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घाटों पर गंदगी, अव्यवस्था के बीच स्नान करेंगे भक्त
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ऊंचाहार (रायबरेली)। गोकना गंगाघाट पर कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले ऐतिहासिक मेले को लेकर स्थानीय प्रशासन संजीदा नहीं है। मेले को कुछ दिन बचे हैं, लेकिन तहसील प्रशासन ने कोई तैयारी शुरू नहीं की है।
घाट पर गंदगी का अंबार है। कचरा व टूटी ईंटों के ढेर लगे हैं। यही हाल रहा तो मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को अव्यवस्थाओं के बीच स्नान करना पड़ेगा।
गोकना गंगाघाट में कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले मेले में जनपद के साथ ही अमेठी, सुुल्तानपुर, प्रतापगढ़, कौशांबी व फतेहपुर के लाखों की संख्या में लोग स्नान करने के लिए आते हैं। लोग मां गंगा की पूजा के बाद ऐतिहासिक मेले का भी आनंद उठाते हैं। इस बार 18, 19 व 20 नवंबर को तीन दिवसीय मेले लगेगा।
स्थानीय प्रशासन मेले में प्रकाश की व्यवस्था, नाव, नाविकों व गोताखोरों की व्यवस्था, अतिरिक्त जल निकासी की व्यवस्था, खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मेले की बैरीकेडिंग कराता है। मेले को महज नौ दिन बचे हैं, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते अभी तक मेले की तैयारियां शुरू नहीं हुई हैं।
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घाट पर गंदगी का अंबार है। रास्ता बदहाल है। घाट पर बने सामुदायिक शौचालय का ताला हमेशा बंद रहता है। यही कारण है कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को खुले में शौच करना पड़ता है। जिम्मेदार अफसर इस तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं। उधर, तहसीलदार अजय गुप्ता ने बताया कि मेले की तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। मेले की व्यवस्था समय पर हो जाएगी।
एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
मेले की तैयारियां शुरू कराने के लिए मां गंगा गोकर्ण जनकल्याण समिति के सचिव ने एसडीएम धीरज श्रीवास्तव को पत्र दिया। मेले में सुरक्षा व्यवस्था के साथ ही साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश आदि की व्यवस्था कराते जाने की मांग की है। सचिव ने बताया कि चतुर्दशी की शाम गंगा आरती व दीपदान के साथ मेले की शुरुआत होती है। स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी व जनप्रतिनिधि मेले का शुभारंभ करते हैं।
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घाट पर गंदगी का अंबार है। कचरा व टूटी ईंटों के ढेर लगे हैं। यही हाल रहा तो मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को अव्यवस्थाओं के बीच स्नान करना पड़ेगा।
गोकना गंगाघाट में कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले मेले में जनपद के साथ ही अमेठी, सुुल्तानपुर, प्रतापगढ़, कौशांबी व फतेहपुर के लाखों की संख्या में लोग स्नान करने के लिए आते हैं। लोग मां गंगा की पूजा के बाद ऐतिहासिक मेले का भी आनंद उठाते हैं। इस बार 18, 19 व 20 नवंबर को तीन दिवसीय मेले लगेगा।
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स्थानीय प्रशासन मेले में प्रकाश की व्यवस्था, नाव, नाविकों व गोताखोरों की व्यवस्था, अतिरिक्त जल निकासी की व्यवस्था, खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मेले की बैरीकेडिंग कराता है। मेले को महज नौ दिन बचे हैं, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते अभी तक मेले की तैयारियां शुरू नहीं हुई हैं।
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घाट पर गंदगी का अंबार है। रास्ता बदहाल है। घाट पर बने सामुदायिक शौचालय का ताला हमेशा बंद रहता है। यही कारण है कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को खुले में शौच करना पड़ता है। जिम्मेदार अफसर इस तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं। उधर, तहसीलदार अजय गुप्ता ने बताया कि मेले की तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। मेले की व्यवस्था समय पर हो जाएगी।
एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
मेले की तैयारियां शुरू कराने के लिए मां गंगा गोकर्ण जनकल्याण समिति के सचिव ने एसडीएम धीरज श्रीवास्तव को पत्र दिया। मेले में सुरक्षा व्यवस्था के साथ ही साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश आदि की व्यवस्था कराते जाने की मांग की है। सचिव ने बताया कि चतुर्दशी की शाम गंगा आरती व दीपदान के साथ मेले की शुरुआत होती है। स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी व जनप्रतिनिधि मेले का शुभारंभ करते हैं।