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खुशखबरी: तीन साल से लगातार जिले में शिशु जन्मदर में आई कमी

Fri, 18 Jun 2021 10:00 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 18 Jun 2021 10:00 PM IST
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new born child
रायबरेली। कोरोना संक्रमण काल में जिले में शिशु जन्म दर में भारी गिरावट आ गई है। पिछले तीन साल के ही स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इसकी पुष्टि कर रहे हैं। वर्ष 2018-19 की तुलना में पिछले साल जन्मदर 3.48 फीसदी कम हुई, जबकि वर्ष 2020-21 में यह काफी घटकर 12.77 फीसदी कम हो गई।
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इसको लेकर तरह-तरह के तर्क दिए जा रहे हैं। कोई कोरोना के बढ़े संक्रमण का असर बता रहा तो कोई जनसंख्या नियंत्रण के तीन साल में बढ़े संसाधनों और जागरूकता के कारण जन्म देर में कमी आने की बात कह रहे हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 2018-19 में जिले में 67207 बच्चों ने जन्म लिया था। पिछले साल वर्ष 2019-20 में जन्म दर में कमी आई और एक साल में 59816 बच्चों का जन्म हुआ।
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वर्ष 2020-21 में कोरोना के संक्रमण के दौरान जन्म दर में काफी गिरावट आई। इस साल जिले में मात्र 46303 बच्चों ने जिले में जन्म लिया। 2021-22 (दो माह में) 4217 बच्चों का जन्म हुआ है।
जन्म दर में आई कमी के पीछे कई वजहें बताई जा रही है। काफी लोग इसे कोरोना ही मुख्य वजह बता रहे है। डेढ़ साल से लोग लगातार परेशान हैं। महामारी का डर, तनाव और भविष्य की चिंता से जन्म दर में गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा लोगों का पलायन भी हुआ है। यह भी बड़ा कारण है।
पिछले चार वर्षों में जिले में बच्चों का जन्म
वर्ष जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या
2018-19 67207
2019-20 59816
2020-21 46303
2021-22 (दो माह में) 4217
लोगों ने चुने परिवार नियोजन के विकल्प: कमलेश
जिला परिवार नियोजन विशेषज्ञ कमलेश कुमार का कहना है कि पिछले तीन वर्षों से परिवार नियोजन से संसाधनों को आमजन तक पहुंचाने में तेजी आई है। अनचाहे गर्भ से बचने के लिए लोग अंतरा इंजेक्शन और छाया गोली को पसंद कर रहे हैं। नए संसाधनों से लोगों को विकल्प मिला है। लोगों में जागरूकता आई है। लोग सीमित परिवार की ओर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। हालांकि कोरोना संक्रमण का भी जन्मदर में आई कमी का काफी असर है।
भ्रांतियां दूर हुईं, लोग हुए जागरूक: वर्मा
अपर शोध अधिकारी (परिवार कल्याण) महेंद्र कुमार वर्मा का कहना है कि परिवार नियोजन को लेकर लोगों में जो भी भ्रांतियां थी जागरूकता के कारण वह पिछले दो वर्षों में बहुत कम हुई हैं। परिवार नियोजन के संसाधनों को स्वीकार करने के लिए लोग बढ़े हैं। आशा बहुओं के साथ ही अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ता गांवों में लोगों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं। बच्चे का जीवन अच्छा हो, इसके लिए लोग फैमिली प्लानिंग पर बेहतर सोच के साथ काम कर रहे हैं।

परिवार नियोजन के संसाधनों को हर व्यक्ति तक आसानी से पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए लगातार जागरूकता कार्यक्रम भी संचालित हो रहे हैं। लोगों में जागरूकता और भविष्य की चिंता को लेकर शिशु मृत्युदर में कमी आई है।
- डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ
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