{"_id":"60f1ac658ebc3e9fde370fe5","slug":"election-raibaraily-news-lko5872176167","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहीं दिया चुनावी खर्च का हिसाब, 28 हजार प्रत्याशियों की जब्त होगी 2.23 करोड़ जमानत राशि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नहीं दिया चुनावी खर्च का हिसाब, 28 हजार प्रत्याशियों की जब्त होगी 2.23 करोड़ जमानत राशि
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रायबरेली। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भाग्य आजमाने वाले 28 हजार से अधिक प्रत्याशी जमानत राशि वापस लेना भूल गए हैं। अब तक एक भी प्रत्याशी ने चुनाव में खर्च का ब्योरा देकर जमानत राशि की डिमांड नहीं की है।
वर्ष 2015 में हुए पंचायत चुनाव के प्रत्याशियों ने भी अब तक जमानत राशि वापस नहीं ली है। तीन माह के अंदर खर्च का ब्योरा न देने पर करीब 2.23 करोड़ रुपये की जमानत राशि अपने आप ही जब्त हो जाएगी।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में इस बार प्रधान, बीडीसी, ग्राम पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव एक साथ कराए गए थे। 15 अप्रैल को मतदान के बाद दो मई को मतगणना कराई गई थी।
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खाली रह गए पदों को भरने के लिए जून के पहले सप्ताह में चुनाव कराया गया था। नियमानुसार नामांकन के दौरान जमा होने वाली जमानत राशि को वापस लेने के लिए प्रत्याशियों को तीन महीने का समय दिया जाता है।
तय सीमा के अंदर खर्च का ब्योरा देकर प्रत्याशी जमानत राशि को वापस किए जाने का अनुरोध कर सकता है, लेकिन जिले में अब तक एक भी प्रत्याशी ने खर्च का ब्योरों कोषागार को उपलब्ध नहीं कराया है।
हालांकि जिले में दो बार में हुए चुनाव में 28,870 प्रत्याशियों ने अपना भाग्य आजमाया। खास बात यह कि वर्ष 2015 में हुए पंचायत चुनाव के प्रत्याशियों ने भी कोषागार को खर्च का ब्योरा अब तक नहीं दिया है। इसी कारण उन प्रत्याशियों की जमानत राशि पहले ही जब्त हो चुकी है।
यह बजट चुनाव में खर्च कर सकते थे प्रत्याशी
पद खर्च की अधिकतम सीमा
जिला पंचायत सदस्य 1,50,000
क्षेत्र पंचायत सदस्य 75,000
ग्राम प्रधान 75,000
ग्राम पंचायत सदस्य 10,000
चुनाव आयोग से तय की गई जमानत राशि
प्रधान पद अनारक्षित 2,000
प्रधान आरक्षित पद 1,000
बीडीसी अनारक्षित 2,000
बीडीसी आरक्षित पद 1,000
पंचायत सदस्य अनारक्षित 500
पंचायत सदस्य आरक्षित 250
प्रत्याशियों ने की जमा हुई जमानत राशि
पद प्रत्याशी धनराशि (लाखों में लगभग)
प्रधान 6761 85.50
बीडीसी 5850 75.20
डीडीसी 750 18.00
पंचायत सदस्य 15,509 44.27
कुल 28,870 222.97
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भाग्य आजमाने वाले सभी प्रत्याशियों को तीन महीने के अंदर चुनाव में खर्च का ब्योरा देना है। खर्च का ब्योरा देने के बाद ही उनकी जमानत राशि को वापस किया जाएगा। वर्ष 2015 के चुनाव के प्रत्याशियों ने भी खर्च का ब्योरा नहीं दिया था।
जितेंद्र सिंह, वरिष्ठ कोषाधिकारी
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वर्ष 2015 में हुए पंचायत चुनाव के प्रत्याशियों ने भी अब तक जमानत राशि वापस नहीं ली है। तीन माह के अंदर खर्च का ब्योरा न देने पर करीब 2.23 करोड़ रुपये की जमानत राशि अपने आप ही जब्त हो जाएगी।
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में इस बार प्रधान, बीडीसी, ग्राम पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव एक साथ कराए गए थे। 15 अप्रैल को मतदान के बाद दो मई को मतगणना कराई गई थी।
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खाली रह गए पदों को भरने के लिए जून के पहले सप्ताह में चुनाव कराया गया था। नियमानुसार नामांकन के दौरान जमा होने वाली जमानत राशि को वापस लेने के लिए प्रत्याशियों को तीन महीने का समय दिया जाता है।
तय सीमा के अंदर खर्च का ब्योरा देकर प्रत्याशी जमानत राशि को वापस किए जाने का अनुरोध कर सकता है, लेकिन जिले में अब तक एक भी प्रत्याशी ने खर्च का ब्योरों कोषागार को उपलब्ध नहीं कराया है।
हालांकि जिले में दो बार में हुए चुनाव में 28,870 प्रत्याशियों ने अपना भाग्य आजमाया। खास बात यह कि वर्ष 2015 में हुए पंचायत चुनाव के प्रत्याशियों ने भी कोषागार को खर्च का ब्योरा अब तक नहीं दिया है। इसी कारण उन प्रत्याशियों की जमानत राशि पहले ही जब्त हो चुकी है।
यह बजट चुनाव में खर्च कर सकते थे प्रत्याशी
पद खर्च की अधिकतम सीमा
जिला पंचायत सदस्य 1,50,000
क्षेत्र पंचायत सदस्य 75,000
ग्राम प्रधान 75,000
ग्राम पंचायत सदस्य 10,000
चुनाव आयोग से तय की गई जमानत राशि
प्रधान पद अनारक्षित 2,000
प्रधान आरक्षित पद 1,000
बीडीसी अनारक्षित 2,000
बीडीसी आरक्षित पद 1,000
पंचायत सदस्य अनारक्षित 500
पंचायत सदस्य आरक्षित 250
प्रत्याशियों ने की जमा हुई जमानत राशि
पद प्रत्याशी धनराशि (लाखों में लगभग)
प्रधान 6761 85.50
बीडीसी 5850 75.20
डीडीसी 750 18.00
पंचायत सदस्य 15,509 44.27
कुल 28,870 222.97
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भाग्य आजमाने वाले सभी प्रत्याशियों को तीन महीने के अंदर चुनाव में खर्च का ब्योरा देना है। खर्च का ब्योरा देने के बाद ही उनकी जमानत राशि को वापस किया जाएगा। वर्ष 2015 के चुनाव के प्रत्याशियों ने भी खर्च का ब्योरा नहीं दिया था।
जितेंद्र सिंह, वरिष्ठ कोषाधिकारी