फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Raebareli News ›   Reached on the shoulders of another, proved himself alive

दूसरे के कंधे के सहारे पहुंचे, खुद को साबित किया जिंदा

Tue, 08 Nov 2022 12:18 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 08 Nov 2022 12:18 AM IST
विज्ञापन
Reached on the shoulders of another, proved himself alive
रायबरेली में सोमवार को जिला कोषागार कार्यालय में जीवित प्रमाणपत्र फार्म जमा करने जाती रामादेवी? - फोटो : RAIBARAILY
रायबरेली। खुद को जिंदा साबित करने की घड़ी आ गई है। हम बात कर रहे हैं जिले के 16 हजार पेंशनधारकों की, जिन्हें साल में एक बार जीवन प्रमाणपत्र जिला कोषागार में जमा करना होता है। अमूनन नवंबर माह में ही प्रमाणपत्र जमा करते हैं। ऐसे में जिला कोषागार में भीड़ जमा होना शुरू हो गई है। पेंशन पाने के लिए पेंशनधारकों को एड़ियां घिसनी पड़ रही हैं। ऐसे पेंशनधारक जिला कोषागार पहुंच रहे हैं, जिनकी पेंशन कई माह से आना बंद हो गई है। इससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। ऐेसे में वह खुद को जिंदा साबित करने के लिए मशक्कत कर रहे हैं।
विज्ञापन

एप के साथ डाक विभाग का ले सकते हैं सहारा
यदि पेंशनधारक चलने फिरने में लाचार हैं। वह जिला कोषागार नहीं पहुंच पा रहे हैं तो उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। इसके लिए कई विकल्प भी तैयार हैं। अधिकारी बताते हैं कि पेंशनधारक ऐसे साइबर कैफे जाएं, जहां पर बायोमीट्रिक की सुविधा हो। साइबर कैफे से डिजिटल लाइफ सर्टीफिकेट (जीवन प्रमाणपत्र) एप पर जाकर पेंशनर अपनी सभी जानकारी भरकर उसे जिला कोषागार कोड रायबरेली 4500 पर भेज सकते हैं। इसके बाद उनका जीवन प्रमाणपत्र स्वीकार कर लिया जाएगा। इसके अलावा कोई पेंशनर बहुत बुजुर्ग हैं। चलने फिरने में पूरी तरह से लाचार हैं तो वह इसकी सूचना अपने क्षेत्र के पोस्ट ऑफिस में दे। पोस्ट आफिस में तैनात कर्मचारी पेंशनर के घर जाकर सत्यापन करके उसका जीवन प्रमाणपत्र जिला कोषागार पहुंचाएगा। हालांकि इसके लिए पेंशनर को निर्धारित शुल्क देना होगा। इसके अलावा पेंशनर अपने नजदीकी बैंक के माध्यम से सत्यापन करवाकर बैंक के माध्यम से जीवन प्रमाणपत्र कोषागार भिजवा सकता है।
विज्ञापन

अधिकतर पेंशनर पहुंचते हैं कोषागार
वैसे तो पेंशनरों के लिए घर बैठे ही जीवन प्रमाणपत्र के विकल्प दिए गए हैं। इसके बाद भी अधिकतर पेंशनर जिला कोषागार ही पहुंचकर जीवन प्रमाणपत्र देते हैं। इसके पीछे अधिकारी तर्क बताते हैं कि रिटायर्ड होने के बाद पेंशनरों का समय घर में ही बीतता है। वह अपने साथियों से नहीं मिल पाते। ऐेसे में वह जिला कोषागार पहुंचकर ही जीवन प्रमाणपत्र देने के लिए इच्छुक रहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

जिले में 16 पेंशनधारक हैं, जिन्हें साल में एक बार जीवन प्रमाणपत्र देना होता है। नवंबर माह में ही अधिकतर पेंशनधारक प्रमाणपत्र देने आते हैं। चलने फिरने में लाचार पेंशनर जो विकल्प दिए गए हैं, उसके तहत अपना जीवन प्रमाणपत्र जिला कोषागार भेज सकते हैं। -जितेंद्र सिंह, वरिष्ठ कोषाधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed