{"_id":"612fbb528ebc3e2f785007e6","slug":"government-land-matter-opened-in-the-investigation-raibaraily-news-lko5936330187","type":"story","status":"publish","title_hn":"डेढ़ करोड़ की सरकारी जमीन का करा दिया बैनामा, बन गए आशियाने, जांच में खुला मामला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डेढ़ करोड़ की सरकारी जमीन का करा दिया बैनामा, बन गए आशियाने, जांच में खुला मामला
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रायबरेली। बांदा हाईवे के पास नेताजी सुभाष नगर में डेढ़ करोड़ रुपये की सरकारी जमीन का बैनामा करा दिया गया। जमीन पर आशियाने भी बना लिए गए। शिकायत पर एसडीएम सदर ने लेखपाल से जांच कराई तो फर्जीवाड़े का खेल उजागर हुआ।
बताते हैं कि एक प्रापर्टी डीलर ने पहले जमीन पर प्लाटिंग की थी और फिर तत्कालीन राजस्व कानूनगो और लेखपाल से मिलीभगत करके जमीन का बैनामा करा दिया। मामला उजागर होने के बाद सभी के नाम खारिज कर दस्तावेजों में दोबारा जमीन परती के रूप में दर्ज कर दी गई है।
सदर तहसील क्षेत्र में शहर से सटे चकबहादुरपुर के सुभाष नगर मोहल्ले में करीब तीन बीघा जमीन है। इसमें से करीब 12 बिस्वा जमीन एक प्रापर्टी डीलर ने अपनी बताकर बैनामा करा दिया। दो लोगों ने इस जमीन पर मकान भी बनवा लिया।
विज्ञापन
मोहल्ले के ही सुभाष मिश्रा ने इसकी शिकायत डीएम के साथ ही एसडीएम सदर से की। एसडीएम सदर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए लेखपाल चंद्रकुमार दीक्षित से प्रकरण की जांच कराई तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ।
जांच में पता चला कि तत्कालीन राजस्व कानूनगो और लेखपाल ने प्रापर्टी डीलर के जरिए जमीन बेचकर लोगों के नाम बैनामा करा दिया। जिस जमीन की बिक्री करके बैनामा कराया गया, उस जमीन की कीमत डेढ़ करोड़ रुपये के आसपास है।
लेखपाल का कहना है कि जिन लोगों के नाम बैनामा कराया गया था, उनके सभी नाम खारिज करके जमीन को परती के रूप में दर्ज कर दिया गया है। जिन लोगों ने मकान बनवा लिए हैं, उनको नोटिस जारी किया गया है।
राजस्व कर्मियों के खिलाफ हो सकती है कार्रवाई
सरकारी जमीन में फर्जीवाड़े के मामले में एसडीएम सदर ने तत्कालीन राजस्व कानूनगो व लेखपाल के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखापढ़ी की है। लेखपाल के मुताबिक जिस समय जमीन का फर्जीवाड़ा किया गया, उस समय गंगा सागर कानूनगो और सांवलराम मीना लेखपाल थे। इन दोनों के खिलाफ जल्द मुकदमा दर्ज हो सकता है।
जांच में सरकारी जमीन का बैनामा कराने की बात सामने आई थी। जिन लोगों ने सरकारी जमीन का बैनामा कराया था, उन सभी के नाम खारिज कर दिए गए हैं। तत्कालीन राजस्व कानूनगो व लेखपाल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए लिखापढ़ी की गई है। शहर क्षेत्र में सरकारी जमीनों पर किसी तरह का कोई कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। सभी लेखपालों को हिदायत दी गई है कि वह अपने क्षेत्र की सरकारी जमीनों पर नजर रखें। कब्जा किसी कीमत पर नहीं होने पाए।
अंशिका दीक्षित, एसडीएम सदर
विज्ञापन
बताते हैं कि एक प्रापर्टी डीलर ने पहले जमीन पर प्लाटिंग की थी और फिर तत्कालीन राजस्व कानूनगो और लेखपाल से मिलीभगत करके जमीन का बैनामा करा दिया। मामला उजागर होने के बाद सभी के नाम खारिज कर दस्तावेजों में दोबारा जमीन परती के रूप में दर्ज कर दी गई है।
विज्ञापन
सदर तहसील क्षेत्र में शहर से सटे चकबहादुरपुर के सुभाष नगर मोहल्ले में करीब तीन बीघा जमीन है। इसमें से करीब 12 बिस्वा जमीन एक प्रापर्टी डीलर ने अपनी बताकर बैनामा करा दिया। दो लोगों ने इस जमीन पर मकान भी बनवा लिया।
विज्ञापन
मोहल्ले के ही सुभाष मिश्रा ने इसकी शिकायत डीएम के साथ ही एसडीएम सदर से की। एसडीएम सदर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए लेखपाल चंद्रकुमार दीक्षित से प्रकरण की जांच कराई तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ।
जांच में पता चला कि तत्कालीन राजस्व कानूनगो और लेखपाल ने प्रापर्टी डीलर के जरिए जमीन बेचकर लोगों के नाम बैनामा करा दिया। जिस जमीन की बिक्री करके बैनामा कराया गया, उस जमीन की कीमत डेढ़ करोड़ रुपये के आसपास है।
लेखपाल का कहना है कि जिन लोगों के नाम बैनामा कराया गया था, उनके सभी नाम खारिज करके जमीन को परती के रूप में दर्ज कर दिया गया है। जिन लोगों ने मकान बनवा लिए हैं, उनको नोटिस जारी किया गया है।
राजस्व कर्मियों के खिलाफ हो सकती है कार्रवाई
सरकारी जमीन में फर्जीवाड़े के मामले में एसडीएम सदर ने तत्कालीन राजस्व कानूनगो व लेखपाल के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखापढ़ी की है। लेखपाल के मुताबिक जिस समय जमीन का फर्जीवाड़ा किया गया, उस समय गंगा सागर कानूनगो और सांवलराम मीना लेखपाल थे। इन दोनों के खिलाफ जल्द मुकदमा दर्ज हो सकता है।
जांच में सरकारी जमीन का बैनामा कराने की बात सामने आई थी। जिन लोगों ने सरकारी जमीन का बैनामा कराया था, उन सभी के नाम खारिज कर दिए गए हैं। तत्कालीन राजस्व कानूनगो व लेखपाल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए लिखापढ़ी की गई है। शहर क्षेत्र में सरकारी जमीनों पर किसी तरह का कोई कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। सभी लेखपालों को हिदायत दी गई है कि वह अपने क्षेत्र की सरकारी जमीनों पर नजर रखें। कब्जा किसी कीमत पर नहीं होने पाए।
अंशिका दीक्षित, एसडीएम सदर