{"_id":"6088354c8ebc3e8d2e1b6ede","slug":"health-raibaraily-news-lko575923551","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिटी मजिस्ट्रेट समेत 14 की हालत नाजुक, एम्स के एल-3 में कराए गए भर्ती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिटी मजिस्ट्रेट समेत 14 की हालत नाजुक, एम्स के एल-3 में कराए गए भर्ती
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रायबरेली। कोरोना संक्रमित सिटी मजिस्ट्रेट युगराज सिंह समेत 14 मरीजों की हालत मंगलवार को गंभीर हो गई। गंभीर मरीजों को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के एल-3 अस्पताल में भर्ती कराया गया।
हालांकि एल-2 से रेफर होकर आए एक बैंककर्मी को एल-3 में भर्ती नहीं किया गया। बैंककर्मी का ऑक्सीजन लेवल 45 तक गिर जाने के बाद भी भर्ती न किए जाने पर परिवारीजन उसे घर लेकर चले गए। उधर, रेलकोच के एल-2 अस्पताल में मरीजों की संख्या 200 के पार हो गई है।
एम्स के रजिस्ट्रार व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी समीर शुक्ला ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमितों की संख्या में वृद्धि को देखते हुए एम्स में 50 बेड का एल-3 अस्पताल खोला गया है। सोमवार को निदेशक प्रो. अरविंद राजवंशी ने अस्पताल को शुरू कराया था।
विज्ञापन
मंगलवार सुबह होम आइसोलेशन में गए सिटी मजिस्ट्रेट को हालत गंभीर होने पर एम्स में भर्ती कराया गया। वे एम्स में भर्ती होने वाले पहले मरीज हैं। शाम छह बजे तक एम्स के एल-3 अस्पताल में 14 मरीजों को भर्ती कराया गया है। सभी का बेहतर इलाज किया जा रहा है।
पुरानी ओपीडी में स्क्रीनिंग के बाद ही मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। उधर, एल-2 में भर्ती एक बैंककर्मी को हालत गंभीर होने पर एम्स रेफर किया गया, लेकिन एम्स में मरीज का ऑक्सीजन लेवल 45 होने के कारण भर्ती नहीं किया गया। परिवारीजन मरीज को लेकर घर चले गए।
डीएसटीओ को सीडीओ ने एल-3 भेजा, रातभर भटके
जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी अरविंद वर्मा को सोमवार रात साढ़े 11 बजे एम्स में भर्ती होने के लिए भेज दिया गया। सीडीओ अभिषेक गोयल के आदेश पर कंट्रोल रूम के माध्यम से अफसर को एम्स पहुंचाने के बाद एंबुलेंस लौट आई। रेफर का कागज व अन्य डाकूमेंट न होने के कारण अधिकारी को रात में परेशान होना पड़ा। हालांकि उसे एम्स में भर्ती नहीं किया गया।
मरीज ने बताया कि उसे सांस लेने में समस्या हो रही है, लेकिन एंबुलेंस उसे एम्स के गेट पर छोड़कर चली गई है। यहां भर्ती नहीं किया गया। यहां तक कि सीएमओ तक को इसकी जानकारी नहीं थी। सीएमओ डॉ. बीरेंद्र सिंह का कहना है कि डीएसटीओ को होम आइसोलेशन से कैसे एम्स के एल-3 अस्पताल में भर्ती होने के लिए भेजा गया है, उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। बताते हैं कि अब डीएसटीओ अपने ही घर में फिर से आइसोलेट हैं।
अनिभिज्ञ सीडीओ बोले-पॉजिटिव नहीं थे डीएसटीओ
सीडीओ अभिषेक गोयल ने डीएसटीओ अरविंद वर्मा को सामान्य लक्षण होने पर रात में कंट्रोल रूम के माध्यम से एल-3 अस्पताल तो भेजवा दिया, लेकिन उन्हें यह अनभिज्ञता थी कि बिना जिला अस्पताल या एल-2 के रेफर हुए मरीज को एल-3 में भर्ती नहीं किया जा सकता है। सीडीओ का कहना है कि डीएसटीओ पॉजिटिव नहीं थे। उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है। लक्षण होने के कारण उन्हें इलाज के लिए भेजा गया था।
विज्ञापन
हालांकि एल-2 से रेफर होकर आए एक बैंककर्मी को एल-3 में भर्ती नहीं किया गया। बैंककर्मी का ऑक्सीजन लेवल 45 तक गिर जाने के बाद भी भर्ती न किए जाने पर परिवारीजन उसे घर लेकर चले गए। उधर, रेलकोच के एल-2 अस्पताल में मरीजों की संख्या 200 के पार हो गई है।
विज्ञापन
एम्स के रजिस्ट्रार व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी समीर शुक्ला ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमितों की संख्या में वृद्धि को देखते हुए एम्स में 50 बेड का एल-3 अस्पताल खोला गया है। सोमवार को निदेशक प्रो. अरविंद राजवंशी ने अस्पताल को शुरू कराया था।
विज्ञापन
मंगलवार सुबह होम आइसोलेशन में गए सिटी मजिस्ट्रेट को हालत गंभीर होने पर एम्स में भर्ती कराया गया। वे एम्स में भर्ती होने वाले पहले मरीज हैं। शाम छह बजे तक एम्स के एल-3 अस्पताल में 14 मरीजों को भर्ती कराया गया है। सभी का बेहतर इलाज किया जा रहा है।
पुरानी ओपीडी में स्क्रीनिंग के बाद ही मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। उधर, एल-2 में भर्ती एक बैंककर्मी को हालत गंभीर होने पर एम्स रेफर किया गया, लेकिन एम्स में मरीज का ऑक्सीजन लेवल 45 होने के कारण भर्ती नहीं किया गया। परिवारीजन मरीज को लेकर घर चले गए।
डीएसटीओ को सीडीओ ने एल-3 भेजा, रातभर भटके
जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी अरविंद वर्मा को सोमवार रात साढ़े 11 बजे एम्स में भर्ती होने के लिए भेज दिया गया। सीडीओ अभिषेक गोयल के आदेश पर कंट्रोल रूम के माध्यम से अफसर को एम्स पहुंचाने के बाद एंबुलेंस लौट आई। रेफर का कागज व अन्य डाकूमेंट न होने के कारण अधिकारी को रात में परेशान होना पड़ा। हालांकि उसे एम्स में भर्ती नहीं किया गया।
मरीज ने बताया कि उसे सांस लेने में समस्या हो रही है, लेकिन एंबुलेंस उसे एम्स के गेट पर छोड़कर चली गई है। यहां भर्ती नहीं किया गया। यहां तक कि सीएमओ तक को इसकी जानकारी नहीं थी। सीएमओ डॉ. बीरेंद्र सिंह का कहना है कि डीएसटीओ को होम आइसोलेशन से कैसे एम्स के एल-3 अस्पताल में भर्ती होने के लिए भेजा गया है, उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। बताते हैं कि अब डीएसटीओ अपने ही घर में फिर से आइसोलेट हैं।
अनिभिज्ञ सीडीओ बोले-पॉजिटिव नहीं थे डीएसटीओ
सीडीओ अभिषेक गोयल ने डीएसटीओ अरविंद वर्मा को सामान्य लक्षण होने पर रात में कंट्रोल रूम के माध्यम से एल-3 अस्पताल तो भेजवा दिया, लेकिन उन्हें यह अनभिज्ञता थी कि बिना जिला अस्पताल या एल-2 के रेफर हुए मरीज को एल-3 में भर्ती नहीं किया जा सकता है। सीडीओ का कहना है कि डीएसटीओ पॉजिटिव नहीं थे। उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है। लक्षण होने के कारण उन्हें इलाज के लिए भेजा गया था।