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जिंदगी छीनने वाली शराब की बढ़ रही मांग
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रायबरेली। महराजगंज शराब कांड में जिस विंडीज ब्रांड की देसी शराब पीने से महिला समेत 10 लोगों की मौतें हुई है, उसकी डिमांड जिले में बढ़ रही है।
इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बिक्री करने का जो लक्ष्य प्रतिमाह होता है, उससे ज्यादा देसी शराब लोग गटक रहे हैं।
घटना के बाद विंडीज शराब की बिक्री और आपूर्ति पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है और चेक कराया जा रहा है कि गोदामों में विंडीज ब्रांड की देसी शराब की कितनी उपलब्धता है।
खास बात ये है कि रेडिको खतान, रामपुर की कंपनी विंडीज ब्रांड की देसी शराब बनाती है। इस कंपनी की ओर से बनाई गई शराब सिर्फ रायबरेली ही नहीं, बल्कि प्रदेश के सभी जिलों में आपूर्ति होती है।
आबकारी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में देसी शराब की 306 दुकानें हैं। इन दुकानों में प्रति माह चार लाख 47 हजार 732 लीटर देसी शराब बिक्री करने का लक्ष्य होता है।
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इस लक्ष्य के सापेक्ष इन दुकानों से प्रति माह छह लाख 10 हजार 804 लीटर देसी शराब की बिक्री की जा रही है। इन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि विंडीज ब्रांड की देसी शराब की डिमांड कितनी है। ऐेसे में देसी शराब की बिक्री को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं।
देसी शराब को रखने के लिए जिले में पांच गोदाम हैं। इसमें दो गोदाम जिला आबकारी कार्यालय में हैं, जबकि तीन गोदाम कार्यालय के बाहर हैैं।
दस लोगों की मौत के बाद गोदामों से विंडीज ब्रांड की देसी शराब की आपूर्ति दुकानों पर किए जाने को लेकर रोक लगा दी गई है। गोदामों में चेक कराया जा रहा है कि स्टॉक की कितनी उपलब्धता है।
चेकिंग के नाम पर न स्टाफ और न ही संसाधन
महराजगंज शराब कांड के बाद आबकारी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी कठघरे में हैं। जिस तरह देसी शराब की बिक्री बढ़ रही है, उस हिसाब से चेकिंग आदि के लिए विभाग के पास न तो स्टाफ और न ही संसाधन है।
जिले में महराजगंज, लालगंज, ऊंचाहार, डलमऊ, सदर, सलोन सर्किल हैं, जहां पर शराब की बिक्री पर रोक लगाने के लिए आबकारी निरीक्षक की तैनाती है। इन सभी के कार्यों की मॉनिटरिंग के लिए जिला आबकारी अधिकारी की तैनाती है। वहीं हर तहसील में महज 17 सिपाही तैनात हैं। चेकिंग के लिए दो गाड़ियां हैं।
एक गाड़ी जिला अधिकारी के पास रहती है, जबकि एक गाड़ी संविदा पर है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले में प्रति माह देसी, अंग्रेजी, बियर आदि की करोड़ों की बिक्री होती है, लेकिन स्टाफ और संसाधन की कमी है। यह भी शराब माफिया पर कार्रवाई ना होना बड़ा सवाल खड़े करती है।
कार्रवाई, फिर भी धधक रही शराब की भट्ठियां
आबकारी विभाग के आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल 2021 से जनवरी तक छापामारी करके 40 हजार लीटर शराब बरामद की गई। वहीं 1500 धंधेबाजों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया। इसके बावजूद जिले में शहर से लेकर देहात क्षेत्रों में अवैध शराब की भट्टियां धधक रही हैं। खासकर गुरुबख्शगंज, लालगंज, सरेनी और शहर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध शराब बनाई जा रही है। आबकारी विभाग और थानेदारों की मिलीभगत से यह खेल चल रहा है। सख्त कार्रवाई न होने के कारण धंधेबाजों के हौसले बुलंद हैं।
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इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बिक्री करने का जो लक्ष्य प्रतिमाह होता है, उससे ज्यादा देसी शराब लोग गटक रहे हैं।
घटना के बाद विंडीज शराब की बिक्री और आपूर्ति पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है और चेक कराया जा रहा है कि गोदामों में विंडीज ब्रांड की देसी शराब की कितनी उपलब्धता है।
खास बात ये है कि रेडिको खतान, रामपुर की कंपनी विंडीज ब्रांड की देसी शराब बनाती है। इस कंपनी की ओर से बनाई गई शराब सिर्फ रायबरेली ही नहीं, बल्कि प्रदेश के सभी जिलों में आपूर्ति होती है।
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आबकारी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में देसी शराब की 306 दुकानें हैं। इन दुकानों में प्रति माह चार लाख 47 हजार 732 लीटर देसी शराब बिक्री करने का लक्ष्य होता है।
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इस लक्ष्य के सापेक्ष इन दुकानों से प्रति माह छह लाख 10 हजार 804 लीटर देसी शराब की बिक्री की जा रही है। इन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि विंडीज ब्रांड की देसी शराब की डिमांड कितनी है। ऐेसे में देसी शराब की बिक्री को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं।
देसी शराब को रखने के लिए जिले में पांच गोदाम हैं। इसमें दो गोदाम जिला आबकारी कार्यालय में हैं, जबकि तीन गोदाम कार्यालय के बाहर हैैं।
दस लोगों की मौत के बाद गोदामों से विंडीज ब्रांड की देसी शराब की आपूर्ति दुकानों पर किए जाने को लेकर रोक लगा दी गई है। गोदामों में चेक कराया जा रहा है कि स्टॉक की कितनी उपलब्धता है।
चेकिंग के नाम पर न स्टाफ और न ही संसाधन
महराजगंज शराब कांड के बाद आबकारी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी कठघरे में हैं। जिस तरह देसी शराब की बिक्री बढ़ रही है, उस हिसाब से चेकिंग आदि के लिए विभाग के पास न तो स्टाफ और न ही संसाधन है।
जिले में महराजगंज, लालगंज, ऊंचाहार, डलमऊ, सदर, सलोन सर्किल हैं, जहां पर शराब की बिक्री पर रोक लगाने के लिए आबकारी निरीक्षक की तैनाती है। इन सभी के कार्यों की मॉनिटरिंग के लिए जिला आबकारी अधिकारी की तैनाती है। वहीं हर तहसील में महज 17 सिपाही तैनात हैं। चेकिंग के लिए दो गाड़ियां हैं।
एक गाड़ी जिला अधिकारी के पास रहती है, जबकि एक गाड़ी संविदा पर है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले में प्रति माह देसी, अंग्रेजी, बियर आदि की करोड़ों की बिक्री होती है, लेकिन स्टाफ और संसाधन की कमी है। यह भी शराब माफिया पर कार्रवाई ना होना बड़ा सवाल खड़े करती है।
कार्रवाई, फिर भी धधक रही शराब की भट्ठियां
आबकारी विभाग के आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल 2021 से जनवरी तक छापामारी करके 40 हजार लीटर शराब बरामद की गई। वहीं 1500 धंधेबाजों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया। इसके बावजूद जिले में शहर से लेकर देहात क्षेत्रों में अवैध शराब की भट्टियां धधक रही हैं। खासकर गुरुबख्शगंज, लालगंज, सरेनी और शहर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध शराब बनाई जा रही है। आबकारी विभाग और थानेदारों की मिलीभगत से यह खेल चल रहा है। सख्त कार्रवाई न होने के कारण धंधेबाजों के हौसले बुलंद हैं।