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देश को एक सूत्र में बांधने का माध्यम है हिंदी
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रायबरेली। महराजगंज ब्लॉक क्षेत्र के दानेश्वरमंदिर में हिंदी दिवस सप्ताह के उपलक्ष्य में कवि सम्मेलन एवं कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने हिंदी और समसामयिक विषयों पर कविताएं पढ़ी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सेवानिवृत्त शिक्षक एवं कवि समर बहादुर सिंह ने हिंदी को भारत की आत्मा कहते हुए कहा कि सारे देश में हिंदी ही एक ऐसी भाषा है, जो हर मामले में समृद्ध है। हिंदी देश को एक सूत्र में बांधने का माध्यम है।
युवा कवि कुमार मयंक मिश्रा लालगंज ने गोष्ठी की शुरुआत करते हुए हिंदी पर यह लाइनें पढ़ी-हिंदी से ही हमारी यह पहचान है, मातृभाषा है हिंदी अमर गान है। जायसी, तुलसी, मीरा की सुरतान है हिंदी ही राष्ट्रभाषा का सम्मान है। दुर्गेश प्रेमी ने पढ़ा-उत्सव हिंदी दिवस है संकल्पों का त्यौहार, पहचान हिंदी की हिंदी सरल सरस का सार।
आरकेपी ने कहा- अन्याय की सरहद पर अवरोध जरूरी है, जहां बिगड़े अनुशासन वहां क्रोधी जरूरी है। कवि श्री राम अंजान ने पढ़ा- अपनी सारी सृष्टि की आधार है बिटिया, भैया तुम का काहे लागै भार बिटिया। सूरज ने कहा वक्त के मरहम से जख्म भर रहे हैं, हम जीने की चाह में रोज रोज मर रहे हैं।
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जमुना प्रसाद, आदित्य मौर्य कमलाकर, मधुरेश प्रताप सिंह, केसर बख्श सिंह, मनोज सिंह, डॉ. केके जायसवाल ने कविता पाठ किया। इससे पहले आयोजक कमलाकर, विक्रमादित्य ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
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युवा कवि कुमार मयंक मिश्रा लालगंज ने गोष्ठी की शुरुआत करते हुए हिंदी पर यह लाइनें पढ़ी-हिंदी से ही हमारी यह पहचान है, मातृभाषा है हिंदी अमर गान है। जायसी, तुलसी, मीरा की सुरतान है हिंदी ही राष्ट्रभाषा का सम्मान है। दुर्गेश प्रेमी ने पढ़ा-उत्सव हिंदी दिवस है संकल्पों का त्यौहार, पहचान हिंदी की हिंदी सरल सरस का सार।
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आरकेपी ने कहा- अन्याय की सरहद पर अवरोध जरूरी है, जहां बिगड़े अनुशासन वहां क्रोधी जरूरी है। कवि श्री राम अंजान ने पढ़ा- अपनी सारी सृष्टि की आधार है बिटिया, भैया तुम का काहे लागै भार बिटिया। सूरज ने कहा वक्त के मरहम से जख्म भर रहे हैं, हम जीने की चाह में रोज रोज मर रहे हैं।
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जमुना प्रसाद, आदित्य मौर्य कमलाकर, मधुरेश प्रताप सिंह, केसर बख्श सिंह, मनोज सिंह, डॉ. केके जायसवाल ने कविता पाठ किया। इससे पहले आयोजक कमलाकर, विक्रमादित्य ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।