{"_id":"691a1f7a16b90ecd6702e5bc","slug":"final-report-rejected-fraudsters-in-panic-raebareli-news-c-101-1-slko1033-144989-2025-11-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Raebareli News: फाइनल रिपोर्ट खारिज, जालसाजों में खलबली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Raebareli News: फाइनल रिपोर्ट खारिज, जालसाजों में खलबली
Mon, 17 Nov 2025 12:31 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Mon, 17 Nov 2025 12:31 AM IST
विज्ञापन
रायबरेली। फर्जी अनुमति पत्र के सहारे अनुसूचित जाति की जमीन का बैनामा कराने के मामले में न्यायालय को पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं है। कोर्ट ने पुलिस की फाइनल रिपोर्ट खारिज कर, खुद मामले की जांच कराने व सुनवाई करने का निर्णय लिया है। इससे जालसाजों में खलबली मच गई है।
ऊंचाहार के पूरे गुलाब मजरे कंदरावां गांव निवासी महराजदीन ने 2008 में अपने हिस्से की जमीन नगर पंचायत के वार्ड नंबर आठ निवासी शबनम बेगम व वार्ड नंबर छह निवासी अलमदार हुसैन के नाम बैनामा किया था। जमीन का मालिक अनुसूचित जाति का होने के कारण जालसाजों ने एडीएम प्रशासन का फर्जी अनुमति पत्र लगाकर बैनामा कराने का आरोप लगा था। इसमें जमीन की सहखातेदार रामकली की तहरीर पर सीओ ने क्रेता अलमदार हुसैन के खिलाफ जालसाजी सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था।
पुलिस ने एडीएम कार्यालय से अनुमति पत्र के बारे में सूचना मांगी तो अनुमति पत्र रजिस्टर में दर्ज न होने की रिपोर्ट मिली। एडीएम के एक आशुलिपिक ने एडीएम प्रशासन कार्यालय की डाक बही में अनुमति पत्र को अंकित कर दिया और आरोपी को जनसूचना के माध्यम से सूचना दे दी थी, जिसके आधार पर विवेचक ने मामले में फाइनल रिपोर्ट लगाकर आरोपी को दोषमुक्त कर दिया था।
विज्ञापन
न्यायालय ने फाइनल रिपोर्ट को वापस कर दोबारा विवेचना का आदेश दिया था। विवेचना क्राइम ब्रांच से कराई गई तो क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर बृजेश कुमार सिंह ने भी 27 फरवरी 2025 को एफआर लगा दी थी। सुनवाई के बाद न्यायालय ने फाइनल रिपोर्ट खारिज कर दी। मामले को परिवाद में दर्ज कर सुनवाई शुरू कर दी है। इससे फर्जी अनुमति पत्र बनाने वाले जालसाजों का जेल जाना लगभग तय हो गया। सीओ गिरिजा शंकर त्रिपाठी ने बताया कि मामले की जानकारी नहीं है।
विज्ञापन
ऊंचाहार के पूरे गुलाब मजरे कंदरावां गांव निवासी महराजदीन ने 2008 में अपने हिस्से की जमीन नगर पंचायत के वार्ड नंबर आठ निवासी शबनम बेगम व वार्ड नंबर छह निवासी अलमदार हुसैन के नाम बैनामा किया था। जमीन का मालिक अनुसूचित जाति का होने के कारण जालसाजों ने एडीएम प्रशासन का फर्जी अनुमति पत्र लगाकर बैनामा कराने का आरोप लगा था। इसमें जमीन की सहखातेदार रामकली की तहरीर पर सीओ ने क्रेता अलमदार हुसैन के खिलाफ जालसाजी सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था।
विज्ञापन
पुलिस ने एडीएम कार्यालय से अनुमति पत्र के बारे में सूचना मांगी तो अनुमति पत्र रजिस्टर में दर्ज न होने की रिपोर्ट मिली। एडीएम के एक आशुलिपिक ने एडीएम प्रशासन कार्यालय की डाक बही में अनुमति पत्र को अंकित कर दिया और आरोपी को जनसूचना के माध्यम से सूचना दे दी थी, जिसके आधार पर विवेचक ने मामले में फाइनल रिपोर्ट लगाकर आरोपी को दोषमुक्त कर दिया था।
विज्ञापन
न्यायालय ने फाइनल रिपोर्ट को वापस कर दोबारा विवेचना का आदेश दिया था। विवेचना क्राइम ब्रांच से कराई गई तो क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर बृजेश कुमार सिंह ने भी 27 फरवरी 2025 को एफआर लगा दी थी। सुनवाई के बाद न्यायालय ने फाइनल रिपोर्ट खारिज कर दी। मामले को परिवाद में दर्ज कर सुनवाई शुरू कर दी है। इससे फर्जी अनुमति पत्र बनाने वाले जालसाजों का जेल जाना लगभग तय हो गया। सीओ गिरिजा शंकर त्रिपाठी ने बताया कि मामले की जानकारी नहीं है।