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डॉक्टर ओटी में , ठप रही ओपीडी, बैरंग लौटे 250 मरीज
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे
Updated Thu, 06 Oct 2016 12:10 AM IST
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रायबरेली में बुधवार को जिला अस्पताल में बंद पड़ा सर्जन डॉ. जेके लाल का कमरा।
- फोटो : अमर उजाला
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करीब 70 वर्षीय बुजुर्ग राम प्रसाद बुधवार को अपने 10 साल के पोते अर्जुन को लेकर सर्जन को दिखाने के लिए जिला अस्पताल आये थे। सर्जन के कक्ष पहुंचे तो वहां दरवाजे पर उन्हें एक तख्ती लटकती मिली। इसमे लिखा था डॉक्टर साहब आज ओटी में है, ओपीडी नहीं चलेगी।
करीब 45 किलोमीटर दूर सरेनी से आए बुजुर्ग ने तख्ती पढ़ी तो मायूस हो गये। कुछ देर ओपीडी के बाहर इंतजार किया, फिर पोते के साथ लौट गये। इसी तरह के करीब 250 मरीज ओपीडी के दरवाजे पर लगी तख्ती देखकर बैरंग लौट गए।
दरअसल जिला अस्पताल में सर्जन के दो पद हैं। इनमें से एक पद करीब एक साल से खाली चल रहा है और दूसरे पद पर डॉ. जेके लाल की तैनाती है। सप्ताह में दो दिन मरीजों के ऑपरेशन किए जाते हैं। चिकित्सक की कमी के कारण ऑपरेशन के दोनों दिन ओपीडी पूरी तरह से बंद रहती है।
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बताते हैं कि सर्जन की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 200 से 250 रोगी अपना इलाज कराते हैं। इन रोगियों को चिकित्सकों की कमी के कारण काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। ऑपरेशन के दिनों में तो खाली हाथ वापस जाना पड़ता है। यह हाल तब है जब मामले की जानकारी शासन तक पहुंच चुका है, बावजूद इसके चिकित्सक की तैनाती नहीं हुई।
जिला अस्पताल में फिजीशियन के पद पर डॉ. बीरबल और डॉ. राजीव चौधरी की तैनाती है। इनमें से डॉ. राजीव चौधरी को हाल ही में प्रमोशन मिल गया। अब उन्हें फतेहपुर में जिला अस्पताल का सीएमएस बना दिया गया है। डॉ. चौधरी के प्रमोशन के बाद अस्पताल में फिजीशियन का एक भी खाली हो गया है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डाॅ.एनके श्रीवास्तव का कहना है कि अस्पताल में सर्जन का एक पद खाली है। इससे परेशानी हो रही है। ऑपरेशन के दिन में ओपीडी बंद करनी पड़ती है। वहीं डॉ. राजीव चौधरी के प्रमोशन के बाद फिजीशियन का एक पद भी खाली हो गया है। चिकित्सकों की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है।
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करीब 45 किलोमीटर दूर सरेनी से आए बुजुर्ग ने तख्ती पढ़ी तो मायूस हो गये। कुछ देर ओपीडी के बाहर इंतजार किया, फिर पोते के साथ लौट गये। इसी तरह के करीब 250 मरीज ओपीडी के दरवाजे पर लगी तख्ती देखकर बैरंग लौट गए।
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दरअसल जिला अस्पताल में सर्जन के दो पद हैं। इनमें से एक पद करीब एक साल से खाली चल रहा है और दूसरे पद पर डॉ. जेके लाल की तैनाती है। सप्ताह में दो दिन मरीजों के ऑपरेशन किए जाते हैं। चिकित्सक की कमी के कारण ऑपरेशन के दोनों दिन ओपीडी पूरी तरह से बंद रहती है।
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बताते हैं कि सर्जन की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 200 से 250 रोगी अपना इलाज कराते हैं। इन रोगियों को चिकित्सकों की कमी के कारण काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। ऑपरेशन के दिनों में तो खाली हाथ वापस जाना पड़ता है। यह हाल तब है जब मामले की जानकारी शासन तक पहुंच चुका है, बावजूद इसके चिकित्सक की तैनाती नहीं हुई।
जिला अस्पताल में फिजीशियन के पद पर डॉ. बीरबल और डॉ. राजीव चौधरी की तैनाती है। इनमें से डॉ. राजीव चौधरी को हाल ही में प्रमोशन मिल गया। अब उन्हें फतेहपुर में जिला अस्पताल का सीएमएस बना दिया गया है। डॉ. चौधरी के प्रमोशन के बाद अस्पताल में फिजीशियन का एक भी खाली हो गया है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डाॅ.एनके श्रीवास्तव का कहना है कि अस्पताल में सर्जन का एक पद खाली है। इससे परेशानी हो रही है। ऑपरेशन के दिन में ओपीडी बंद करनी पड़ती है। वहीं डॉ. राजीव चौधरी के प्रमोशन के बाद फिजीशियन का एक पद भी खाली हो गया है। चिकित्सकों की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है।