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जिले में विद्यालयों के जर्जर भवन टूटेंगे, कई 100 साल पुराने
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केस-1
नौ दशक पहले बना था स्कूल
सलोन। ऊंचाहार रोड स्थित प्राथमिक विद्यालय सलोन की स्थापना 1930 में हुई थी। इसमें बने छह कमरे जर्जर हो चुके हैं। इसके बाद बने तीन कमरे भी जर्जर हैं। निष्प्रयोज्य घोषित किए गए नौ कमरे ध्वस्त होने हैं। वर्ष 2007 में बने चार कमरों में कक्षाएं चलती हैं। प्रधानाध्यापिका अशफाक जहां ने बताया कि 2008 से लिखापढ़ी चल रही थी।
केस-2
दूसरे स्कूल में चल रहीं कक्षाएं
शिवगढ़। प्राथमिक विद्यालय बैंती-द्वितीय की हालत काफी जर्जर है। यह भवन 1958 में बना था। प्रधानाध्यापक दिनेश सिंह ने बताया कि उनके स्कूल के बच्चों की कक्षाएं प्राथमिक विद्यालय बैंती-प्रथम में चलती हैं। विद्यालय में 111 बच्चे नामांकित हैं। बीईओ सुरेश कुमार ने बताया कि विकास क्षेत्र के छह स्कूलों में जर्जर भवनों को ध्वस्त किया जाना है।
केस-3
भूकंपरोधी कक्ष में भी आ गईं दरारें
खीरों। प्राथमिक विद्यालय बरौला में बनाया गया भूकंपरोधी अतिरिक्त कक्ष भी जर्जर हो गया है, जो वर्ष 2007 में बना था। कमरे की बीम एवं दीवारों में दरारें पड़ गईं हैं। हादसे का अंदेशा बना रहता है। प्रधानाध्यापिका सुनीता भारती ने बताया कि करीब नौ महीने पहले विद्यालय प्रबंध समिति की अध्यक्ष राजरानी की अध्यक्षता में बैठक कर जर्जर भवन के बारे में प्रस्ताव बनाकर बीईओ के माध्यम से बीएसए को भेजा गया था।
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रायबरेली। जिन 178 स्कूलों को ध्वस्त करने व नीलामी के लिए चिह्नित किया गया है, उनमें कई स्कूलों के भवन 100 साल से भी पुराने हैं। वहीं कुछ स्कूल ऐसे भी हैं, जो बनने के 20-25 साल में ही जर्जर हो गए।
सबसे ज्यादा पुराने स्कूलों में खीरों क्षेत्र का प्राथमिक विद्यालय निहस्था 1902 में, लालगंज क्षेत्र का उच्च प्राथमिक विद्यालय चचिहा 1905 में, सरेनी क्षेत्र का प्राथमिक विद्यालय इब्राहीमपुर व उच्च प्राथमिक विद्यालय नीवीं 1923 में बना था।
पिछले दो-तीन दशक में बने विद्यालयों में उच्च प्राथमिक विद्यालय खैरहनी 2003 में, प्राथमिक विद्यालय उधवन 1999 में, उच्च प्राथमिक विद्यालय खानपुर खुष्टी एवं चांदेमऊ 2004 में, प्राथमिक विद्यालय धनाबाद 2001 में, उच्च प्राथमिक विद्यालय चंद्रभूषणगंज वर्ष 2000 में बना था, जिनकी हालत कुछ वर्षों में जर्जर हो गई।
आकलन कराने के बाद लिया निर्णय
जिले में 178 परिषदीय विद्यालय परिसर में जर्जर भवनों को ध्वस्त करने के लिए नीलामी होनी है, जिसके लिए जिलाधिकारी ने अनुमोदन कर दिया है। इन विद्यालयों का मूल्यांकन एवं सत्यापन तकनीकी समिति से कराया गया था। नीलामी प्रक्रिया के लिए एएओ, संबंधित विकास क्षेत्रों के बीईओ और एडीओ की तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है। जल्दी ही नीलामी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
-आनंद प्रकाश शर्मा, बीएसए
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नौ दशक पहले बना था स्कूल
सलोन। ऊंचाहार रोड स्थित प्राथमिक विद्यालय सलोन की स्थापना 1930 में हुई थी। इसमें बने छह कमरे जर्जर हो चुके हैं। इसके बाद बने तीन कमरे भी जर्जर हैं। निष्प्रयोज्य घोषित किए गए नौ कमरे ध्वस्त होने हैं। वर्ष 2007 में बने चार कमरों में कक्षाएं चलती हैं। प्रधानाध्यापिका अशफाक जहां ने बताया कि 2008 से लिखापढ़ी चल रही थी।
केस-2
दूसरे स्कूल में चल रहीं कक्षाएं
शिवगढ़। प्राथमिक विद्यालय बैंती-द्वितीय की हालत काफी जर्जर है। यह भवन 1958 में बना था। प्रधानाध्यापक दिनेश सिंह ने बताया कि उनके स्कूल के बच्चों की कक्षाएं प्राथमिक विद्यालय बैंती-प्रथम में चलती हैं। विद्यालय में 111 बच्चे नामांकित हैं। बीईओ सुरेश कुमार ने बताया कि विकास क्षेत्र के छह स्कूलों में जर्जर भवनों को ध्वस्त किया जाना है।
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केस-3
भूकंपरोधी कक्ष में भी आ गईं दरारें
खीरों। प्राथमिक विद्यालय बरौला में बनाया गया भूकंपरोधी अतिरिक्त कक्ष भी जर्जर हो गया है, जो वर्ष 2007 में बना था। कमरे की बीम एवं दीवारों में दरारें पड़ गईं हैं। हादसे का अंदेशा बना रहता है। प्रधानाध्यापिका सुनीता भारती ने बताया कि करीब नौ महीने पहले विद्यालय प्रबंध समिति की अध्यक्ष राजरानी की अध्यक्षता में बैठक कर जर्जर भवन के बारे में प्रस्ताव बनाकर बीईओ के माध्यम से बीएसए को भेजा गया था।
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रायबरेली। जिन 178 स्कूलों को ध्वस्त करने व नीलामी के लिए चिह्नित किया गया है, उनमें कई स्कूलों के भवन 100 साल से भी पुराने हैं। वहीं कुछ स्कूल ऐसे भी हैं, जो बनने के 20-25 साल में ही जर्जर हो गए।
सबसे ज्यादा पुराने स्कूलों में खीरों क्षेत्र का प्राथमिक विद्यालय निहस्था 1902 में, लालगंज क्षेत्र का उच्च प्राथमिक विद्यालय चचिहा 1905 में, सरेनी क्षेत्र का प्राथमिक विद्यालय इब्राहीमपुर व उच्च प्राथमिक विद्यालय नीवीं 1923 में बना था।
पिछले दो-तीन दशक में बने विद्यालयों में उच्च प्राथमिक विद्यालय खैरहनी 2003 में, प्राथमिक विद्यालय उधवन 1999 में, उच्च प्राथमिक विद्यालय खानपुर खुष्टी एवं चांदेमऊ 2004 में, प्राथमिक विद्यालय धनाबाद 2001 में, उच्च प्राथमिक विद्यालय चंद्रभूषणगंज वर्ष 2000 में बना था, जिनकी हालत कुछ वर्षों में जर्जर हो गई।
आकलन कराने के बाद लिया निर्णय
जिले में 178 परिषदीय विद्यालय परिसर में जर्जर भवनों को ध्वस्त करने के लिए नीलामी होनी है, जिसके लिए जिलाधिकारी ने अनुमोदन कर दिया है। इन विद्यालयों का मूल्यांकन एवं सत्यापन तकनीकी समिति से कराया गया था। नीलामी प्रक्रिया के लिए एएओ, संबंधित विकास क्षेत्रों के बीईओ और एडीओ की तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है। जल्दी ही नीलामी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
-आनंद प्रकाश शर्मा, बीएसए