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पेयजल के लिए भटकते ग्रामीण
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 18 Jan 2016 12:04 AM IST
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यह हाल तब है जब टंकियों की मरम्मत व रखरखाव के लिए हर साल करोड़ों रुपये शासन से भेजा जाता। लेकिन अफसरों की ढिलाई से कागजों पर ही टंकियों की मरम्मत करा दी जाती है।
इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। शिवगढ़ ब्लॉक क्षेत्र में तीन पानी की टंकी लगी है। इनमें से नेरूथुआ गांव की टंकी पांच साल से खराब है।
शिवगढ़ और सीवन से कुछ ही गांवों को आपूर्ति होती है। इससे राजापुर, सीवन, मुराइन का पुरवा, जमुनीपुर, गुमावां, नेरुथुआ, अछई समेत एक दर्जन गांव को पेयजल आपूर्ति प्रभावित है।
टंकियों से करीब 10 हजार लोग पानी उपयोग करते हैं। पानी की आपूर्ति न होने से ग्रामीणों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।
गोविंद नारायण तिवारी, शिवकुमार शुक्ला, शिवकुमार सिंह, लोधेश्वर सिंह आदि ने बताया कि कई बार इसकी शिकायत अधिकारियों से की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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अवर अभियंता वैभव पटेल का कहना है कि नेरुथुआ की टंकी बंद है। शिवगढ़ और सीवन से कुछ गांवों को जलापूर्ति होती है। स्टीमेट बनाकर भेजा गया है। धन मिलते नया प्रोजेक्ट बनवाया जाएगा।
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इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। शिवगढ़ ब्लॉक क्षेत्र में तीन पानी की टंकी लगी है। इनमें से नेरूथुआ गांव की टंकी पांच साल से खराब है।
शिवगढ़ और सीवन से कुछ ही गांवों को आपूर्ति होती है। इससे राजापुर, सीवन, मुराइन का पुरवा, जमुनीपुर, गुमावां, नेरुथुआ, अछई समेत एक दर्जन गांव को पेयजल आपूर्ति प्रभावित है।
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टंकियों से करीब 10 हजार लोग पानी उपयोग करते हैं। पानी की आपूर्ति न होने से ग्रामीणों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।
गोविंद नारायण तिवारी, शिवकुमार शुक्ला, शिवकुमार सिंह, लोधेश्वर सिंह आदि ने बताया कि कई बार इसकी शिकायत अधिकारियों से की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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अवर अभियंता वैभव पटेल का कहना है कि नेरुथुआ की टंकी बंद है। शिवगढ़ और सीवन से कुछ गांवों को जलापूर्ति होती है। स्टीमेट बनाकर भेजा गया है। धन मिलते नया प्रोजेक्ट बनवाया जाएगा।