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रायबरेली: कोरोना काल में पता चली डिजिटल सेवा की क्षमता
Fri, 10 Feb 2023 12:19 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Fri, 10 Feb 2023 12:19 AM IST
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रायबरेली। पिछले तीन सालों में डिजिटल तकनीक का सबसे तेजी से उपयोग बढ़ा है। कोविड-19 महामारी ने हमें डिजिटल सेवा की क्षमता पता चली। इसके बाद से दुनियाभर में डिजिटल मानवाधिकारों पर काफी चर्चा हो रही है।
यह कहना है कि डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में विधि संकाय के सदस्य डॉ. अमनदीप सिंह का। वह गुरुवार को डिजिटल मानवाधिकार : उत्तर प्रदेश राज्य में उभरते आयाम एवं चुनौतियां विषय पर फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज में आयोजित संगोष्ठी में बतौर वक्ता बोल रहे थे।
डॉ. अमनदीप सिंह ने कहा कि 2015 में शुरू हुए डिजिटल इंडिया प्रोग्राम की कामयाबी के लिए प्रत्येक व्यक्ति का डिजिटल साक्षर होना जरूरी है। इंटरनेट का उपयोग हर क्षेत्र में बढ़ रहा है। ऐसे में हमें भी भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार रहना होगा। मुख्य अतिथि व फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज के प्राचार्य प्रो. मनोज कुमार त्रिपाठी ने डिजिटल मानवाधिकार से हमारे जीवन और समाज में हो रहे प्रभाव पर प्रकाश डाला।
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समाजशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो. उदयभान सिंह ने कहा कि सूचना तक पहुंच और डिजिटल साक्षरता, डिजिटल मानवाधिकारों के महत्वपूर्ण अंग हैं। डिजिटल युग में व्यक्तिगत अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए डिजिटल मानवाधिकार जरूरी है। उप प्राचार्य डॉ. बद्रीदत्त मिश्र ने भी डिजिटल मानवाधिकार पर चर्चा की।
प्रश्नावली के माध्यम से समारोह में मौजूद छात्रों से डिजिटल मानवाधिकार के प्रति उनके नजरिये जाने गए। इस मौके पर डॉ. निरंजन कुमार सिंह, डॉ. शैलेंद्र त्रिपाठी, डॉ. दुर्गेश कुमार सिंह, डॉ. दिनकर त्रिपाठी, डॉ. अरविंद सिंह, डॉ. शामिनी श्रीवास्तव, डॉ. अमिष, डॉ. विनय सिंह, डॉ. अजय चौहान, डॉ. आजेंद्र प्रताप सिंह, सुभाष चंद्र, आलोक सिंह, धनंजय सिंह, अभिषेक सिंह, कैलाशनाथ द्विवेदी आदि उपस्थित रहे।
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यह कहना है कि डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में विधि संकाय के सदस्य डॉ. अमनदीप सिंह का। वह गुरुवार को डिजिटल मानवाधिकार : उत्तर प्रदेश राज्य में उभरते आयाम एवं चुनौतियां विषय पर फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज में आयोजित संगोष्ठी में बतौर वक्ता बोल रहे थे।
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डॉ. अमनदीप सिंह ने कहा कि 2015 में शुरू हुए डिजिटल इंडिया प्रोग्राम की कामयाबी के लिए प्रत्येक व्यक्ति का डिजिटल साक्षर होना जरूरी है। इंटरनेट का उपयोग हर क्षेत्र में बढ़ रहा है। ऐसे में हमें भी भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार रहना होगा। मुख्य अतिथि व फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज के प्राचार्य प्रो. मनोज कुमार त्रिपाठी ने डिजिटल मानवाधिकार से हमारे जीवन और समाज में हो रहे प्रभाव पर प्रकाश डाला।
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समाजशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो. उदयभान सिंह ने कहा कि सूचना तक पहुंच और डिजिटल साक्षरता, डिजिटल मानवाधिकारों के महत्वपूर्ण अंग हैं। डिजिटल युग में व्यक्तिगत अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए डिजिटल मानवाधिकार जरूरी है। उप प्राचार्य डॉ. बद्रीदत्त मिश्र ने भी डिजिटल मानवाधिकार पर चर्चा की।
प्रश्नावली के माध्यम से समारोह में मौजूद छात्रों से डिजिटल मानवाधिकार के प्रति उनके नजरिये जाने गए। इस मौके पर डॉ. निरंजन कुमार सिंह, डॉ. शैलेंद्र त्रिपाठी, डॉ. दुर्गेश कुमार सिंह, डॉ. दिनकर त्रिपाठी, डॉ. अरविंद सिंह, डॉ. शामिनी श्रीवास्तव, डॉ. अमिष, डॉ. विनय सिंह, डॉ. अजय चौहान, डॉ. आजेंद्र प्रताप सिंह, सुभाष चंद्र, आलोक सिंह, धनंजय सिंह, अभिषेक सिंह, कैलाशनाथ द्विवेदी आदि उपस्थित रहे।