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जिला अस्पताल की इमरजेंसी में खुले में पड़े बेड पर चल रहा इलाज, सांसत में मरीजों की जान
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खुले में बेड पर भर्ती मरीजों का इलाज करती नर्स।
- फोटो : RAIBARAILY
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रायबरेली। जिला अस्पताल में इलाज के नाम पर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ हो रहा है। इमरजेंसी में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को खुले आसमान के नीचे भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। ऐसे में गंभीर मरीजों में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। बेडों पर चादरें भी नहीं हैं। मरीज घर से चादरें ला रहे हैं। जिला अस्पताल प्रशासन की ये लापरवाही मरीजों की सांसों पर भारी पड़ सकती है।
जिला अस्पताल में करीब 300 बेड हैं। वहीं इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को भर्ती करने के लिए 15 बेड आरक्षित हैं। वार्डों में पर्याप्त व्यवस्था होने के बाद भी गुरुवार को इमरजेंसी में मरीजों के लिए खुले में बेड लगवा दिए गए।
बताते हैं कि इमरजेंसी वार्ड में मरम्मत का काम होने के कारण बाहर बरामदे में खुले में ही बेड लगाकर मरीजों को भर्ती किया जाने लगा। इनमें से कुछ मरीज गंभीर हालत में थे।
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यहां इमरजेंसी में आए मरीजों को खुले आसमान के नीचे बिछाए गए बेडों पर लिटाकर इलाज किया गया। बाकायदा चिकित्सक की सलाह पर नर्सों ने खुले में पड़े बेडों पर पहुंचकर मरीजों का इलाज भी किया। यह दिनभर चला।
वार्ड तीन में बेड के गद्दे फटे, महिला वार्ड में चादर नहीं
वैसे तो जिला अस्पताल को चादरों की धुलाई और अस्पताल में सफाई के नाम पर हर महीने काफी बजट मिलता है। वार्डों में चादरों के गंदे होने के बाद तुरंत बदलने की व्यवस्था है, लेकिन यहां ठीक उल्टा देखने को मिल रहा है।
वार्ड संख्या तीन में मरीजों के लिए बिछाए गए बेडों के गद्दे तक फट गए हैं। बताते हैं कि तमाम गद्दे गोदाम में रखे गए हैं, लेकिन फटे गद्दों वालें बेडों से काम चलाया जा रहा है। हड्डी व सर्जिकल वार्ड महिला में बेडों पर खुद के चादर बिछाकर मरीजों को इलाज करवाना पड़ रहा है। बताते हैं नर्सों से चादरें मांगने के बाद भी नहीं दिया जाता है। ऐसी स्थिति में मरीजों को स्वयं घर से चादरें लानी पड़ रही है।
स्ट्रेचर व व्हील चेयरों का भी रोना, गोदी में ढोते मरीज
जिला अस्पताल की इमरजेंसी से लेकर वार्डों तक समस्याओं का अंबार रोजाना मरीजों को भोगना पड़ रहा है। इमरजेंसी में इतने स्ट्रेचर और व्हील चेयर की व्यवस्था नहीं है कि मरीजों को सुविधा मिल सके। ऐसे में मरीजों को इमरजेंसी के चिकित्सक को दिखाने के लिए लोगों को अपने मरीजों को गोदी में लेकर जाना पड़ रहा है। ऐसे नजारे रोज जिला अस्पताल में देखने को मिल रहे हैं।
इमरजेंसी वार्ड में मरम्मत का काम होने के कारण बेडों को बाहर रखवाया गया था। बेडों पर मरीजों को भर्ती करके इलाज नहीं किया गया। इमरजेंसी मरीजों के वार्ड की व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए कोई कमी नहीं है।
डॉ. एनके श्रीवास्तव, सीएमएस
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जिला अस्पताल में करीब 300 बेड हैं। वहीं इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को भर्ती करने के लिए 15 बेड आरक्षित हैं। वार्डों में पर्याप्त व्यवस्था होने के बाद भी गुरुवार को इमरजेंसी में मरीजों के लिए खुले में बेड लगवा दिए गए।
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बताते हैं कि इमरजेंसी वार्ड में मरम्मत का काम होने के कारण बाहर बरामदे में खुले में ही बेड लगाकर मरीजों को भर्ती किया जाने लगा। इनमें से कुछ मरीज गंभीर हालत में थे।
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यहां इमरजेंसी में आए मरीजों को खुले आसमान के नीचे बिछाए गए बेडों पर लिटाकर इलाज किया गया। बाकायदा चिकित्सक की सलाह पर नर्सों ने खुले में पड़े बेडों पर पहुंचकर मरीजों का इलाज भी किया। यह दिनभर चला।
वार्ड तीन में बेड के गद्दे फटे, महिला वार्ड में चादर नहीं
वैसे तो जिला अस्पताल को चादरों की धुलाई और अस्पताल में सफाई के नाम पर हर महीने काफी बजट मिलता है। वार्डों में चादरों के गंदे होने के बाद तुरंत बदलने की व्यवस्था है, लेकिन यहां ठीक उल्टा देखने को मिल रहा है।
वार्ड संख्या तीन में मरीजों के लिए बिछाए गए बेडों के गद्दे तक फट गए हैं। बताते हैं कि तमाम गद्दे गोदाम में रखे गए हैं, लेकिन फटे गद्दों वालें बेडों से काम चलाया जा रहा है। हड्डी व सर्जिकल वार्ड महिला में बेडों पर खुद के चादर बिछाकर मरीजों को इलाज करवाना पड़ रहा है। बताते हैं नर्सों से चादरें मांगने के बाद भी नहीं दिया जाता है। ऐसी स्थिति में मरीजों को स्वयं घर से चादरें लानी पड़ रही है।
स्ट्रेचर व व्हील चेयरों का भी रोना, गोदी में ढोते मरीज
जिला अस्पताल की इमरजेंसी से लेकर वार्डों तक समस्याओं का अंबार रोजाना मरीजों को भोगना पड़ रहा है। इमरजेंसी में इतने स्ट्रेचर और व्हील चेयर की व्यवस्था नहीं है कि मरीजों को सुविधा मिल सके। ऐसे में मरीजों को इमरजेंसी के चिकित्सक को दिखाने के लिए लोगों को अपने मरीजों को गोदी में लेकर जाना पड़ रहा है। ऐसे नजारे रोज जिला अस्पताल में देखने को मिल रहे हैं।
इमरजेंसी वार्ड में मरम्मत का काम होने के कारण बेडों को बाहर रखवाया गया था। बेडों पर मरीजों को भर्ती करके इलाज नहीं किया गया। इमरजेंसी मरीजों के वार्ड की व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए कोई कमी नहीं है।
डॉ. एनके श्रीवास्तव, सीएमएस