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Raebareli News: यूरिया से बना रहे थे गोंद, दो कंपनियों पर एफआईआर
Thu, 27 Nov 2025 12:39 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Thu, 27 Nov 2025 12:39 AM IST
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रायबरेली। एक और प्लाईवुड फैक्टरी और कंपनी के प्रोपराइटर के खिलाफ मंगलवार रात आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मिल एरिया थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। फैक्टरी में किसानों को मिलने वाली अनुदानित यूरिया से गोंद बनाने का खुलासा हुआ है। इससे पहले सोमवार रात को भी एक अन्य प्लाईवुड फैक्टरी और यूरिया की आपूर्ति करने वाली राजस्थान की फर्म पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
जिला कृषि अधिकारी अखिलेश पांडेय के मुताबिक बीते अगस्त में मेसर्स एपेक्स प्लाईवुड इंडस्ट्रीज कासिमपुर बघेल से खाद का नमूना लेकर जांच के लिए फोरेंसिक लैब वाराणसी भेजा गया था। जांच में यूरिया में नीम ऑयल कंटेंट पाया गया था। इससे खुलासा हुआ कि गोंद बनाने के लिए फैक्टरी में अनुदानित यूरिया का प्रयोग किया जा रहा था। टेक्निकल ग्रेड यूरिया में नीम ऑयल कंटेंट नहीं पाया जाता है।
मिल एरिया थाना प्रभारी अनिल कुमार सिंह ने बताया कि जिला कृषि अधिकारी की तहरीर पर मेसर्स एपेक्स प्लाईवुड इंडस्ट्रीज कासिमपुर बघेल के प्रोपराइटर नाम अज्ञात और आपूर्तिकर्ता मेसर्स इकोलैब कैमैक्स के प्रोपराइटर श्रीमहिपाल सिंह शेखावत निवासी जयपुर राजस्थान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
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उधर, सदर कोतवाली में भी एक दिन पहले उपभोक्ता मेसर्स न्यू दुआ इंडस्ट्रीज और श्री महिपाल सिंह शेखावत प्रोप्राइटर आपूर्तिकर्ता मेसर्स इकोलैब कैमैक्स के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम आदि की धारा में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
सब्सिडी वाली यूरिया का कर रहे काॅमर्शियल प्रयोग
फैक्टरियों में कृषि योग्य यूरिया का प्रयोग रोकने के लिए सख्ती बरती जा रही है। इसके बावजूद प्लाईवुड फैक्टरियों में सब्सिडी वाली यूरिया का प्रयोग किया जा रहा है। कृषि विभाग का मानना है कि किसानों को दी जाने वाली यूरिया में केंद्र सरकार की ओर से सब्सिडी दी जाती है। सब्सिडी वाली यूरिया का काॅमर्शियल में प्रयोग नहीं किया जा सकता। सैंपल के फेल आने के बाद इस बात पर मोहर लग गई है कि टेक्नीकल ग्रेड की बोरी के अंदर कृषि योग्य यूरिया डालकर प्रयोग किया जा रहा है।
सब्सिडी वाली यूरिया की बोरी 267 रुपये में है, जबकि काॅमर्शियल रेट दो हजार रुपये से ज्यादा है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह लाभ पाने के लिए यह खेल चल रहा था। जिले में सब्सिडी वाली खाद का प्रयोग प्लाईवुड फैक्टरियों में होने से किसानों के सामने खाद संकट आने की बात कही जा रही है।
ऐसे बनता है गोंद
मेलामाइन गोंद यूरिया से निकले मेलामाइन और फॉर्मेल्डिहाइड के मिश्रण से बनता है। इस गोंद का उपयोग प्लाईवुड बनाने में भी किया जाता है, लेकिन अधिकांश उपभोक्ता इसे सजावटी कार्यों में पसंद करते हैं। प्लाईवुड, एमडीएफ और पॉर्टिकलबोर्ड लकड़ी के लिए भी मेलामाइन गोंद का उपयोग किया जाता हैं। मालामाल होने के लिए फैक्टरी के मालिक सब्सिडी वाली यूरिया का प्रयोग गोंद बनाने में कर रहे हैं।
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जिला कृषि अधिकारी अखिलेश पांडेय के मुताबिक बीते अगस्त में मेसर्स एपेक्स प्लाईवुड इंडस्ट्रीज कासिमपुर बघेल से खाद का नमूना लेकर जांच के लिए फोरेंसिक लैब वाराणसी भेजा गया था। जांच में यूरिया में नीम ऑयल कंटेंट पाया गया था। इससे खुलासा हुआ कि गोंद बनाने के लिए फैक्टरी में अनुदानित यूरिया का प्रयोग किया जा रहा था। टेक्निकल ग्रेड यूरिया में नीम ऑयल कंटेंट नहीं पाया जाता है।
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मिल एरिया थाना प्रभारी अनिल कुमार सिंह ने बताया कि जिला कृषि अधिकारी की तहरीर पर मेसर्स एपेक्स प्लाईवुड इंडस्ट्रीज कासिमपुर बघेल के प्रोपराइटर नाम अज्ञात और आपूर्तिकर्ता मेसर्स इकोलैब कैमैक्स के प्रोपराइटर श्रीमहिपाल सिंह शेखावत निवासी जयपुर राजस्थान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
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उधर, सदर कोतवाली में भी एक दिन पहले उपभोक्ता मेसर्स न्यू दुआ इंडस्ट्रीज और श्री महिपाल सिंह शेखावत प्रोप्राइटर आपूर्तिकर्ता मेसर्स इकोलैब कैमैक्स के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम आदि की धारा में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
सब्सिडी वाली यूरिया का कर रहे काॅमर्शियल प्रयोग
फैक्टरियों में कृषि योग्य यूरिया का प्रयोग रोकने के लिए सख्ती बरती जा रही है। इसके बावजूद प्लाईवुड फैक्टरियों में सब्सिडी वाली यूरिया का प्रयोग किया जा रहा है। कृषि विभाग का मानना है कि किसानों को दी जाने वाली यूरिया में केंद्र सरकार की ओर से सब्सिडी दी जाती है। सब्सिडी वाली यूरिया का काॅमर्शियल में प्रयोग नहीं किया जा सकता। सैंपल के फेल आने के बाद इस बात पर मोहर लग गई है कि टेक्नीकल ग्रेड की बोरी के अंदर कृषि योग्य यूरिया डालकर प्रयोग किया जा रहा है।
सब्सिडी वाली यूरिया की बोरी 267 रुपये में है, जबकि काॅमर्शियल रेट दो हजार रुपये से ज्यादा है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह लाभ पाने के लिए यह खेल चल रहा था। जिले में सब्सिडी वाली खाद का प्रयोग प्लाईवुड फैक्टरियों में होने से किसानों के सामने खाद संकट आने की बात कही जा रही है।
ऐसे बनता है गोंद
मेलामाइन गोंद यूरिया से निकले मेलामाइन और फॉर्मेल्डिहाइड के मिश्रण से बनता है। इस गोंद का उपयोग प्लाईवुड बनाने में भी किया जाता है, लेकिन अधिकांश उपभोक्ता इसे सजावटी कार्यों में पसंद करते हैं। प्लाईवुड, एमडीएफ और पॉर्टिकलबोर्ड लकड़ी के लिए भी मेलामाइन गोंद का उपयोग किया जाता हैं। मालामाल होने के लिए फैक्टरी के मालिक सब्सिडी वाली यूरिया का प्रयोग गोंद बनाने में कर रहे हैं।