{"_id":"6349a307a6a96a5a2b104e87","slug":"district-hospital-raibaraily-news-lko652883043","type":"story","status":"publish","title_hn":"छा गया धुंध, आंखों में जलन के साथ ही थमने लगी थीं सांसे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छा गया धुंध, आंखों में जलन के साथ ही थमने लगी थीं सांसे
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खुला आसमां बना वार्ड, पति ने दिया सहारा
पैर में चोट लगने के बाद गुरुबख्शगंज के मलिकमऊ चौबारा निवासी कांति हड्डी रोग वार्ड में भर्ती थीं। साथ में पति व तीन साल का बेटा भी था। कांति ने बताया कि गैस रिसाव के बाद किसी तरह भागकर जान बचाई और इमरजेंसी के पीछे खाली स्थान पर पहुंचे। ऐसा लगा कि दम घुट जाएगा। आज जान चली जाएगी, लेकिन पति की वजह से सही सलामत हूं।
वार्ड में सामान छोड़ बच्चे को लेकर भागे
सलोन के नरेंद्रपुर गांव निवासी किरन देवी ने हर हाल में मासूम की जान को बचाने का प्रयास किया। किरन ने अपनी बच्ची मीनाक्षी को बीमार होने पर जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती कराया था। किरन बोलीं कि अचानक आंखों में जलन होने लगी थी। नाक से भी पानी आना शुरू हो गया। इसी दौरान भागने की आवाज सुनाई पड़ी। वार्ड में ही समान को छोड़कर बेटी को लेकर अस्पताल से बाहर आ गई।
रैन बसेरे के बाहर बनाया वार्ड
सलोन निवासी सरवरी जिला अस्पताल के महिला वार्ड में भर्ती थीं। परिवार के लोगों ने किसी तरह रैन बसेरे के पास पहुंचाया। खुले आसमान के नीचे चटाई मिली तो लगा अब जान बच गई। सरवरी ने बताया कि रिसाव होने पर आंखों से आंसू आने लगे। भगदड़ में कई बार गिरते-गिरते बचे। बरवलिया के रामकरन के पैर में प्लास्टर बंधा था। लाठी के सहारे किसी तरह भागकर जान बचाई।
विज्ञापन
रायबरेली। जिला अस्पताल के वार्ड में अचानक धुंध छाने लगी। एकाएक आंखों में जलन शुरू हो गई। समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है। नाक में जलन के साथ पानी आने लगा तो घबराहट हुई। ऐसा लगा कि मानों कोई गला घोट रहा है। गैस रिसाव का मंजर याद कर मरीज व तीमारदारों की आंखों से आंसू छलक आए। पीड़िताें ने बताया कि ऐसा लग रहा था कि अब जान नहीं बचेगी।
मोहगवां गांव की तारा देवी ने बताया कि दोपहर के करीब 2:30 बजे थे। तभी अचानक सांस फूलने लगी। कुछ बेचैनी हुई तो पास में बैठे बेटे नरेंद्र को बताया। तभी अचानक शोर मचने लगा। सभी मरीज व तीमारदार नीचे की ओर भाग रहे थे। हमें लगा कि आग लग गई है।
किसी तरह बेटा वार्ड से बाहर निकालकर अस्पताल से बाहर लाया। अभी भी सांस लेने में कुछ दिक्कत हो रही है। बरवलिया के रामकरन का कहना है कि लाठी के सहारे किसी तरह भागा। जिंदगी में पहली बार ऐसी घटना देखी है।
अस्पताल में भर्ती सुनयना देवी ने बताया कि बेटा कुछ सामान लेने घर गया था। तभी यहां शोर होने लगा। मैं घबरा गई तो बगल के बेड पर भर्ती मरीज व तीमारदारों ने ढांढस बंधाते हुए मुझे किसी तरह बाहर पहुंचाया। वार्ड में रखा मेरा सामान भी साथ ले आए। अस्पताल में शोर सुनकर इमरजेंसी में दिखाने आए कुछ लोग घबराकर बिना इलाज कराए ही लौट गए।
विज्ञापन
पैर में चोट लगने के बाद गुरुबख्शगंज के मलिकमऊ चौबारा निवासी कांति हड्डी रोग वार्ड में भर्ती थीं। साथ में पति व तीन साल का बेटा भी था। कांति ने बताया कि गैस रिसाव के बाद किसी तरह भागकर जान बचाई और इमरजेंसी के पीछे खाली स्थान पर पहुंचे। ऐसा लगा कि दम घुट जाएगा। आज जान चली जाएगी, लेकिन पति की वजह से सही सलामत हूं।
वार्ड में सामान छोड़ बच्चे को लेकर भागे
सलोन के नरेंद्रपुर गांव निवासी किरन देवी ने हर हाल में मासूम की जान को बचाने का प्रयास किया। किरन ने अपनी बच्ची मीनाक्षी को बीमार होने पर जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती कराया था। किरन बोलीं कि अचानक आंखों में जलन होने लगी थी। नाक से भी पानी आना शुरू हो गया। इसी दौरान भागने की आवाज सुनाई पड़ी। वार्ड में ही समान को छोड़कर बेटी को लेकर अस्पताल से बाहर आ गई।
विज्ञापन
रैन बसेरे के बाहर बनाया वार्ड
सलोन निवासी सरवरी जिला अस्पताल के महिला वार्ड में भर्ती थीं। परिवार के लोगों ने किसी तरह रैन बसेरे के पास पहुंचाया। खुले आसमान के नीचे चटाई मिली तो लगा अब जान बच गई। सरवरी ने बताया कि रिसाव होने पर आंखों से आंसू आने लगे। भगदड़ में कई बार गिरते-गिरते बचे। बरवलिया के रामकरन के पैर में प्लास्टर बंधा था। लाठी के सहारे किसी तरह भागकर जान बचाई।
विज्ञापन
रायबरेली। जिला अस्पताल के वार्ड में अचानक धुंध छाने लगी। एकाएक आंखों में जलन शुरू हो गई। समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है। नाक में जलन के साथ पानी आने लगा तो घबराहट हुई। ऐसा लगा कि मानों कोई गला घोट रहा है। गैस रिसाव का मंजर याद कर मरीज व तीमारदारों की आंखों से आंसू छलक आए। पीड़िताें ने बताया कि ऐसा लग रहा था कि अब जान नहीं बचेगी।
मोहगवां गांव की तारा देवी ने बताया कि दोपहर के करीब 2:30 बजे थे। तभी अचानक सांस फूलने लगी। कुछ बेचैनी हुई तो पास में बैठे बेटे नरेंद्र को बताया। तभी अचानक शोर मचने लगा। सभी मरीज व तीमारदार नीचे की ओर भाग रहे थे। हमें लगा कि आग लग गई है।
किसी तरह बेटा वार्ड से बाहर निकालकर अस्पताल से बाहर लाया। अभी भी सांस लेने में कुछ दिक्कत हो रही है। बरवलिया के रामकरन का कहना है कि लाठी के सहारे किसी तरह भागा। जिंदगी में पहली बार ऐसी घटना देखी है।
अस्पताल में भर्ती सुनयना देवी ने बताया कि बेटा कुछ सामान लेने घर गया था। तभी यहां शोर होने लगा। मैं घबरा गई तो बगल के बेड पर भर्ती मरीज व तीमारदारों ने ढांढस बंधाते हुए मुझे किसी तरह बाहर पहुंचाया। वार्ड में रखा मेरा सामान भी साथ ले आए। अस्पताल में शोर सुनकर इमरजेंसी में दिखाने आए कुछ लोग घबराकर बिना इलाज कराए ही लौट गए।