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भुगतान की अड़ंगेबाजी से भी मुंह मोड़ रहे अस्पताल
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रायबरेली। आयुष्मान योजना में मरीजों का इलाज करने वाले अस्पतालों को भुगतान मिलने में लंबा वक्त लग रहा है। कुछ न कुछ कमियां निकाल कर फाइलें लौटा दी जाती हैं। ऐसे में अस्पताल संचालकों को भुगतान कराने के लिए अतिरिक्त कर्मचारी लगाने पड़ रहे हैं। इस वजह से भी वे मरीजों का इलाज करने से मुंह मोड़ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग भी इसमें सुधार लाने का प्रयास नहीं कर रहा है। इसका खामियाजा गरीबों को ही भोगना पड़ रहा है। जिले में चार सरकारी और मात्र सात निजी अस्पताल आयुष्मान योजना में पंजीकृत हैं। इन अस्पतालों ने अभी तक 1103 मरीजों का इलाज किया है। इसमें से अब तक 671 केस में ही भुगतान किया गया है। इलाज होेने के बाद भी अब तक 432 मामलों में अस्पतालों को भुगतान नहीं दिया गया है।
जिले के दो लाख से अधिक गरीबों को आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा देने के लिए चिह्नित किया गया है। लाभार्थियों को प्लास्टिक कार्ड दे दिया गया है, लेकिन अब गोल्डन कार्ड वाले गरीबों को ही योजना के तहत इलाज कराने की सुविधा दी जा रही है। जिले में 60 हजार गरीबों को ही अब तक गोल्डन कार्ड जारी किए जा सके हैं।
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आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से जिले के चार सरकारी और सात निजी अस्पतालों को लाभार्थियों को इलाज की सुविधा मुहैया कराने के लिए संबद्ध किया गया है। जिले के सिटी नर्सिंगहोम, सरयूदेवी हॉस्पिटल, जेएन हॉस्पिटल, रिलीफ आर्थोपेडिक सेंटर आदि को शामिल किया गया है। अब तक जिले में 1103 गरीबों को योजना के तहत मुफ्त इलाज का लाभ मिल चुका है।
इसमें अस्पतालों ने 1016 केस में भुगतान के लिए डिमांड भी कर दी है, लेकिन अब तक 671 केस में ही भुगतान किया गया है। इलाज देने के बाद भी अब तक 432 मामलों में अस्पतालों को भुगतान नहीं दिया गया है। आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीबों को इलाज का लाभ देेने के बाद अस्पतालों को भुगतान के लिए ऑनलाइन डिमांड करनी पड़ती है।
कई बार आवेदन में खामियां होने के कारण भुगतान समय से नहीं मिल पाता है, लेकिन सत्यापन होने के बाद ही भुगतान दिया जाता है। कमियां मिलने पर उसे सुधारने का मौका अस्पतालों को दिया जाता है। आवेदन पूरी तरह से कंप्लीट होने के बाद ही भुगतान होता है। हालांकि कई मामलों में प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही शासन स्तर से अब तक भुगतान अस्पतालों को नहीं दिया गया है।
आयुष्मान भारत योजना के तहत जिले में 1103 गरीबों को योजना के तहत मुफ्त इलाज का लाभ मिल चुका है। इसमें अस्पतालों ने 1016 केस में भुगतान के लिए डिमांड की है। इसमें से 671 केस में ही भुगतान किया गया है। सत्यापन के बाद जल्द ही अन्य केस में भी भुगतान हो जाएगा।- डॉ. नागेंद्र प्रसाद, एसीएमओ/ नोडल अधिकारी आयुष्मान भारत
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स्वास्थ्य विभाग भी इसमें सुधार लाने का प्रयास नहीं कर रहा है। इसका खामियाजा गरीबों को ही भोगना पड़ रहा है। जिले में चार सरकारी और मात्र सात निजी अस्पताल आयुष्मान योजना में पंजीकृत हैं। इन अस्पतालों ने अभी तक 1103 मरीजों का इलाज किया है। इसमें से अब तक 671 केस में ही भुगतान किया गया है। इलाज होेने के बाद भी अब तक 432 मामलों में अस्पतालों को भुगतान नहीं दिया गया है।
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जिले के दो लाख से अधिक गरीबों को आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा देने के लिए चिह्नित किया गया है। लाभार्थियों को प्लास्टिक कार्ड दे दिया गया है, लेकिन अब गोल्डन कार्ड वाले गरीबों को ही योजना के तहत इलाज कराने की सुविधा दी जा रही है। जिले में 60 हजार गरीबों को ही अब तक गोल्डन कार्ड जारी किए जा सके हैं।
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आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से जिले के चार सरकारी और सात निजी अस्पतालों को लाभार्थियों को इलाज की सुविधा मुहैया कराने के लिए संबद्ध किया गया है। जिले के सिटी नर्सिंगहोम, सरयूदेवी हॉस्पिटल, जेएन हॉस्पिटल, रिलीफ आर्थोपेडिक सेंटर आदि को शामिल किया गया है। अब तक जिले में 1103 गरीबों को योजना के तहत मुफ्त इलाज का लाभ मिल चुका है।
इसमें अस्पतालों ने 1016 केस में भुगतान के लिए डिमांड भी कर दी है, लेकिन अब तक 671 केस में ही भुगतान किया गया है। इलाज देने के बाद भी अब तक 432 मामलों में अस्पतालों को भुगतान नहीं दिया गया है। आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीबों को इलाज का लाभ देेने के बाद अस्पतालों को भुगतान के लिए ऑनलाइन डिमांड करनी पड़ती है।
कई बार आवेदन में खामियां होने के कारण भुगतान समय से नहीं मिल पाता है, लेकिन सत्यापन होने के बाद ही भुगतान दिया जाता है। कमियां मिलने पर उसे सुधारने का मौका अस्पतालों को दिया जाता है। आवेदन पूरी तरह से कंप्लीट होने के बाद ही भुगतान होता है। हालांकि कई मामलों में प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही शासन स्तर से अब तक भुगतान अस्पतालों को नहीं दिया गया है।
आयुष्मान भारत योजना के तहत जिले में 1103 गरीबों को योजना के तहत मुफ्त इलाज का लाभ मिल चुका है। इसमें अस्पतालों ने 1016 केस में भुगतान के लिए डिमांड की है। इसमें से 671 केस में ही भुगतान किया गया है। सत्यापन के बाद जल्द ही अन्य केस में भी भुगतान हो जाएगा।- डॉ. नागेंद्र प्रसाद, एसीएमओ/ नोडल अधिकारी आयुष्मान भारत