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Raebareli News: गरीबों के इलाज में नर्सिंगहोम पीछे, सरकारी अस्पताल आगे

Wed, 01 Oct 2025 12:56 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली Updated Wed, 01 Oct 2025 12:56 AM IST
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Nursing homes lag behind in treating the poor, while government hospitals lead
महराजगंज क्षेत्र में मंगलवार को महिला का गोल्डेन कार्ड बनाती सीएचओ।
रायबरेली। आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीबों को कैशलेस इलाज देने में नर्सिंगहोम पीछे रह गए। जिले में अब तक 89 हजार से अधिक गरीबों को कैशलेस इलाज की सुविधा मिली, जिसमें सबसे अधिक 45 हजार से अधिक गरीबों का इलाज सरकारी अस्पतालों में हुआ। कैशलेस इलाज में अच्छा प्रदर्शन करने के कारण जिला पुरुष अस्पताल को प्रदेश में पहली रैंक मिली है।
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जिले में कैशलेस इलाज की सुविधा देने के लिए जिले में 15.21 लाख गरीबों को चिह्नित किया गया है। इसमें अब तक 934944 लोगों को गोल्डन कार्ड मिल चुका है। नौ लाख से अधिक गरीबों को गोल्डन कार्ड मिलने के बाद भी अब तक मात्र 89383 गरीबों को ही कैशलेस इलाज की सुविधा मिल सकी है। योजना से जुड़े देश के किसी भी निजी या सरकारी अस्पताल से गोल्डन कार्डधारक कैशलेस इलाज की सुविधा ले सकते हैं, लेकिन लक्ष्य के सापेक्ष प्रगति बेहद खराब है।
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स्थिति यह है कि योजना से जुड़े निजी अस्पतालों में गरीबों को लक्ष्य के सापेक्ष इलाज का लाभ नहीं मिल पा रहा है। अब तक जिले के 43968 गरीबों को ही निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिल सकी है, जबकि सरकारी अस्पतालों में 45415 गरीब इलाज करवा चुके हैं। जिले के 11 निजी अस्पतालों को योजना से जोड़ा गया है। तमाम प्रयासों के बाद भी गरीबों को योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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घर-घर जाकर बना रहे गोल्डन कार्ड
जिले में अब तक 15.21 लाख गरीबों का गोल्डन कार्ड बन जाना चाहिए था, लेकिन 934944 गरीबों को ही गोल्डन कार्ड मिल सका है। शासन ने शत प्रतिशत कार्ड जारी करने के आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांवों में पहुंचकर पात्रों के गोल्डन कार्ड बनाने का काम कर रही हैं।


जिले के सभी सरकारी अस्पतालों के साथ ही 11 निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा दी जा रही है। शत प्रतिशत पात्रों को गोल्डन कार्ड देने का प्रयास किया जा रहा है। निजी अस्पतालों की तुलना में सरकारी अस्पतालों में ज्यादा गरीबों को कैशलेस इलाज की सुविधा दी गई है।
- डॉ. नवीनचंद्रा, सीएमओ
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