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1000 स्कूलों में एमडीएम ठप
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 04 Jan 2016 11:18 PM IST
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डेढ़ लाख से अधिक बच्चे खाली पेट लौट रहे हैं। मामले को डीएम ने गंभीरता से लिया है। डीएम के आदेश पर सोमवार को बीएसए ने सभी बीईओ को आदेश जारी करके पूर्व प्रधानों से एमडीएम का अनाज वसूलने के आदेश दिए हैं।
सात दिन में प्रक्रिया शुरू कर शत प्रतिशत स्कूलों में एमडीएम शुरू कराने के आदेश दिए गए हैं। जिले के प्राथमिक स्कूल बीबीपुर तालुकेहसन, सिद्धौर, कोड़िया, शंकरपुर, उमरी समेत एक हजार से अधिक प्राथमिक स्कूलों में एमडीएम नहीं बन रहा है।
ऐसी स्थिति में डेढ़ लाख से अधिक बच्चे बिना भोजन के ही स्कूलों से वापस लौट रहे हैं। आरोप है कि कोटेदारों ने कई महीने से इन स्कूलों का अनाज उपलब्ध नहीं कराया है।
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तमाम स्कूलों को कन्वर्जन कॉस्ट तक नहीं मिली है। कोटेदार व पूर्व ग्राम प्रधान अनाज का वारा-न्यारा कर गए हैं। हेडमास्टरों के प्रयास के बाद भी अनाज स्कूलों का वापस नहीं किया जा रहा है।
शिकायत पर मामले को डीएम ने गंभीरता से लिया है। डीएम के आदेश पर सोमवार को बीएसए ने सभी बीईओ को पूर्व प्रधानों से डकारे गए अनाज को वसूलवाने और सभी स्कूलों में एमडीएम बनवाने के भी आदेश दिए हैं।
एक सप्ताह में प्रक्रिया को पूरी करके रिपोर्ट मांगी गई है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही पर ढिलाई के लिए बीईओ ही जिम्मेदार होंगे।
वहीं शासन ने पूर्व में परिषदीय स्कूलों के बच्चों में दूध बंटवाने के आदेश दिए थे। तमाम खामियां होने के कारण आदेश पर एमडीएम के मेन्यू में संशोधन करके नया आदेश जारी किया गया।
इसके तहत हर बुधवार को दूध बांटने के लिए बजट की भी व्यवस्था की गई। लेकिन स्कूलों में बच्चों को दूध नहीं बंट रहा है। 2,467 स्कूलों में मात्र 729 स्कूलों में पिछले बुधवार को दूध बांटा गया था।
यानी 30 प्रतिशत ही बच्चों को दूध मिला। 70 प्रतिशत बच्चे दूध के लिए तरस रहे हैं। बीएसए ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को नोटिस जारी करके स्कूलों में हर बुधवार को शत प्रतिशत बच्चों में दूध बंटवाने के आदेश दिए हैं।
बीएसए रामसागर पति त्रिपाठी ने बताया कि अनाज न मिलने के कारण एमडीएम नहीं बन रहा है। डीएम के निर्देश पर बीईओ को नोटिस देकर पूर्व प्रधानों से एमडीएम का अनाज वापस लेने के आदेश दिए गए हैं।
अनाज वापस न करने वालों पर एफआईआर कराई जाएगी। एक सप्ताह में सभी स्कूलों में एमडीएम शुरू कराने के आदेश दिए हैं।
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सात दिन में प्रक्रिया शुरू कर शत प्रतिशत स्कूलों में एमडीएम शुरू कराने के आदेश दिए गए हैं। जिले के प्राथमिक स्कूल बीबीपुर तालुकेहसन, सिद्धौर, कोड़िया, शंकरपुर, उमरी समेत एक हजार से अधिक प्राथमिक स्कूलों में एमडीएम नहीं बन रहा है।
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ऐसी स्थिति में डेढ़ लाख से अधिक बच्चे बिना भोजन के ही स्कूलों से वापस लौट रहे हैं। आरोप है कि कोटेदारों ने कई महीने से इन स्कूलों का अनाज उपलब्ध नहीं कराया है।
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तमाम स्कूलों को कन्वर्जन कॉस्ट तक नहीं मिली है। कोटेदार व पूर्व ग्राम प्रधान अनाज का वारा-न्यारा कर गए हैं। हेडमास्टरों के प्रयास के बाद भी अनाज स्कूलों का वापस नहीं किया जा रहा है।
शिकायत पर मामले को डीएम ने गंभीरता से लिया है। डीएम के आदेश पर सोमवार को बीएसए ने सभी बीईओ को पूर्व प्रधानों से डकारे गए अनाज को वसूलवाने और सभी स्कूलों में एमडीएम बनवाने के भी आदेश दिए हैं।
एक सप्ताह में प्रक्रिया को पूरी करके रिपोर्ट मांगी गई है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही पर ढिलाई के लिए बीईओ ही जिम्मेदार होंगे।
वहीं शासन ने पूर्व में परिषदीय स्कूलों के बच्चों में दूध बंटवाने के आदेश दिए थे। तमाम खामियां होने के कारण आदेश पर एमडीएम के मेन्यू में संशोधन करके नया आदेश जारी किया गया।
इसके तहत हर बुधवार को दूध बांटने के लिए बजट की भी व्यवस्था की गई। लेकिन स्कूलों में बच्चों को दूध नहीं बंट रहा है। 2,467 स्कूलों में मात्र 729 स्कूलों में पिछले बुधवार को दूध बांटा गया था।
यानी 30 प्रतिशत ही बच्चों को दूध मिला। 70 प्रतिशत बच्चे दूध के लिए तरस रहे हैं। बीएसए ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को नोटिस जारी करके स्कूलों में हर बुधवार को शत प्रतिशत बच्चों में दूध बंटवाने के आदेश दिए हैं।
बीएसए रामसागर पति त्रिपाठी ने बताया कि अनाज न मिलने के कारण एमडीएम नहीं बन रहा है। डीएम के निर्देश पर बीईओ को नोटिस देकर पूर्व प्रधानों से एमडीएम का अनाज वापस लेने के आदेश दिए गए हैं।
अनाज वापस न करने वालों पर एफआईआर कराई जाएगी। एक सप्ताह में सभी स्कूलों में एमडीएम शुरू कराने के आदेश दिए हैं।