे है, जिन्हें बदलकर स्मार्ट मीटर लगाया जाना है। अब तक करीब डेढ़ लाख उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। जिन उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगे हैं, उसका बिल हर महीने के 10 तारीख को बिल बन जाता है, लेकिन जिनके यहां अभी इलेक्ट्रॉनिक मीटर लगे हैं। उनके यहां रीडरों को पहुंचकर बिल बनाना है। कार्यदायी एजेंसी के पास रीडरों की कमी है। ऐसे में उपभोक्ताओं को त्रुटिपूर्ण बिल मिल रहे हैं। उधर, अधीक्षण अभियंता अखिलेश कुमार ने बताया कि बिलिंग एजेंसी को हर महीने बिजली बिल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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250 की जगह काम कर रहे 60 रीडर
जिले में करीब वैसे तो 1350 उपभोक्ताओं पर एक रीडर की जरूरत होती है। इस हिसाब से करीब 250 मीटर रीडर होने चाहिए, लेकिन 60 रीडर ही काम कर रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं को समय से बिजली का बिल नहीं मिल पा रहा है। इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।
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काटना पड़ रहा चक्कर
त्रिपुला उपखंड कार्यालय में मछेछर गांव के रामकिशोर ज्यादा बिल आने की शिकायत लेकर पहुंचे। बताया कि पिछले मई माह में चार हजार 213 रुपये का बिल था। जून में यह बिल बढ़कर आठ हजार हो गया। इसी तरह हिलगी गांव निवासी राजदेव तिवारी ने बताया कि गांव में कोई बिल निकालने नहीं आता है। कभी ज्यादा, तो कभी कम बिल आ रहा है। जगतपुर के रामप्रसाद ने बताया कि दो किलोवाट का व्यवसायिक कनेक्शन है, लेकिन बिल निकालने कोई नहीं आता। ऐसे में समय से बिल जमा करने में दिक्कत हो रही है।