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बीईओ की मनमानी उजागर, मान्यता की 70 से अधिक पत्रावलियां निरस्त
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रायबरेली। खंड शिक्षा अधिकारियों की मनमानी आखिरकार उजागर ही हो गई। स्कूलों की मान्यता के लिए जमा की गईं पत्रावलियों पर बीईओ की रिपोर्ट नहीं लग सकी और शासन से मानकों में संशोधन होने के बाद 70 से अधिक पत्रावलियां निरस्त हो गईं। मान्यता मिलने की प्रत्याशा में ही जिले भर में अमान्य स्कूल संचालित हैं। अब स्कूलों के संचालकों को मान्यता के लिए नए सिरे से आवेदन करना होगा।
प्राथमिक व जूनियर स्तर के स्कूल के संचालन के लिए बेसिक शिक्षा विभाग से स्कूलों के संचालकों को मान्यता लेनी होती है। आवेदन के बाद खंड शिक्षा अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद ही स्कूलों को मान्यता मिलती है, लेकिन संचालकों से सेटिंग न होने के कारण खंड शिक्षा अधिकारियों में तमाम पत्रावलियों में रिपोर्ट तक नहीं लगाई। मान्यता की कई पत्रावलियां तो कई वर्षों से लंबित हैं, लेकिन रिपोर्ट न लगने के कारण मान्यता नहीं मिल सकी। हालांकि स्कूलों का संचालन धड़ल्ले से संचालित है।
शासन से मान्यता देने के संबंध में मानकों में किए गए संशोधन के बाद अब स्कूलों के संचालकों को नए सिरे से आवेदन करना होगा। ऐसी स्थित में पूर्व में मान्यता के लिए किए गए 70 से अधिक आवेदन निरस्त हो गए हैं। स्कूलों के संचालकों को खंड शिक्षा अधिकारियों की मनमानी का ही खामियाजा भोगना पड़ रहा है। बीईओ की मनमानी के कारण ही जिले भर में बिना मान्यता के स्कूलों का संचालन धड़ल्ले से जारी है।
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निजी स्कूल की मान्यता के लिए स्कूल के नाम भूमि होनी चाहिए या स्वयं की जमीन हो। किराए की भूमि पर संचालित स्कूलों को मान्यता नहीं मिलेगी। प्राथमिक स्कूल में बंधक राशि को बढ़ाकर एक लाख और जूनियर स्कूलों के लिए बंधक राशि डेढ़ लाख रुपये कर दी गई है। प्राथमिक स्तर पर 10 हजार और जूनियर स्तर पर 15 हजार रुपये का आवेदन लेना होगा।
इन मानकों को पूरा करने के बाद ही मान्यता देने की प्रक्रिया शुरू होगी। जिला अधिकारी नेहा शर्मा ने बताया कि मान्यता देने के लिए किस स्तर से देरी की गई। इसकी पड़ताल कराई जाएगी। स्कूलों के संचालक नए मानकों का आवेदन जमा करें। बिना मान्यता के स्कूलों का संचालन कतई न करें। देरी करने वाले खंड शिक्षा अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।
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प्राथमिक व जूनियर स्तर के स्कूल के संचालन के लिए बेसिक शिक्षा विभाग से स्कूलों के संचालकों को मान्यता लेनी होती है। आवेदन के बाद खंड शिक्षा अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद ही स्कूलों को मान्यता मिलती है, लेकिन संचालकों से सेटिंग न होने के कारण खंड शिक्षा अधिकारियों में तमाम पत्रावलियों में रिपोर्ट तक नहीं लगाई। मान्यता की कई पत्रावलियां तो कई वर्षों से लंबित हैं, लेकिन रिपोर्ट न लगने के कारण मान्यता नहीं मिल सकी। हालांकि स्कूलों का संचालन धड़ल्ले से संचालित है।
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शासन से मान्यता देने के संबंध में मानकों में किए गए संशोधन के बाद अब स्कूलों के संचालकों को नए सिरे से आवेदन करना होगा। ऐसी स्थित में पूर्व में मान्यता के लिए किए गए 70 से अधिक आवेदन निरस्त हो गए हैं। स्कूलों के संचालकों को खंड शिक्षा अधिकारियों की मनमानी का ही खामियाजा भोगना पड़ रहा है। बीईओ की मनमानी के कारण ही जिले भर में बिना मान्यता के स्कूलों का संचालन धड़ल्ले से जारी है।
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निजी स्कूल की मान्यता के लिए स्कूल के नाम भूमि होनी चाहिए या स्वयं की जमीन हो। किराए की भूमि पर संचालित स्कूलों को मान्यता नहीं मिलेगी। प्राथमिक स्कूल में बंधक राशि को बढ़ाकर एक लाख और जूनियर स्कूलों के लिए बंधक राशि डेढ़ लाख रुपये कर दी गई है। प्राथमिक स्तर पर 10 हजार और जूनियर स्तर पर 15 हजार रुपये का आवेदन लेना होगा।
इन मानकों को पूरा करने के बाद ही मान्यता देने की प्रक्रिया शुरू होगी। जिला अधिकारी नेहा शर्मा ने बताया कि मान्यता देने के लिए किस स्तर से देरी की गई। इसकी पड़ताल कराई जाएगी। स्कूलों के संचालक नए मानकों का आवेदन जमा करें। बिना मान्यता के स्कूलों का संचालन कतई न करें। देरी करने वाले खंड शिक्षा अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।