{"_id":"63d56c6567fc4e7bb8440c73","slug":"na-raibaraily-news-c-13-1-68612-2023-01-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Raebareli News: ऐशबाग माइनर की जमीन पर 40 जगहों पर मिला कब्जा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Raebareli News: ऐशबाग माइनर की जमीन पर 40 जगहों पर मिला कब्जा
Sun, 29 Jan 2023 12:11 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Sun, 29 Jan 2023 12:11 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रायबरेली। शहर से होकर निकलने वाली ऐशबाग माइनर की जमीन पर शुरुआती जांच में 40 जगहों पर कब्जे मिले हैं। कहीं पर सड़क बन गई तो कहीं घरों की चारदीवारी बनी मिली। कुछ जमीन पर मॉल व दुकानें भी बनी हैं। ऐशबाग माइनर को अस्तित्व में लाने के लिए सिंचाई विभाग की कवायद से कई मोहल्लों के लोग दहशत में हैं। उन्हें डर है कि कहीं माइनर की जमीन के दायरे में उनके निर्माण न आ जाएं।
रायबरेली माइनर से निकली ऐशबाग माइनर की लंबाई 3.300 किलोमीटर है। यह माइनर शहर में गणेश नगर से निकली थी। मनिका रोड, नयापुरवा, फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज, इंदिरा नगर, जेल गार्डेन, क्रांतिपुरी होते हुए जिला कारागार परिसर के कृषि फार्म तक गई थी। इस माइनर से कृषि फार्म में सिंचाई की जाती थी।
अधिकारियों की लापरवाही के कारण धीरे-धीरे माइनर की जमीन पर कब्जे शुरू हो गए। कहीं मकान तो कहीं माॅल बन गए। सिंचाई विभाग के आंकड़ों में 30 साल पहले ही माइनर का वजूद खत्म हो चुका है। 2017 में मामला उछला तो सर्वे हुआ लेकिन यह कवायद कुछ दिनों में ही ठंडे बस्ते में चली गई। अब दोबारा फिर से ऐशबाग माइनर का मामला चर्चा में है। शिकायत के बाद डीएम के निर्देश पर सिंचाई विभाग एक बार फिर कब्जा हटवाने और माइनर को अस्तित्व में लाने के लिए तेजी से काम कर रहा है।
विज्ञापन
माइनर पर कब्जा करने वालों की पहचान के लिए डीएम माला श्रीवास्तव के आदेश पर एसडीएम सदर शिखा शंखवार व सिंचाई विभाग के एक्सईएन हेमंत कुमार वर्मा की अगुवाई वाली टीम सर्वे कर रही है। 23 जनवरी को शुरू हुए सर्वे में अब तक चिह्नित कब्जों में कई स्थानों पर सड़क बनी मिली, तो कहीं-कहीं घरों की चारदीवारी या फिर दीवार बनी पाई गई।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता हेमंत कुमार का कहना है कि 23 जनवरी को सर्वे शुरू हुआ। सर्वे पूरा होने में अभी दो दिन का वक्त और लग सकता है। सर्वे पूरा होने पर कब्जा करने वालों को नोटिस दी जाएगी। जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
2017 में 65 लोगों को दिया गया था नोटिस
ऐशबाग माइनर पर तीन दशक से कब्जा है, लेकिन अतिक्रमण हटवाने में राजनीतिक दखल बाधा बन जाता है। यही वजह है कि कब्जा हटवाने को लेकर कवायद शुरू होती है, लेकिन बाद में ठंडे बस्ते में चली जाती है। कब्जा हटवाने के लिए 2017 में 65 लोगों को नोटिस दी गई थी, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिल पाई। देखने वाली यह होगी कि इस बार कब्जा हटाने के लिए चलाई गई मुहिम किस मुकाम तक पहुंच पाती है।
सींचपाल और सींच पर्यवेक्षक की अहम भूमिका
सिंचाई विभाग में नहरों पर होने वाले अतिक्रमण रोकने की जिम्मेदार सींचपाल और सींच पर्यवेक्षक की होती है। दोनों कर्मचारी नहरों पर होने वाले अतिक्रमण की सूचना उच्चाधिकारियों को देने के साथ मुकदमा दर्ज करा सकते हैं। ऐशबाग माइनर का अस्तित्व खत्म हो गया, लेकिन जिम्मेदारों को भनक नहीं लगी। या फिर इन लोगों की शह पर ही कब्जा हो गया।
रायबरेली रजबहे पर भी हो रहा अतिक्रमण
ऐशबाग माइनर ही नहीं शारदा सहायक नहर से निकले रायबरेली रजबहे पर भी कब्जा हो गया। यह रजबहा प्रगतिपुम्, तुलसीनगर, मोटल चौराहा, आईटीआई होते हुए नजरवा ताल में जाकर मिलता है। काफी हिस्से में कब्जा कर लिया गया है, लेकिन जिम्मेदार खामोश हैं। यही हाल रहा तो इसका भी अस्तित्व खत्म होने में वक्त नहीं लगेगा।
विज्ञापन
रायबरेली माइनर से निकली ऐशबाग माइनर की लंबाई 3.300 किलोमीटर है। यह माइनर शहर में गणेश नगर से निकली थी। मनिका रोड, नयापुरवा, फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज, इंदिरा नगर, जेल गार्डेन, क्रांतिपुरी होते हुए जिला कारागार परिसर के कृषि फार्म तक गई थी। इस माइनर से कृषि फार्म में सिंचाई की जाती थी।
विज्ञापन
अधिकारियों की लापरवाही के कारण धीरे-धीरे माइनर की जमीन पर कब्जे शुरू हो गए। कहीं मकान तो कहीं माॅल बन गए। सिंचाई विभाग के आंकड़ों में 30 साल पहले ही माइनर का वजूद खत्म हो चुका है। 2017 में मामला उछला तो सर्वे हुआ लेकिन यह कवायद कुछ दिनों में ही ठंडे बस्ते में चली गई। अब दोबारा फिर से ऐशबाग माइनर का मामला चर्चा में है। शिकायत के बाद डीएम के निर्देश पर सिंचाई विभाग एक बार फिर कब्जा हटवाने और माइनर को अस्तित्व में लाने के लिए तेजी से काम कर रहा है।
विज्ञापन
माइनर पर कब्जा करने वालों की पहचान के लिए डीएम माला श्रीवास्तव के आदेश पर एसडीएम सदर शिखा शंखवार व सिंचाई विभाग के एक्सईएन हेमंत कुमार वर्मा की अगुवाई वाली टीम सर्वे कर रही है। 23 जनवरी को शुरू हुए सर्वे में अब तक चिह्नित कब्जों में कई स्थानों पर सड़क बनी मिली, तो कहीं-कहीं घरों की चारदीवारी या फिर दीवार बनी पाई गई।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता हेमंत कुमार का कहना है कि 23 जनवरी को सर्वे शुरू हुआ। सर्वे पूरा होने में अभी दो दिन का वक्त और लग सकता है। सर्वे पूरा होने पर कब्जा करने वालों को नोटिस दी जाएगी। जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
2017 में 65 लोगों को दिया गया था नोटिस
ऐशबाग माइनर पर तीन दशक से कब्जा है, लेकिन अतिक्रमण हटवाने में राजनीतिक दखल बाधा बन जाता है। यही वजह है कि कब्जा हटवाने को लेकर कवायद शुरू होती है, लेकिन बाद में ठंडे बस्ते में चली जाती है। कब्जा हटवाने के लिए 2017 में 65 लोगों को नोटिस दी गई थी, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिल पाई। देखने वाली यह होगी कि इस बार कब्जा हटाने के लिए चलाई गई मुहिम किस मुकाम तक पहुंच पाती है।
सींचपाल और सींच पर्यवेक्षक की अहम भूमिका
सिंचाई विभाग में नहरों पर होने वाले अतिक्रमण रोकने की जिम्मेदार सींचपाल और सींच पर्यवेक्षक की होती है। दोनों कर्मचारी नहरों पर होने वाले अतिक्रमण की सूचना उच्चाधिकारियों को देने के साथ मुकदमा दर्ज करा सकते हैं। ऐशबाग माइनर का अस्तित्व खत्म हो गया, लेकिन जिम्मेदारों को भनक नहीं लगी। या फिर इन लोगों की शह पर ही कब्जा हो गया।
रायबरेली रजबहे पर भी हो रहा अतिक्रमण
ऐशबाग माइनर ही नहीं शारदा सहायक नहर से निकले रायबरेली रजबहे पर भी कब्जा हो गया। यह रजबहा प्रगतिपुम्, तुलसीनगर, मोटल चौराहा, आईटीआई होते हुए नजरवा ताल में जाकर मिलता है। काफी हिस्से में कब्जा कर लिया गया है, लेकिन जिम्मेदार खामोश हैं। यही हाल रहा तो इसका भी अस्तित्व खत्म होने में वक्त नहीं लगेगा।