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आलू का बंपर उत्पादन, मायूस अन्नदाताओं के चेहरे
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गांव में खेत में लगा आलू।
- फोटो : RAIBARAILY
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रायबरेली। जिले में आलू के बेहतरीन उत्पादन से किसानों को ज्यादा मुनाफा मिलने की उम्मीद टूट गई है। किसान इससे परेशान और हताश हैं। जितनी अच्छी आलू की फसल होने की उम्मीद है उससे भंडारण में समस्या आने की संभावना है।
जिला उद्यान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल करीब एक लाख 15 हजार मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हुआ था। इस साल छह हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की बोवाई की गई थी। अब जबकि आलू की खोदाई का काम चल रहा है।
उम्मीद जताई जा रही है जिले में करीब ढाई लाख मीट्रिक टन आलू का उत्पादन होगा। जिले में संचालित सभी कोल्ड स्टोरेज में कुल भंडारण की क्षमता एक लाख 97 हजार मीट्रिक टन है। ऐसे में किसानों को भंडारण की समस्या से भी जूझना पड़ सकता है।
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डीजल की बढ़ी कीमतों से इस बार भंडारण का किराया भी बढ़ गया है। वहीं उपज ज्यादा होने से व्यापारी किसानों से आलू 700 से 750 रुपये प्रति कुंतल की दर से खरीद रहे हैं। जबकि पिछले साल 1300 से लेकर 1400 रुपये प्रति क्विंटल की दर से आलू खरीदा जा रहा था।
मिनी फर्रुखाबाद के नाम से जाना जाता सलोन
सलोन। जिले का सलोन क्षेत्र उत्तर प्रदेश में आलू उत्पादन में दूसरा स्थान रखता है। यही वजह है कि सलोन को आलू उत्पादन के लिए मिनी फर्रुखाबाद कहा जाता है। पिछली बार तो आलू किसान अपनी उपज का अच्छा दाम मिलने से खूब खुश हुए थे, वहीं इस बार किसानों को लागत भी नहीं मिल पा रही है। जबकि इस बार प्रति बीघा आलू का उत्पादन पिछले वर्ष की अपेक्षा हो रहा है।
इस बार अच्छे आलू उत्पादन की वजह किसान अच्छा मौसम बता रहे हैं। पिछले वर्ष प्रति बीघा आलू का उत्पादन 50 से 60 क्विंटल हुआ था। इस बार लगभग दोगुना आलू उत्पादन हुआ है। इससे अभी तो नहीं, लेकिन मार्च के अंत तक भंडारण की भी समस्या आ सकती है।
अभी तो किसानों ने कोल्ड स्टोरों में भंडारण शुरू ही किया है। फिलहाल कोल्ड स्टोर में भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था है। सलोन क्षेत्र के पूर्वी हिस्से में आलू की खुदाई किसानों ने शुरू कर दी है और भंडारण भी कोल्ड स्टोरों में शुरू कर दिया है, जबकि पश्चिमी हिस्से में अभी आलू की खोदाई प्रारंभ नहीं हुई है।
डीजल के चलते बढ़ाया किराया कोल्ड स्टोरेज संचालक चंद्रशेखर रस्तोगी ने बताया कि डीजल के दाम अधिक होने से कोल्ड स्टोर में इस बार किराया भी बढ़ाया गया है। जो किराया पिछले वर्ष 240 प्रति कुंटल था। वह इस वर्ष 250 प्रति क्विंटल कर दिया गया है। इस बार आलू की फसल की पैदावार अच्छी हुई है, जिसके कारण कोल्ड स्टोरेज फुल होने के आसार हैं। सलोन क्षेत्र में 18 कोल्ड स्टोरेज हैं। रायबरेली जिले के अलावा प्रतापगढ़ क्षेत्र के किसान भी आलू यहीं पर भंडारण करने के लिए आते हैं। 15 से 20 मार्च तक आलू भंडारण की समस्या आ जाएगी।
लागत निकालना भी मुश्किल
सलोन तहसील क्षेत्र के माधवपुर गांव के रहने वाले किसान दिवाकर पांडेय, सुरेश बहादुर सिंह और जागेश्वर यादव कहते हैं कि इस बार आलू की पैदावार रोग ना लगने के कारण अच्छी हुई है, लेकिन रेट लगभग आधा हो गया है, जबकि इस बार आलू लगाने के लिए लागत अधिक आई थी। डीजल महंगा होने से कोल्ड स्टोरेज संचालकों ने किराया भी बढ़ा दिया है।
आलू के दाम कम होने से किसानों की कमर टूट गई है। सलोन तहसील क्षेत्र के वालिया गांव के किसान कन्हैया लाल यादव कहते हैं कि इस बार आलू में झुलसा रोग का प्रकोप लगभग ना के बराबर था। जो भी रोग लगा भी वह अंत में लगा। इसके कारण आलू उत्पादन में ज्यादा दोष प्रभाव नहीं पड़ा, बल्कि आलू उत्पादन पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार दोगना हुआ है। ऐसे में आलू के दाम कम हो गए हैं। इससे लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
इस साल छह हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल पर आलू की बोवाई की गई थी। आलू की खोदाई का कार्य शुरू हो गया है। पिछले साल की अपेक्षा इस बार बंपर आलू उत्पादन होने की उम्मीद है। आलू के दाम कम होने से जरूर किसान हताश हैं। हालांकि यहां पर आलू भंडारण की कोई समस्या अभी तक नहीं आई है।
- केशवराम चौधरी, जिला उद्यान अधिकारी
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जिला उद्यान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल करीब एक लाख 15 हजार मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हुआ था। इस साल छह हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की बोवाई की गई थी। अब जबकि आलू की खोदाई का काम चल रहा है।
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उम्मीद जताई जा रही है जिले में करीब ढाई लाख मीट्रिक टन आलू का उत्पादन होगा। जिले में संचालित सभी कोल्ड स्टोरेज में कुल भंडारण की क्षमता एक लाख 97 हजार मीट्रिक टन है। ऐसे में किसानों को भंडारण की समस्या से भी जूझना पड़ सकता है।
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डीजल की बढ़ी कीमतों से इस बार भंडारण का किराया भी बढ़ गया है। वहीं उपज ज्यादा होने से व्यापारी किसानों से आलू 700 से 750 रुपये प्रति कुंतल की दर से खरीद रहे हैं। जबकि पिछले साल 1300 से लेकर 1400 रुपये प्रति क्विंटल की दर से आलू खरीदा जा रहा था।
मिनी फर्रुखाबाद के नाम से जाना जाता सलोन
सलोन। जिले का सलोन क्षेत्र उत्तर प्रदेश में आलू उत्पादन में दूसरा स्थान रखता है। यही वजह है कि सलोन को आलू उत्पादन के लिए मिनी फर्रुखाबाद कहा जाता है। पिछली बार तो आलू किसान अपनी उपज का अच्छा दाम मिलने से खूब खुश हुए थे, वहीं इस बार किसानों को लागत भी नहीं मिल पा रही है। जबकि इस बार प्रति बीघा आलू का उत्पादन पिछले वर्ष की अपेक्षा हो रहा है।
इस बार अच्छे आलू उत्पादन की वजह किसान अच्छा मौसम बता रहे हैं। पिछले वर्ष प्रति बीघा आलू का उत्पादन 50 से 60 क्विंटल हुआ था। इस बार लगभग दोगुना आलू उत्पादन हुआ है। इससे अभी तो नहीं, लेकिन मार्च के अंत तक भंडारण की भी समस्या आ सकती है।
अभी तो किसानों ने कोल्ड स्टोरों में भंडारण शुरू ही किया है। फिलहाल कोल्ड स्टोर में भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था है। सलोन क्षेत्र के पूर्वी हिस्से में आलू की खुदाई किसानों ने शुरू कर दी है और भंडारण भी कोल्ड स्टोरों में शुरू कर दिया है, जबकि पश्चिमी हिस्से में अभी आलू की खोदाई प्रारंभ नहीं हुई है।
डीजल के चलते बढ़ाया किराया कोल्ड स्टोरेज संचालक चंद्रशेखर रस्तोगी ने बताया कि डीजल के दाम अधिक होने से कोल्ड स्टोर में इस बार किराया भी बढ़ाया गया है। जो किराया पिछले वर्ष 240 प्रति कुंटल था। वह इस वर्ष 250 प्रति क्विंटल कर दिया गया है। इस बार आलू की फसल की पैदावार अच्छी हुई है, जिसके कारण कोल्ड स्टोरेज फुल होने के आसार हैं। सलोन क्षेत्र में 18 कोल्ड स्टोरेज हैं। रायबरेली जिले के अलावा प्रतापगढ़ क्षेत्र के किसान भी आलू यहीं पर भंडारण करने के लिए आते हैं। 15 से 20 मार्च तक आलू भंडारण की समस्या आ जाएगी।
लागत निकालना भी मुश्किल
सलोन तहसील क्षेत्र के माधवपुर गांव के रहने वाले किसान दिवाकर पांडेय, सुरेश बहादुर सिंह और जागेश्वर यादव कहते हैं कि इस बार आलू की पैदावार रोग ना लगने के कारण अच्छी हुई है, लेकिन रेट लगभग आधा हो गया है, जबकि इस बार आलू लगाने के लिए लागत अधिक आई थी। डीजल महंगा होने से कोल्ड स्टोरेज संचालकों ने किराया भी बढ़ा दिया है।
आलू के दाम कम होने से किसानों की कमर टूट गई है। सलोन तहसील क्षेत्र के वालिया गांव के किसान कन्हैया लाल यादव कहते हैं कि इस बार आलू में झुलसा रोग का प्रकोप लगभग ना के बराबर था। जो भी रोग लगा भी वह अंत में लगा। इसके कारण आलू उत्पादन में ज्यादा दोष प्रभाव नहीं पड़ा, बल्कि आलू उत्पादन पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार दोगना हुआ है। ऐसे में आलू के दाम कम हो गए हैं। इससे लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
इस साल छह हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल पर आलू की बोवाई की गई थी। आलू की खोदाई का कार्य शुरू हो गया है। पिछले साल की अपेक्षा इस बार बंपर आलू उत्पादन होने की उम्मीद है। आलू के दाम कम होने से जरूर किसान हताश हैं। हालांकि यहां पर आलू भंडारण की कोई समस्या अभी तक नहीं आई है।
- केशवराम चौधरी, जिला उद्यान अधिकारी