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जिला अस्पताल में डॉक्टर न दवा, मरीज बेहाल
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 29 Sep 2015 11:17 PM IST
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फिजीशियन और नाक, कान, गले का डॉक्टर न होने के कारण ओपीडी पूरी तरह से ठप हो गई है। हड्डी के डॉक्टरों की संख्या भी बहुत कम है। जो हैं, वे नर्सिंग होम चला रहे हैं। ऐसे में रोगियों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है।
सीटी स्कैन केबल जलने के कारण करीब एक महीने से बंद है। उसे अब तक ठीक नहीं कराया गया है। इसके अलावा दवाओं की कमी भी रोगियों को परेशान कर रही है। अस्पताल प्रशासन व विभाग स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रहा है।
जिसका खामियाजा रोगियों और उनके तीमारदारों को भोगना पड़ रहा है। यह हाल तब है, जब हाल ही में डीएम और फिर प्रमुख सचिव ने यहां का हाल देखा और अधिकारियों को स्वास्थ्य सेवाएं ठीक करने को कहा, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ।
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विभागीय लापरवाही से गांवों से इलाज कराने के लिए आ रहे रोगी परेशान होने के बाद निजी अस्पतालों में जाने के लिए विवश हो रहे हैं। उनकी समस्या को सुनने वाला कोई नहीं है। यहां तक कि डॉक्टरों की कमी के कारण आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण भर्ती रोगियों का इलाज भी ठीक से नहीं हो पा रहा है।
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सीटी स्कैन केबल जलने के कारण करीब एक महीने से बंद है। उसे अब तक ठीक नहीं कराया गया है। इसके अलावा दवाओं की कमी भी रोगियों को परेशान कर रही है। अस्पताल प्रशासन व विभाग स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रहा है।
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जिसका खामियाजा रोगियों और उनके तीमारदारों को भोगना पड़ रहा है। यह हाल तब है, जब हाल ही में डीएम और फिर प्रमुख सचिव ने यहां का हाल देखा और अधिकारियों को स्वास्थ्य सेवाएं ठीक करने को कहा, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ।
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विभागीय लापरवाही से गांवों से इलाज कराने के लिए आ रहे रोगी परेशान होने के बाद निजी अस्पतालों में जाने के लिए विवश हो रहे हैं। उनकी समस्या को सुनने वाला कोई नहीं है। यहां तक कि डॉक्टरों की कमी के कारण आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण भर्ती रोगियों का इलाज भी ठीक से नहीं हो पा रहा है।