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शहर को रोशनी से जगमग करने का सपना तार-तार
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रायबरेली। शहर को दूधिया रोशनी से जगमग करने का सपना तार-तार हो गया है। हालात ये हैं कि नगर पालिका क्षेत्र के वार्डों में 45 फीसदी लाइटें खराब पड़ी हैं। रात होते ही वार्डों में अंधेरा छा जाता है, जिसका खामियाजा शहरवासियों को उठाना पड़ रहा है।
सहमति पत्र को लेकर ईईएसएल फर्म और नगर पालिका के अफसरों के बीच ठन गई है। ऐेसे में फर्म ने दिसंबर 2020 से काम करना ही बंद कर दिया है। हालात ये हो गए हैं कि अब न तो नई स्ट्रीट लाइटें लग पा रही हैं और न ही खराब पड़ी लाइटों को दुरुस्त कराया जा रहा है।
करीब तीन साल पहले नगर पालिका ने शहर को जगमग करने के सपने को हकीकत में बदलने के लिए कार्यदायी संस्था ईईएसएल से अनुबंध किया था। अनुबंध के तहत सात साल तक कार्यदायी संस्था को शहर में लगवाई जाने वाली लाइटों की देखरेख करनी थी।
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शहर के 34 वार्डों में सात हजार 641 स्ट्रीट लाइटें लगाने का एग्रीमेंट किया गया था। इसके सापेक्ष कार्यदायी फर्म ने 10 हजार 893 स्ट्रीट लाइटें लगवाईं। कुछ माह बाद ही ये लाइटें खराब होने लगीं। इस बीच कार्यदायी फर्म और पालिका के बीच ठन गई।
फर्म के अफसरों का दावा है कि नगर पालिका की तरफ से स्ट्रीट लाइटें लग जाने का सहमति पत्र दिया जाए, ताकि उनका भुगतान हो सका। पालिका सहमति पत्र नहीं दे रही है।
नगर पालिका अफसर तर्क दे रहे हैं कि लाइटें खराब पड़ी हैं। पहले लाइटें ठीक कराई जाएं तो सहमति पत्र दिया जाए। इस तनातनी के चलते दिसंबर 2020 से फर्म ने यहां पर काम करना बंद कर दिया है।
यह हाल तब है, जब शहर के वार्डों में लगाई गई 45 फीसदी लाइटें खराब हो गई हैं। किसी का स्विच खराब हो गया है तो किसी की लाइट खराब है। शहर के इंदिरा नगर, सत्य नगर, सिविल लाइंस चौराहा, कैनाल रोड, कहारों का अड्डा समेत अन्य स्थानों पर अंधेरा रहता है। नागरिकों को रात में आने जाने में परेशानी झेलनी पड़ रही है।
लाइटें खराब होने की 150 शिकायतें
शहर में स्ट्रीट लाइटें खराब होने की शिकायतें आम हो गई हैं। अब तक स्ट्रीट लाइटें खराब होने की 150 शिकायतें अफसरों तक पहुंच चुकी हैं। होते करते लाइटों के खराब हुए काफी समय बीत गया, लेकिन उन्हें ठीक नहीं कराया जा सका। रात में अंधेरा रहने के कारण चोर उचक्कों का भय भी नागरिकों को सता रहा है। बावजूद यह किसी को नहीं दिख रहा है।
कमीशनबाजी का खेल
शहर में स्ट्रीट लाइटें लगवाने में कमीशनबाजी का भी खूब खेल किया गया। बताया जा रहा है कि शहर में 70 वाट, 90 वाट और 120 वाट की लाइटें लगाई गई हैं। एक लाइट की कीमत आठ से 10 हजार रुपये तक है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि इतनी महंगी लाइटें लगने के बाद भी 45 फीसदी लाइटें शहर में खराब हो गई हैं। ऐसे में जाहिर है कि कमीशनबाजी के खेल से लाइटें खराब हो रही हैं।
50 फीसदी बिजली खपत होने पर करें भुगतान
नगरीय निकाय उत्तर प्रदेश के निदेशक ने पत्र भेजकर कहा है कि शहर में स्ट्रीट लाइटें लगवाने के बाद बिजली खपत में 50 फीसदी की कमी आनी चाहिए। इसके बाद ही कार्यदायी फर्म का भुगतान किया जाए। हालांकि लाइटें लगने के बाद बिजली खपत में कमी नहीं आई है।
ईईएसएल की तरफ से शहर में लक्ष्य से अधिक लाइटें लगा दी गई हैं। साथ ही शहर में 45 फीसदी लाइटें भी खराब हो गई हैं। बावजूद इसके कार्यदायी फर्म सहमति पत्र मांग रही है। बिना लाइटें ठीक हुए कैसे सहमति पत्र दिया जा सकता है। फर्म के अफसरों से कहा गया है कि पहले लाइटें ठीक कराई जाएं, ताकि उन्हें सहमति पत्र दिया जा सका। यही नहीं लाइटें लगने के बाद 50 फीसदी बिजली खपत कम होने पर ही उच्चाधिकारियों ने भुगतान करने के आदेश दिए गए हैं। मानक पूरा करने पर सहमति पत्र दिया जाएगा।
बालमुकुंद मिश्रा, ईओ, नगर पालिका रायबरेली
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सहमति पत्र को लेकर ईईएसएल फर्म और नगर पालिका के अफसरों के बीच ठन गई है। ऐेसे में फर्म ने दिसंबर 2020 से काम करना ही बंद कर दिया है। हालात ये हो गए हैं कि अब न तो नई स्ट्रीट लाइटें लग पा रही हैं और न ही खराब पड़ी लाइटों को दुरुस्त कराया जा रहा है।
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करीब तीन साल पहले नगर पालिका ने शहर को जगमग करने के सपने को हकीकत में बदलने के लिए कार्यदायी संस्था ईईएसएल से अनुबंध किया था। अनुबंध के तहत सात साल तक कार्यदायी संस्था को शहर में लगवाई जाने वाली लाइटों की देखरेख करनी थी।
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शहर के 34 वार्डों में सात हजार 641 स्ट्रीट लाइटें लगाने का एग्रीमेंट किया गया था। इसके सापेक्ष कार्यदायी फर्म ने 10 हजार 893 स्ट्रीट लाइटें लगवाईं। कुछ माह बाद ही ये लाइटें खराब होने लगीं। इस बीच कार्यदायी फर्म और पालिका के बीच ठन गई।
फर्म के अफसरों का दावा है कि नगर पालिका की तरफ से स्ट्रीट लाइटें लग जाने का सहमति पत्र दिया जाए, ताकि उनका भुगतान हो सका। पालिका सहमति पत्र नहीं दे रही है।
नगर पालिका अफसर तर्क दे रहे हैं कि लाइटें खराब पड़ी हैं। पहले लाइटें ठीक कराई जाएं तो सहमति पत्र दिया जाए। इस तनातनी के चलते दिसंबर 2020 से फर्म ने यहां पर काम करना बंद कर दिया है।
यह हाल तब है, जब शहर के वार्डों में लगाई गई 45 फीसदी लाइटें खराब हो गई हैं। किसी का स्विच खराब हो गया है तो किसी की लाइट खराब है। शहर के इंदिरा नगर, सत्य नगर, सिविल लाइंस चौराहा, कैनाल रोड, कहारों का अड्डा समेत अन्य स्थानों पर अंधेरा रहता है। नागरिकों को रात में आने जाने में परेशानी झेलनी पड़ रही है।
लाइटें खराब होने की 150 शिकायतें
शहर में स्ट्रीट लाइटें खराब होने की शिकायतें आम हो गई हैं। अब तक स्ट्रीट लाइटें खराब होने की 150 शिकायतें अफसरों तक पहुंच चुकी हैं। होते करते लाइटों के खराब हुए काफी समय बीत गया, लेकिन उन्हें ठीक नहीं कराया जा सका। रात में अंधेरा रहने के कारण चोर उचक्कों का भय भी नागरिकों को सता रहा है। बावजूद यह किसी को नहीं दिख रहा है।
कमीशनबाजी का खेल
शहर में स्ट्रीट लाइटें लगवाने में कमीशनबाजी का भी खूब खेल किया गया। बताया जा रहा है कि शहर में 70 वाट, 90 वाट और 120 वाट की लाइटें लगाई गई हैं। एक लाइट की कीमत आठ से 10 हजार रुपये तक है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि इतनी महंगी लाइटें लगने के बाद भी 45 फीसदी लाइटें शहर में खराब हो गई हैं। ऐसे में जाहिर है कि कमीशनबाजी के खेल से लाइटें खराब हो रही हैं।
50 फीसदी बिजली खपत होने पर करें भुगतान
नगरीय निकाय उत्तर प्रदेश के निदेशक ने पत्र भेजकर कहा है कि शहर में स्ट्रीट लाइटें लगवाने के बाद बिजली खपत में 50 फीसदी की कमी आनी चाहिए। इसके बाद ही कार्यदायी फर्म का भुगतान किया जाए। हालांकि लाइटें लगने के बाद बिजली खपत में कमी नहीं आई है।
ईईएसएल की तरफ से शहर में लक्ष्य से अधिक लाइटें लगा दी गई हैं। साथ ही शहर में 45 फीसदी लाइटें भी खराब हो गई हैं। बावजूद इसके कार्यदायी फर्म सहमति पत्र मांग रही है। बिना लाइटें ठीक हुए कैसे सहमति पत्र दिया जा सकता है। फर्म के अफसरों से कहा गया है कि पहले लाइटें ठीक कराई जाएं, ताकि उन्हें सहमति पत्र दिया जा सका। यही नहीं लाइटें लगने के बाद 50 फीसदी बिजली खपत कम होने पर ही उच्चाधिकारियों ने भुगतान करने के आदेश दिए गए हैं। मानक पूरा करने पर सहमति पत्र दिया जाएगा।
बालमुकुंद मिश्रा, ईओ, नगर पालिका रायबरेली