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बेड फुल, इमरजेंसी में तड़पते रहे मरीज, हंगामा

Wed, 17 Aug 2022 11:54 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 17 Aug 2022 11:54 PM IST
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ग्लूकोज की बोतल थामे बेटा पिता के लिए खोजता रहा बेड
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डलमऊ सीएचसी से रेफर होकर बुधवार सुबह 10 बजे आए बांके का पुरवा निवासी भगवानदीन दर्द से कराह रहे थे। बेटा रामचंद्र एक हाथ में ग्लूकोज की बोतल और दूसरे हाथ से पिता को सहारा देकर वार्ड-दर वार्ड बेड ढूंढता रहा। करीब 12.30 बजे बेड मिला तो भगवानदीन का इलाज शुरू हो सका। इस दौरान पिता-पुत्र को अस्पताल में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
सवा दो घंटे इमरजेंसी में दीवार के सहारे बैठा रहा मरीज
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में सुबह 10.35 बजे अमावां सीएचसी से रेफर होकर आए भगवंतदीन को सवा घंटे तक बेड के लिए इंतजार करना पड़ा। हालांकि मरीज 10 बजे ही इमरजेंसी आ गया था, लेकिन बेड खाली न होने के कारण उसे दीवार के सहारे ही समय बिताना पड़ा। बेड मिलने के बाद उसका इलाज शुरू हो सका। उसकी समस्या को सुनने के लिए अस्पताल को कोई भी नजर नहीं आ रहा था। एक अन्य मरीज भी स्ट्रेचर के सहारे बेड के लिए इधर-उधर भटकता रहा।
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बेड के लिए हंगामा किया, बाद में वापस लौट गई मरीज
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में सुबह 11 बजे खूब हंगामा हुआ। शहर निवासी सुनीता का इलाज कराने के लिए घर के लोग इमरजेंसी में पहुंचे। बेड न मिलने के कारण मरीज का इलाज शुरू नहीं हो सका। सिर्फ इमरजेंसी इलाज ही किया गया। मरीज की बेटी ने इस लापरवाही पर हंगामा भी किया, लेकिन किसी ने उसकी समस्या को नहीं सुना। थक हारकर परिजन मरीज को निजी अस्पताल लेकर चले गए। हंगामे के दौरान इमरजेंसी में अफरातफरी का माहौल रहा।
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बेड के इंतजार में इमरजेंसी में स्ट्रेचर पर पड़े रहे मरीज
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में सुबह 11.20 बजे इमरजेंसी के दोनों बेड फुल मिले। दो मरीज स्ट्रेचर पर लेटे थे। फॉलिश अटैक के बाद जतुआ-टप्पा सीएचसी से रेफर होकर आए बृजलाल को भी कई घंटे इमरजेंसी में स्ट्रेचर पर बिताने पड़े। तीमारदार इधर-उधर घूमकर बेड का पता लगाते रहे, लेकिन निराशा ही हाथ लगी। काफी देर बाद बेड मिलने के बाद मरीज का इलाज शुरू हो सका। इमरजेंसी में तमाम मरीज कुर्सियों पर बैठकर बेडों का इंतजार करते रहे।
रायबरेली। संक्रामक रोगों से निपटने के लिए हमेशा तैयार रहने का दंभ भरने वाले जिला अस्पताल की बुधवार को पोल खुल गई। अस्पताल के सभी 300 बेडों के फुल होने के बाद बुधवार को रेफर होकर आए मरीजों को इमरजेंसी में घंटों इंतजार करना पड़ा। बेड न मिलने के कारण कोई मरीज इमरजेंसी गेट के बाहर पड़ा रहा तो कोई इमरजेंसी कक्ष में ही स्ट्रेचर पर अपनी बारी का इंतजार कर रहा था।
ऐसे में कई मरीजों ने इमरजेंसी में हंगामा भी किया, लेकिन उनकी समस्या को सुनने वाला कोई नहीं था। इमरजेंसी में दिनभर अफरातफरी का माहौल रहा। मरीजों की संख्या बढ़ने पर स्ट्रेचर का भी इंतजाम नहीं दिखा। कई तीमारदार अपने मरीज को गोद में उठाकर डॉक्टर के पास तक ले गए। मरीजों की समस्याओं को लेकर अस्पताल प्रशासन तनिक भी संजीदा नजर नहीं आया।

वर्तमान समय में मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। 30 बेड अतिरिक्त रखवाए गए हैं। अधिक मरीजों के आने से कुछ दिक्कतें जरूर हो रही हैं। स्वस्थ हुए मरीजों को डिस्चार्ज करके नए मरीजों को भर्ती कराया जा रहा है।
डॉ. महेंद्र मौर्या, सीएमएस, जिला अस्पताल
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