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धूप में झुलसने को मजबूर रेल यात्री, सूख रहे हलक
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रायबरेली। रेलवे स्टेशन पर सुविधाएं न होने का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। समस्याओं से जूझते हुए सफर करना उनकी मजबूरी है। उन्हें चिलचिलाती धूप में स्टेशन पर खड़े होकर ट्रेन का इंतजार करना पड़ता है।
रेल अधिकारी यात्रियों को सुविधाएं देने की बात तो करते हैं पर यात्रियों की परेशानियां जानने और उन्हें दूर कराने पर ध्यान नहीं देते।
वर्तमान में 29 जोड़ी ट्रेनें रेलवे स्टेशन से गुजरती हैं। लखनऊ की ओर से आने वाली ज्यादातर ट्रेनों का ठहराव प्लेटफार्म नंबर दो-तीन पर होता है।
प्लेटफार्म नंबर एक पर तो टिनशेड है पर दो-तीन पर यात्रियों को चिलचिलाती धूप में खड़े रह कर ट्रेन का इंतजार करना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी दो और तीन नंबर प्लेटफार्म से स्टेशन के बाहर आने पर होती है।
पूरे प्लेटफार्म का चक्कर काटने के बाद पश्चिमी हिस्से पर बने पैदल पुल से प्लेटफार्म नंबर एक पर और वहां से बाहर निकलना पड़ता है।
पूर्वी हिस्से की तरफ पैदल पुल अब तक नहीं बन पाया। यात्रियों की सुविधा के लिए एस्केलेटर और लिफ्ट भी नहीं हैं। वहीं रेलवे स्टेशन पर लगी पानी की टोटियों से निकलने वाला गर्म पानी भी लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है।
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शीतल पेयजल का यहां कोई इंतजाम नहीं है। स्टेशन अधीक्षक राकेश कुमार के मुताबिक सभी नल ठीक हैं, पेयजल में जो भी दिक्कत थी दूर कर ली गई है।
कई बार बताई समस्याएं, अफसर नहीं देते ध्यान
निरीक्षण पर आने वाले रेल अधिकारियों को समस्याएं बताने की कोशिश की जाती है पर वो ध्यान नहीं देते। जोनल रेलवे प्रयोक्ता सलाहकार समिति के सदस्य डॉ. विवेक कुमार शुक्ला ने 10 सूत्री समस्याओं से संबंधित पत्र डीआरएम को भेजा, जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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रेल अधिकारी यात्रियों को सुविधाएं देने की बात तो करते हैं पर यात्रियों की परेशानियां जानने और उन्हें दूर कराने पर ध्यान नहीं देते।
वर्तमान में 29 जोड़ी ट्रेनें रेलवे स्टेशन से गुजरती हैं। लखनऊ की ओर से आने वाली ज्यादातर ट्रेनों का ठहराव प्लेटफार्म नंबर दो-तीन पर होता है।
प्लेटफार्म नंबर एक पर तो टिनशेड है पर दो-तीन पर यात्रियों को चिलचिलाती धूप में खड़े रह कर ट्रेन का इंतजार करना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी दो और तीन नंबर प्लेटफार्म से स्टेशन के बाहर आने पर होती है।
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पूरे प्लेटफार्म का चक्कर काटने के बाद पश्चिमी हिस्से पर बने पैदल पुल से प्लेटफार्म नंबर एक पर और वहां से बाहर निकलना पड़ता है।
पूर्वी हिस्से की तरफ पैदल पुल अब तक नहीं बन पाया। यात्रियों की सुविधा के लिए एस्केलेटर और लिफ्ट भी नहीं हैं। वहीं रेलवे स्टेशन पर लगी पानी की टोटियों से निकलने वाला गर्म पानी भी लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है।
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शीतल पेयजल का यहां कोई इंतजाम नहीं है। स्टेशन अधीक्षक राकेश कुमार के मुताबिक सभी नल ठीक हैं, पेयजल में जो भी दिक्कत थी दूर कर ली गई है।
कई बार बताई समस्याएं, अफसर नहीं देते ध्यान
निरीक्षण पर आने वाले रेल अधिकारियों को समस्याएं बताने की कोशिश की जाती है पर वो ध्यान नहीं देते। जोनल रेलवे प्रयोक्ता सलाहकार समिति के सदस्य डॉ. विवेक कुमार शुक्ला ने 10 सूत्री समस्याओं से संबंधित पत्र डीआरएम को भेजा, जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।