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अपनों के कंधे के सहारे प्रशिक्षण लेने पहुंचे बीमार कर्मी
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प्रशिक्षण में शामिल होने जाता मतदान कर्मी अविनाश।
- फोटो : RAIBARAILY
रायबरेली। चलने-फिरने में लाचार कर्मचारी अपनों के सहारे पंचायत चुनाव में लगी ड्यूटी के प्रशिक्षण लिए पहुंच रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारियों की मनमानी के कारण कार्रवाई से बचने के लिए कोरोना संक्रमण काल में उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है।
अधिकारियों की लापरवाही के कारण तमाम बीमार और हादसे के कारण चलने-फिरने में अक्षम लोगों की चुनाव में ड्यूटी लगा दी गई है। पूर्व में प्रार्थनापत्र लेकर घर का कोई भी आ जाता था तो कर्मचारी को सहूलियत मिल जाती थी, लेकिन इस बार तो अफसरों ने मनमानी की सारी हदें ही पार कर दी हैं।
खुद को बीमार साबित करने के लिए प्रशिक्षण स्थल पर कर्मचारियों को पहुंचना पड़ रहा है। उन्हें रजिस्टर में अपनी उपस्थिति भी दर्ज करानी पड़ती है। प्रशिक्षण स्थल पर बीमार लोगों की कोई भी सुनने को राजी नहीं हो रहा है।
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कार्रवाई के डर से कर्मचारी मो. सद्दाम और अविनाश को अपनों के कंधों के सहारे फिरोज गांधी कॉलेज में आयोजित प्रशिक्षण सत्र में शुक्रवार को पहुंचना पड़ा। उपस्थिति दर्ज कराने के बाद ड्यूटी कटवाने के लिए आवेदन पत्र दिया।
कर्मचारी राजन लाल भी बीमारी के कारण ठीक से चल नहीं पा रहे हैं। वह भी किसी तरह प्रशिक्षण लेने के लिए पहुंचे। सत्येंद्र कुमार के हाथ में चोट लगने के बाद प्लास्टर बंधा है। कार्रवाई के घर से सत्येंद्र को भी प्रशिक्षण में शामिल होना पड़ा।
साफ दिख रहे बीमार हैं, लेकिन बोर्ड तय करेगा तो कटेगी ड्यूटी
पिछले कई दिनों से मतदानकर्मियों का प्रशिक्षण हो रहा है। हर रोज चलने-फिरने में लाचार और बीमार कर्मचारी किसी तरह प्रशिक्षण लेने पहुंच रहे हैं। साफ दिख रहे हैं कि वे बीमार हैं, लेकिन उन्हें मेडिकल बोर्ड के सामने खुद को ड्यूटी न कर पाने की बात को सिद्ध करना होगा।
जिम्मेदार अफसरों ने पहली बार मेडिकल बोर्ड का गठन किया है। बीमार लोगों को ड्यूटी कटवाने के लिए बोर्ड के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। ऊपर से परेशानी का भी सामना करना पड़ रहा है।
मेडिकल बोर्ड में सीएमएस डॉ. एनके श्रीवास्तव, डॉ. अल्ताफ, डॉ. सलीम, डॉ. सरोज कुमार, डॉ. अश्वनी की टीम लगाई गई है। डीडीओ एसएन चौरसिया का कहना है कि जो भी कर्मचारी बीमार हैं, उन्हें मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के बाद ड्यूटी से मुक्त किया जा रहा है।
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अधिकारियों की लापरवाही के कारण तमाम बीमार और हादसे के कारण चलने-फिरने में अक्षम लोगों की चुनाव में ड्यूटी लगा दी गई है। पूर्व में प्रार्थनापत्र लेकर घर का कोई भी आ जाता था तो कर्मचारी को सहूलियत मिल जाती थी, लेकिन इस बार तो अफसरों ने मनमानी की सारी हदें ही पार कर दी हैं।
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खुद को बीमार साबित करने के लिए प्रशिक्षण स्थल पर कर्मचारियों को पहुंचना पड़ रहा है। उन्हें रजिस्टर में अपनी उपस्थिति भी दर्ज करानी पड़ती है। प्रशिक्षण स्थल पर बीमार लोगों की कोई भी सुनने को राजी नहीं हो रहा है।
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कार्रवाई के डर से कर्मचारी मो. सद्दाम और अविनाश को अपनों के कंधों के सहारे फिरोज गांधी कॉलेज में आयोजित प्रशिक्षण सत्र में शुक्रवार को पहुंचना पड़ा। उपस्थिति दर्ज कराने के बाद ड्यूटी कटवाने के लिए आवेदन पत्र दिया।
कर्मचारी राजन लाल भी बीमारी के कारण ठीक से चल नहीं पा रहे हैं। वह भी किसी तरह प्रशिक्षण लेने के लिए पहुंचे। सत्येंद्र कुमार के हाथ में चोट लगने के बाद प्लास्टर बंधा है। कार्रवाई के घर से सत्येंद्र को भी प्रशिक्षण में शामिल होना पड़ा।
साफ दिख रहे बीमार हैं, लेकिन बोर्ड तय करेगा तो कटेगी ड्यूटी
पिछले कई दिनों से मतदानकर्मियों का प्रशिक्षण हो रहा है। हर रोज चलने-फिरने में लाचार और बीमार कर्मचारी किसी तरह प्रशिक्षण लेने पहुंच रहे हैं। साफ दिख रहे हैं कि वे बीमार हैं, लेकिन उन्हें मेडिकल बोर्ड के सामने खुद को ड्यूटी न कर पाने की बात को सिद्ध करना होगा।
जिम्मेदार अफसरों ने पहली बार मेडिकल बोर्ड का गठन किया है। बीमार लोगों को ड्यूटी कटवाने के लिए बोर्ड के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। ऊपर से परेशानी का भी सामना करना पड़ रहा है।
मेडिकल बोर्ड में सीएमएस डॉ. एनके श्रीवास्तव, डॉ. अल्ताफ, डॉ. सलीम, डॉ. सरोज कुमार, डॉ. अश्वनी की टीम लगाई गई है। डीडीओ एसएन चौरसिया का कहना है कि जो भी कर्मचारी बीमार हैं, उन्हें मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के बाद ड्यूटी से मुक्त किया जा रहा है।