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पेट्रोल-डीजल के बढ़े दाम, लोगों को ज्यादा खाली करनी पड़ रही जेब
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रायबरेली। पेट्रोल-डीजल के लगातार बढ़ रहे दामों ने एक बार फिर लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। इससे न सिर्फ वाहन चालक, बल्कि व्यापारी, किसान समेत हर तबका प्रभावित है। इनके दामों में बढ़ोतरी किए जाने के कारण बाहर से कपड़ा, सब्जी आदि मंगाने पर व्यापारियों को अधिक रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
सबसे ज्यादा किसान प्रभावित है, क्योंकि बिजली न रहने के कारण उसे डीजल चालित इंजन से गेहूं की फसल की सिंचाई करनी पड़ रही है। बावजूद सरकार पेट्रोल-डीजल के दामों में कमी लाने पर जोर नहीं दे रही है। इससे लोगों में नाराजगी है।
सभी का कहना है कि दामों में कमी लाने के लिए सरकार को आगे आना चाहिए, ताकि हम लोगों की मुश्किलें कम हो। रायबरेली पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र शर्मा ने बताया कि मौजूदा समय में डीजल के 76 रुपये 11 पैसे और पेट्रोल के 85 रुपये छह पैसे दाम पहुंच गए हैं।
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दाम करने के लिए कदम उठाए सरकार
वाहन चालक आलोक कुमार और आशीष कुमार कहते हैं कि सरकार हम सबके बारे में नहीं सोच रही है। दिनोंदिन पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं। इससे अधिक जेब खर्च करनी पड़ रही है। पहले दाम कम थे तो कम पैसे में गतंव्य स्थान तक पहुंच जाते थे। अब गंतव्य स्थान तक पहुंचने में अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। जल्द से जल्द सरकार दाम में कमी करने के लिए कदम उठाए।
अधिक देना पड़ रहा भाड़ा
व्यापारी गंगा सागर मिश्रा और अनिल कुमार का कहना है कि व्यापार करने के लिए बाहर से कपड़े, सब्जी समेत अन्य सामान मंगाया जाता है। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने पर भाड़ा अधिक देना पड़ता है। भाड़ा अधिक देेने पर कपड़ा समेत अन्य सामान भी महंगा हो जाता है। इसलिए जरूरी है कि सरकार इस पर ध्यान दे। जल्द से जल्द पेट्रोल-डीजल के दाम करने के लिए प्रयास करे।
फसल सिंचाई में अधिक लागत
खीरों। क्षेत्रीय किसान संजय कुमार, राहुल सिंह, बबलू पासी, धर्मेद्र यादव कहते हैं कि बिजली समय से आती नहीं है। गेहूं की फसल की सिंचाई समय से करना जरूरी रहता है। इसलिए डीजल से चालित इंजन से फसल की सिंचाई करनी पड़ रही है। डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं। इसलिए अधिक जेब खाली करनी पड़ रही है। किसान हित में सरकार को डीजल के दाम में कमी लाने के लिए प्रयास करना चाहिए।
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सबसे ज्यादा किसान प्रभावित है, क्योंकि बिजली न रहने के कारण उसे डीजल चालित इंजन से गेहूं की फसल की सिंचाई करनी पड़ रही है। बावजूद सरकार पेट्रोल-डीजल के दामों में कमी लाने पर जोर नहीं दे रही है। इससे लोगों में नाराजगी है।
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सभी का कहना है कि दामों में कमी लाने के लिए सरकार को आगे आना चाहिए, ताकि हम लोगों की मुश्किलें कम हो। रायबरेली पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र शर्मा ने बताया कि मौजूदा समय में डीजल के 76 रुपये 11 पैसे और पेट्रोल के 85 रुपये छह पैसे दाम पहुंच गए हैं।
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दाम करने के लिए कदम उठाए सरकार
वाहन चालक आलोक कुमार और आशीष कुमार कहते हैं कि सरकार हम सबके बारे में नहीं सोच रही है। दिनोंदिन पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं। इससे अधिक जेब खर्च करनी पड़ रही है। पहले दाम कम थे तो कम पैसे में गतंव्य स्थान तक पहुंच जाते थे। अब गंतव्य स्थान तक पहुंचने में अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। जल्द से जल्द सरकार दाम में कमी करने के लिए कदम उठाए।
अधिक देना पड़ रहा भाड़ा
व्यापारी गंगा सागर मिश्रा और अनिल कुमार का कहना है कि व्यापार करने के लिए बाहर से कपड़े, सब्जी समेत अन्य सामान मंगाया जाता है। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने पर भाड़ा अधिक देना पड़ता है। भाड़ा अधिक देेने पर कपड़ा समेत अन्य सामान भी महंगा हो जाता है। इसलिए जरूरी है कि सरकार इस पर ध्यान दे। जल्द से जल्द पेट्रोल-डीजल के दाम करने के लिए प्रयास करे।
फसल सिंचाई में अधिक लागत
खीरों। क्षेत्रीय किसान संजय कुमार, राहुल सिंह, बबलू पासी, धर्मेद्र यादव कहते हैं कि बिजली समय से आती नहीं है। गेहूं की फसल की सिंचाई समय से करना जरूरी रहता है। इसलिए डीजल से चालित इंजन से फसल की सिंचाई करनी पड़ रही है। डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं। इसलिए अधिक जेब खाली करनी पड़ रही है। किसान हित में सरकार को डीजल के दाम में कमी लाने के लिए प्रयास करना चाहिए।