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ध्वस्त हो गईं 900 सडक़ें, हिचकोले खा रहे पांच लाख लोग
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रायबरेली में आईटीआई मार्ग बदहाल सड़क पर बारिश से हुआ जलभराव।
- फोटो : RAIBARAILY
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राजकीय कॉलोनी जाने वाला मार्ग गड्ढों में तब्दील
शहर के मामा चौराहे से राजकीय कॉलोनी, इंदिरा उद्यान व महानंदपुर जाने वाला मार्ग तालाब बन गया है। इसी रास्ते से राजकीय कॉलोनी में रहने वाले अधिकारी व कर्मचारी आते-जाते हैं, लेकिन उन्हें यह बदहाल सड़क नहीं दिखती है। इंदिरा उद्यान जाने के लिए लोग गिरते-पड़ते पहुंच रहे हैं।
छह महीने पहले भेजा इस्टीमेट, नहीं मिला बजट
शहर के इंदिरा नगर पुलिस चौकी से पुलिस लाइन तक जाने वाली सड़क पर कई सरकारी दफ्तर हैं। यह मार्ग इतना जर्जर है कि आए दिन लोग गिरकर चोटिल होते हैं। जिला जेल के पास बड़े-बड़े गड्ढे हैं। छह महीने पहले इस सड़क को ठीक कराने के लिए आठ करोड़ रुपये का इस्टीमेट भेजा गया था, लेकिन बजट नहीं मिला। सड़क जस की तस पड़ी है।
बोल्डर डालकर छोड़ा, चोटिल हो रहे लोग
रायबरेली-लखनऊ हाईवे से छजलापुर के पास से निकला आईटीआई मार्ग इतना ध्वस्त हो गया है कि आए दिन वाहन फंस जाते हैं। रायबरेली-सुल्तानपुर हाईवे पर बने ओवरब्रिज की मरम्मत के लिए एक महीने तक इसी मार्ग से छोटे और भारी वाहन निकलते थे। इस वजह से मार्ग पूरी तरह ध्वस्त हो गया। एनएचएआई ने सड़क पर बोल्डर डलवाए थे। उसके बाद कोई काम नहीं हुआ।
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रायबरेली। मुख्यमंत्री योगी ने 15 नवंबर तक सड़कों को गड्ढा मुक्त कराने का आदेश दिया है, लेकिन हकीकत ये है कि हर बार आदेश मिलने के बाद भी सड़कों की तस्वीर नहीं बदलती। चाहे शहर की सड़कें हों या फिर ग्रामीण अंचलों की। इन सड़कों पर चलना जोखिम भरा रहता है। आए दिन इन सड़कों की वजह से लोग जान भी गंवा रहे हैं, लेकिन अधिकारी सिर्फ बजट की कमी का रोना रोते रहते हैं।
आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में लोक निर्माण विभाग की ही 800 सड़कें हैं, जो बजट के अभाव में दुरुस्त नहीं हो पा रही हैं। इसी तरह अन्य विभागों की भी 100 से अधिक सड़कें हैं, जो बदहाल हैं। इसका खामियाजा करीब पांच लाख से ज्यादा लोग भुगत रहे हैं। लोक निर्माण विभाग ने 800 सड़कों को ठीक कराने के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा है। बजट मिलने पर सड़कों को ठीक कराया जाएगा। इसी तरह नगर पालिका, आरडीए, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, जिला पंचायत भी बजट मिलने पर सड़कों को ठीक कराने का दावा कर रहा है।
.....
बरसात ने रोका 27 सड़कों का निर्माण
ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की ओर से 27 सड़कों का निर्माण कराया जाना है। इनके निर्माण में दो अरब 22 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो गई है, लेकिन बरसात की वजह से काम शुरू नहीं हो पाया है। इस वजह से लोग हिचकोले खाते हुए आने-जाने को विवश हैं।
गल्ला मंडी के पास लगता जाम
शहर के गल्लामंडी के पास बने ओवरब्रिज के निकट सड़क ध्वस्त हो गई है। यहां पर जिले के अलावा अन्य जनपदों के व्यापारी व किसान आते हैं। मामूली बारिश में पानी भर जाता है। इस वजह से सड़क ध्वस्त हो गई है। सड़क टूटी होने वाहन चालक हिचकोले खाते हुए निकलते हैं।
जिले में लोक निर्माण विभाग करीब 800 सड़कें ऐसी हैं, जो बरसात की वजह से गड्ढों में तब्दील हैं। सहूलियत के लिए गड्ढों में गिट्टियां डलवाई गईं हैं। पैचिंग कराने के लिए करीब 20 करोड़ रुपये की जरूरत है। बजट मिलने वाला है। बजट मिलते ही मरम्मत का काम शुरू कराया जाएगा।
दिनेश कुमार कुरील, एक्सईएन, लोक निर्माण विभाग
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शहर के मामा चौराहे से राजकीय कॉलोनी, इंदिरा उद्यान व महानंदपुर जाने वाला मार्ग तालाब बन गया है। इसी रास्ते से राजकीय कॉलोनी में रहने वाले अधिकारी व कर्मचारी आते-जाते हैं, लेकिन उन्हें यह बदहाल सड़क नहीं दिखती है। इंदिरा उद्यान जाने के लिए लोग गिरते-पड़ते पहुंच रहे हैं।
छह महीने पहले भेजा इस्टीमेट, नहीं मिला बजट
शहर के इंदिरा नगर पुलिस चौकी से पुलिस लाइन तक जाने वाली सड़क पर कई सरकारी दफ्तर हैं। यह मार्ग इतना जर्जर है कि आए दिन लोग गिरकर चोटिल होते हैं। जिला जेल के पास बड़े-बड़े गड्ढे हैं। छह महीने पहले इस सड़क को ठीक कराने के लिए आठ करोड़ रुपये का इस्टीमेट भेजा गया था, लेकिन बजट नहीं मिला। सड़क जस की तस पड़ी है।
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बोल्डर डालकर छोड़ा, चोटिल हो रहे लोग
रायबरेली-लखनऊ हाईवे से छजलापुर के पास से निकला आईटीआई मार्ग इतना ध्वस्त हो गया है कि आए दिन वाहन फंस जाते हैं। रायबरेली-सुल्तानपुर हाईवे पर बने ओवरब्रिज की मरम्मत के लिए एक महीने तक इसी मार्ग से छोटे और भारी वाहन निकलते थे। इस वजह से मार्ग पूरी तरह ध्वस्त हो गया। एनएचएआई ने सड़क पर बोल्डर डलवाए थे। उसके बाद कोई काम नहीं हुआ।
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रायबरेली। मुख्यमंत्री योगी ने 15 नवंबर तक सड़कों को गड्ढा मुक्त कराने का आदेश दिया है, लेकिन हकीकत ये है कि हर बार आदेश मिलने के बाद भी सड़कों की तस्वीर नहीं बदलती। चाहे शहर की सड़कें हों या फिर ग्रामीण अंचलों की। इन सड़कों पर चलना जोखिम भरा रहता है। आए दिन इन सड़कों की वजह से लोग जान भी गंवा रहे हैं, लेकिन अधिकारी सिर्फ बजट की कमी का रोना रोते रहते हैं।
आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में लोक निर्माण विभाग की ही 800 सड़कें हैं, जो बजट के अभाव में दुरुस्त नहीं हो पा रही हैं। इसी तरह अन्य विभागों की भी 100 से अधिक सड़कें हैं, जो बदहाल हैं। इसका खामियाजा करीब पांच लाख से ज्यादा लोग भुगत रहे हैं। लोक निर्माण विभाग ने 800 सड़कों को ठीक कराने के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा है। बजट मिलने पर सड़कों को ठीक कराया जाएगा। इसी तरह नगर पालिका, आरडीए, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, जिला पंचायत भी बजट मिलने पर सड़कों को ठीक कराने का दावा कर रहा है।
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बरसात ने रोका 27 सड़कों का निर्माण
ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की ओर से 27 सड़कों का निर्माण कराया जाना है। इनके निर्माण में दो अरब 22 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो गई है, लेकिन बरसात की वजह से काम शुरू नहीं हो पाया है। इस वजह से लोग हिचकोले खाते हुए आने-जाने को विवश हैं।
गल्ला मंडी के पास लगता जाम
शहर के गल्लामंडी के पास बने ओवरब्रिज के निकट सड़क ध्वस्त हो गई है। यहां पर जिले के अलावा अन्य जनपदों के व्यापारी व किसान आते हैं। मामूली बारिश में पानी भर जाता है। इस वजह से सड़क ध्वस्त हो गई है। सड़क टूटी होने वाहन चालक हिचकोले खाते हुए निकलते हैं।
जिले में लोक निर्माण विभाग करीब 800 सड़कें ऐसी हैं, जो बरसात की वजह से गड्ढों में तब्दील हैं। सहूलियत के लिए गड्ढों में गिट्टियां डलवाई गईं हैं। पैचिंग कराने के लिए करीब 20 करोड़ रुपये की जरूरत है। बजट मिलने वाला है। बजट मिलते ही मरम्मत का काम शुरू कराया जाएगा।
दिनेश कुमार कुरील, एक्सईएन, लोक निर्माण विभाग