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आधुनिक ढंग से करें खेती और कमाएं मुनाफा
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रायबरेली। एक मंच साझा हुआ तो खेती किसानी के तौर-तरीके को लेकर मंथन हुआ। कैसे खेती के जरिये तरक्की करें, इस पर खूब चर्चा हुई।
धान, गेहूूं के अलावा बागवानी, फूल आदि खेती करने पर प्रगतिशील किसानों ने अपनी बात को बेबाकी के साथ रखा तो मौजूद अन्य किसानों ने उसे सुना और उसी तरह खेती करने का संकल्प भी लिया। इस दौरान जोर दिया गया कि आधुनिक ढंग से खेती करके मुनाफा कमाया जा सकता है।
मौका था शनिवार को जीआईसी मैदान में राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन का, जहां पर सिर्फ जिला ही नहीं, बल्कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों के किसानों ने यहां पहुंचकर बेहतर खेती करने के तौर-तरीके पर चर्चा की।
राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन का दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि बागवानी फसलों का कृषि एवं संवर्गीय क्षेत्र के सकल घरेलू उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान है।
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बागवानी फसलों में फल, शाकभाजी, आलू, मसाले, पुष्प, औषधीय एवं सुगंध फसलें मशरूम, पान एवं शहद उत्पादन में अपार वृद्धि की संभावनाएं विद्यमान हैं।
उद्यान विभाग प्रदेश में फल, शाकभाजी, आलू, मसाला, फूल, मशरूम की खेती के लिए प्रशिक्षण प्रदान कराने के साथ ही विभिन्न योजनाओं को सुनियोजित ढंग से कार्यान्वित कर रहा है। बागवानी का क्षेत्र कृषि के विविधीकरण का आर्थिक एवं पोषणीय दृष्टि से एक सक्षम विकल्प के रूप में उभरा है।
प्रदेश की विभिन्न कृषि जलवायु परिस्थितियों के लिए अनुकूल फसल चक्र अपनाकर छोटी जोत के किसानों द्वारा अधिक आय, रोजगार एवं पोषण सुरक्षा प्राप्त की सकती है।
राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न मंडलों के लगभग 2000 से अधिक किसानों ने प्रतिभाग किया। राज्यमंत्री ने बागवानी के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 34 जनपद के 38 प्रगतिशील किसानों को शाल उठाकर व उपहार आदि देकर सम्मानित किया।
सम्मेलन में प्रमुख सचिव उद्यान राजेश कुमार सिंह, बागवानी आयुक्त भारत सरकार डॉ. प्रभात कुमार, उद्यान विभाग के निदेशक डॉ. आरके तोमर ने भी प्रतिभाग किया और किसानों से सरकारी योजनाओं को साझा किया। इसी दौरान स्मारिका राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन पुस्तक का विमोचन भी किया।
इस दौरान कृषि राज्यमंत्री ने विभिन्न विभागों की तरफ से लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन भी किया। सम्मेलन में वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने उद्यान से संबंधित औद्योगिक फसलों से संबंधित नवीनतम तकनीकी जानकारी किसानों को उपलब्ध कराई। साथ ही उद्यान विभाग में संचालित केंद्र पोषित एवं राज्य पोषित विभागीय योजनाओं, कार्यक्रमों के बारे में किसानों को विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
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धान, गेहूूं के अलावा बागवानी, फूल आदि खेती करने पर प्रगतिशील किसानों ने अपनी बात को बेबाकी के साथ रखा तो मौजूद अन्य किसानों ने उसे सुना और उसी तरह खेती करने का संकल्प भी लिया। इस दौरान जोर दिया गया कि आधुनिक ढंग से खेती करके मुनाफा कमाया जा सकता है।
मौका था शनिवार को जीआईसी मैदान में राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन का, जहां पर सिर्फ जिला ही नहीं, बल्कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों के किसानों ने यहां पहुंचकर बेहतर खेती करने के तौर-तरीके पर चर्चा की।
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राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन का दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि बागवानी फसलों का कृषि एवं संवर्गीय क्षेत्र के सकल घरेलू उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान है।
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बागवानी फसलों में फल, शाकभाजी, आलू, मसाले, पुष्प, औषधीय एवं सुगंध फसलें मशरूम, पान एवं शहद उत्पादन में अपार वृद्धि की संभावनाएं विद्यमान हैं।
उद्यान विभाग प्रदेश में फल, शाकभाजी, आलू, मसाला, फूल, मशरूम की खेती के लिए प्रशिक्षण प्रदान कराने के साथ ही विभिन्न योजनाओं को सुनियोजित ढंग से कार्यान्वित कर रहा है। बागवानी का क्षेत्र कृषि के विविधीकरण का आर्थिक एवं पोषणीय दृष्टि से एक सक्षम विकल्प के रूप में उभरा है।
प्रदेश की विभिन्न कृषि जलवायु परिस्थितियों के लिए अनुकूल फसल चक्र अपनाकर छोटी जोत के किसानों द्वारा अधिक आय, रोजगार एवं पोषण सुरक्षा प्राप्त की सकती है।
राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न मंडलों के लगभग 2000 से अधिक किसानों ने प्रतिभाग किया। राज्यमंत्री ने बागवानी के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 34 जनपद के 38 प्रगतिशील किसानों को शाल उठाकर व उपहार आदि देकर सम्मानित किया।
सम्मेलन में प्रमुख सचिव उद्यान राजेश कुमार सिंह, बागवानी आयुक्त भारत सरकार डॉ. प्रभात कुमार, उद्यान विभाग के निदेशक डॉ. आरके तोमर ने भी प्रतिभाग किया और किसानों से सरकारी योजनाओं को साझा किया। इसी दौरान स्मारिका राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन पुस्तक का विमोचन भी किया।
इस दौरान कृषि राज्यमंत्री ने विभिन्न विभागों की तरफ से लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन भी किया। सम्मेलन में वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने उद्यान से संबंधित औद्योगिक फसलों से संबंधित नवीनतम तकनीकी जानकारी किसानों को उपलब्ध कराई। साथ ही उद्यान विभाग में संचालित केंद्र पोषित एवं राज्य पोषित विभागीय योजनाओं, कार्यक्रमों के बारे में किसानों को विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।