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लाखों खर्च करने के बाद भी लोक निर्माण के वाहन जस के तस
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रायबरेली। सड़क बनाने और मरम्मत में इस्तेमाल होने वाले लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के वाहन इन दिनों रखरखाव के अभाव में बेदम हो गए हैं।
इनकी मरम्मत के नाम पर जमकर खानापूरी होती है। जिससे वर्कशाप से रिपेयर होकर कार्यस्थल तक पहुंचने के पहले ही यह फिर खराब हो जाते हैं।
राजकीय परिवहन चालक संघ लोक निर्माण विभाग के अध्यक्ष बसंत लाल उर्फ राजू के मुताबिक लोक निर्माण प्रांतीय खंड में 15 वाहन हैं, इनकी देखरेख की जिम्मेदारी मैकेनिकल डिवीजन की है।
लोक निर्माण विभाग में ही वर्कशाप है जहां इनकी देखरेख होती है। पिछले तीन साल में वाहनों की मेंटिनेंस में 56 लाख रुपये खर्च हो गए हैं। इसके बावजूद कोई न कोई वाहन गैराज में खड़ा ही रहता है।
इन्हीं वाहनों के सहारे ही लोक निर्माण विभाग की सड़कों की मरम्मत और नवीनीकरण होता है। इन वाहनों के खराब होने से सड़क की मरम्मत और बनाने का काम भी प्रभावित होता है। जरूरत पड़ने पर किराए पर वाहन मंगाना पड़ता है जिससे सरकार को चूना लगता है।
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प्रांतीय खंड में है इतने वाहन
वाहन संख्या
ट्रक दो
ट्रैक्टर तीन
जीप एक
रोलर नौ
जनरेटर एक
कई साल पुराने है वाहन, किसी तरह चलाया जा रहा काम
लोक निर्माण प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता दिनेश कुमार कुरील ने बताया कि डिवीजन में कई साल पुराने वाहन हैं। इस वजह से आए दिन कोई न कोई समस्या बनी रहती है। अब तक कितना भुगतान हुआ, इसकी सही जानकारी तो कार्यालय से ही मिल पाएगी। फिलहाल मेंटीनेंस में कोई मनमानी नहीं होती है। उधर, मैकेनिकल डिवीजन के सहायक अभियंता उत्कर्ष ने बताया कि हाल में चार्ज लिया है। भुगतान के बारे में पूरी जानकारी नहीं है। हमारे कार्यकाल में कोई भुगतान नहीं हुआ।
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इनकी मरम्मत के नाम पर जमकर खानापूरी होती है। जिससे वर्कशाप से रिपेयर होकर कार्यस्थल तक पहुंचने के पहले ही यह फिर खराब हो जाते हैं।
राजकीय परिवहन चालक संघ लोक निर्माण विभाग के अध्यक्ष बसंत लाल उर्फ राजू के मुताबिक लोक निर्माण प्रांतीय खंड में 15 वाहन हैं, इनकी देखरेख की जिम्मेदारी मैकेनिकल डिवीजन की है।
लोक निर्माण विभाग में ही वर्कशाप है जहां इनकी देखरेख होती है। पिछले तीन साल में वाहनों की मेंटिनेंस में 56 लाख रुपये खर्च हो गए हैं। इसके बावजूद कोई न कोई वाहन गैराज में खड़ा ही रहता है।
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इन्हीं वाहनों के सहारे ही लोक निर्माण विभाग की सड़कों की मरम्मत और नवीनीकरण होता है। इन वाहनों के खराब होने से सड़क की मरम्मत और बनाने का काम भी प्रभावित होता है। जरूरत पड़ने पर किराए पर वाहन मंगाना पड़ता है जिससे सरकार को चूना लगता है।
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प्रांतीय खंड में है इतने वाहन
वाहन संख्या
ट्रक दो
ट्रैक्टर तीन
जीप एक
रोलर नौ
जनरेटर एक
कई साल पुराने है वाहन, किसी तरह चलाया जा रहा काम
लोक निर्माण प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता दिनेश कुमार कुरील ने बताया कि डिवीजन में कई साल पुराने वाहन हैं। इस वजह से आए दिन कोई न कोई समस्या बनी रहती है। अब तक कितना भुगतान हुआ, इसकी सही जानकारी तो कार्यालय से ही मिल पाएगी। फिलहाल मेंटीनेंस में कोई मनमानी नहीं होती है। उधर, मैकेनिकल डिवीजन के सहायक अभियंता उत्कर्ष ने बताया कि हाल में चार्ज लिया है। भुगतान के बारे में पूरी जानकारी नहीं है। हमारे कार्यकाल में कोई भुगतान नहीं हुआ।