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तीन साल में अबकी सबसे कम बारिश, चार लाख किसान मायूस
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रायबरेली। इस बार पिछले तीन वर्षों की तुलना में बहुत ही कम बारिश हुई है। पिछले साल मई में मात्र 33.6 मिलीमीटर और जून में अब तक शून्य बारिश दर्ज की गई है। जबकि पिछले दो वर्षों में इन दो महीनों में भारी बारिश दर्ज की गई थी।
बारिश न होने से साढ़े चार लाख किसान मायूस हैं। पानी न मिलने से धान की नर्सरी भी प्रभावित हो रही है। बारिश न हुई तो किसानों के सामने बड़ी समस्या आ सकती है।
अमूमन अप्रैल से ही बारिश शुरू हो जाती है। मई और जून में हर साल अच्छी बारिश होने से किसान तेजी से धान की रोपाई शुरू कर देते हैं। पिछले दो वर्षों में अच्छी बारिश के कारण धान का अच्छा उत्पादन हुआ था।
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जिले में तमाम ऐसे क्षेत्र हैं जहां खेती-किसानी के लिए बारिश ज्यादा जरूरी है। तमाम क्षेत्रों में नहरों का पानी नहीं पहुंच पाता है। ट्यूबवेल के सहारे ही किसान खेती करते हैं, लेकिन बारिश से किसान कम खर्च करके अधिक उत्पादन कर लेते हैं।
जिले में मई 2021 में 51.5 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई थी। जून में भी 346.66 मिलीमीटर रिकार्ड बारिश हुई थी। वर्ष 2020 के मई माह में 38.3 मिलीमीटर और जून माह में 179.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। इस साल बारिश न के बराबर हुई है। मई में मात्र 33.6 मिलीमीटर बारिश हुई।
जिले के आधे से अधिक भाग में तो एक बूंद पानी नहीं गिरा। जून में भी अब तक एक बूंद पानी नहीं गिरा है, जबकि पिछले साल जून के नौ दिन में 50 मिलीमीटर बारिश हो गई थी।
बारिश न होने से किसानों के चेहरे मुरझा रहे हैं। धान की नर्सरी भी प्रभावित हो रही है। जल्द ही बारिश न होने से बड़ी समस्या किसानों के सामने आ सकती है।
जिले में तीन साल में बारिश का रिकॉर्ड (मिलीमीटर में)
वर्ष मई जून
2020 38.3 179.2
2021 51.5 346.6
2022 33.5 00
पिछले तीन साल की तुलना में इस साल कम बारिश अब तक हुई है। मई में तो कुछ बारिश हुई थी, लेकिन जून माह में अब तक किसी भी तहसील से बारिश की सूचना नहीं दी गई है। हालांकि इस बार भी आगे अच्छी बारिश होने के आसार हैं।
- प्रेमप्रकाश उपाध्याय, एडीएम (वित्त एवं राजस्व)
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बारिश न होने से साढ़े चार लाख किसान मायूस हैं। पानी न मिलने से धान की नर्सरी भी प्रभावित हो रही है। बारिश न हुई तो किसानों के सामने बड़ी समस्या आ सकती है।
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अमूमन अप्रैल से ही बारिश शुरू हो जाती है। मई और जून में हर साल अच्छी बारिश होने से किसान तेजी से धान की रोपाई शुरू कर देते हैं। पिछले दो वर्षों में अच्छी बारिश के कारण धान का अच्छा उत्पादन हुआ था।
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जिले में तमाम ऐसे क्षेत्र हैं जहां खेती-किसानी के लिए बारिश ज्यादा जरूरी है। तमाम क्षेत्रों में नहरों का पानी नहीं पहुंच पाता है। ट्यूबवेल के सहारे ही किसान खेती करते हैं, लेकिन बारिश से किसान कम खर्च करके अधिक उत्पादन कर लेते हैं।
जिले में मई 2021 में 51.5 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई थी। जून में भी 346.66 मिलीमीटर रिकार्ड बारिश हुई थी। वर्ष 2020 के मई माह में 38.3 मिलीमीटर और जून माह में 179.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। इस साल बारिश न के बराबर हुई है। मई में मात्र 33.6 मिलीमीटर बारिश हुई।
जिले के आधे से अधिक भाग में तो एक बूंद पानी नहीं गिरा। जून में भी अब तक एक बूंद पानी नहीं गिरा है, जबकि पिछले साल जून के नौ दिन में 50 मिलीमीटर बारिश हो गई थी।
बारिश न होने से किसानों के चेहरे मुरझा रहे हैं। धान की नर्सरी भी प्रभावित हो रही है। जल्द ही बारिश न होने से बड़ी समस्या किसानों के सामने आ सकती है।
जिले में तीन साल में बारिश का रिकॉर्ड (मिलीमीटर में)
वर्ष मई जून
2020 38.3 179.2
2021 51.5 346.6
2022 33.5 00
पिछले तीन साल की तुलना में इस साल कम बारिश अब तक हुई है। मई में तो कुछ बारिश हुई थी, लेकिन जून माह में अब तक किसी भी तहसील से बारिश की सूचना नहीं दी गई है। हालांकि इस बार भी आगे अच्छी बारिश होने के आसार हैं।
- प्रेमप्रकाश उपाध्याय, एडीएम (वित्त एवं राजस्व)