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मौसम की मार से टूटी किसानों की कमर, अब मुआवजे की आस

Fri, 22 Oct 2021 12:00 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 22 Oct 2021 12:00 AM IST
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Farmers' backs broken due to weather
रायबरेली। मौसम की मार ने धान और अन्य फसलों की अधिक पैदावार का सपना संजोए चार लाख किसानों की कमर तोड़ दी है। बारिश से जिले में करीब 40 फीसदी धान की फसल को नुकसान होने की आशंका है।
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मसूरी प्रजाति की धान की फसल को छोड़कर बाकी धान की प्रजाति वाली फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। वजह मंसूरी प्रजाति वाली धान की फसल देर से होती है।
इसके अलावा तोरिया-सरसों की फसल भी खराब हुई है। कुछ अगैती आलू की फसल को भी नुकसान हुआ है। अब किसान मुआवजे की आस लगाए बैठे हैं। वहीं अफसर दावा कर रहे हैं कि नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है।
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जिले में इस बार एक लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल पर धान की रोपाई गई थी। महराजगंज, हरचंदपुर, जगतपुर, ऊंचाहार ब्लॉक क्षेत्र में सबसे ज्यादा धान की पैदावार होती है।
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धान की फसल अच्छी थी, सोमवार रात तेज बारिश व हवा के कारण धान की फसल जमीन पर बिछ गई। बछरावां ब्लॉक क्षेत्र धान की फसल का गढ़ माना जाता है। बछरावां क्षेत्र से इस बार धान का निर्यात चालीस फीसदी कम होने के आसार हैं। बछरावां में पैदा होने वाला बादशाह पसंद धान अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस व इटली तक जाता है।
बारिश के कारण फसल बर्बाद हो गई। महंगाई की मार झेल रहे किसानों को आर्थिक क्षति हुई। सेंहगों, चुरुवा, नीमटीकर, सुदौली, राजामऊ, इचौली, समोधा, थुलेंडी, कन्नावां, बन्नावां, तिलेंडा, रानीखेड़ा, बहादुर नगर व खैरहनी सहित समूचे क्षेत्र की 80 फीसदी भूमि पर धान की खेती की पैदावार होती है।
बारिश के कारण इन गांवों में धान की फसल खराब हो गई है। जिन किसानों ने तोरिया-सरसों की फसल को बोआई कर दी थी, वह भी 20 फीसदी फसल खेतों में पानी भरने के कारण नष्ट हो गई। अब इन फसलों की बोआई किसानों को दोबारा करनी होगी।
अब यही चिंता कैसे निकलेगी लागत
बछरावां। सेंहगो पश्चिम गांव के किसान विनोद चौधरी ने बताया कि 16 बीघे में धान की फसल लगाई थी। तेज आंधी और बारिश के कारण 50 फीसदी से अधिक फसल का नुकसान हो गया है। पहले एक बीघे में करीब 10 से 12 क्विंटल बादशाह पसंद धान की पैदावार थी।
बारिश के बाद अब घटकर तीन क्विंटल प्रति बीघे की पैदावार होगी। लागत निकालना मुश्किल है। किसान अमरनाथ व मुन्नू ने बताया कि वह दो-दो बीघे के छोटे काश्तकार हैं। खेती से ही परिवार का भरण पोषण होता है। बेमौसम बारिश से चौपट फसल के कारण दो वक्त की रोटी का संकट हो गया।
मुकेश कुमार का कहना है कि इस बार फसल की पैदावार कम होगी। मदाखेड़ा गांव के किसान रणबहादुर सिंह उर्फ रन्नू सिंह ने बताया कि उन्होंने 30 बीघे में धान की फसल लगाई थी।
तेज आंधी व बेमौसम बारिश से पूरी फसल चौपट हो गई है। किसान का कहना है कि इस भारी बारिश से चौपट फसल के कारण हुई आर्थिक क्षति से उनको अपने बेटे की शादी टालनी पड़ेगी। मदाखेड़ा निवासी संदीप मिश्रा ने बताया कि उन्होंने तीन बीघे में धान की फसल लगाई थी। बेमौसम बारिश से फसल चौपट हो गई है।

जिले में राजस्व समेत कृषि विभाग की ओर से सर्वे कराया जा रहा है कि मौसम की वजह से कितना फसलों का नुकसान हुआ है। सर्वे कराने के बाद किसानों को मुआवजा दिलाया जाएगा। काफी किसानों ने फसलों का बीमा कराया है। उन किसानों को फसल नुकसान पर बीमे का लाभ भी दिलाया जाएगा।
- रविचंद्र प्रकाश, जिला कृषि अधिकारी
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