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Raebareli News: मांग पहुंची 325 मेगावाट, बिजली के लिए हाहाकार
Sat, 20 Jun 2026 01:13 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Sat, 20 Jun 2026 01:13 AM IST
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रायबरेली। गर्मी में बिजली की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। मई में जहां मांग 290 मेगावाट थी, अब बढ़कर 325 मेगावाट पहुंच गई है। इससे शहर में बिजली की आवाजाही बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्र में बिजली आने-जाने का कोई समय तय नहीं है। रात में हर एक घंटे आपूर्ति के बाद दो घंटे की अघोषित कटौती कर दी जाती है। दिन में लाइनों में फॉल्ट तो कभी मरम्मत कार्य के चलते आपूर्ति ठप कर दी जाती है।
शहर क्षेत्र में 24 घंटे बिजली आपूर्ति का शेड्यूल है, लेकिन ट्रिपिंग की वजह से 20 घंटे ही बिजली मिल पाती है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे के बजाय टुकड़ों में 10 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। शाम पांच बजे के बाद अघोषित कटौती का सिलसिला शुरू हो जाता है, जो पूरी रात चलता है। एक घंटे बिजली आने के बाद काट दी जाती है।
ऊंचाहार के उपभोक्ता रामप्यारे, डलमऊ के मनोज कुमार यादव व खीरों के शिवलोचन तिवारी ने बताया कि शाम की कटौती से कारोबार चौपट हो रहा है। किसान रामकेश व अतुल बाजपेयी ने बताया कि बिजली के अभाव में धान की नर्सरी, ढैचा व मूंग की फसल सूख रही है।
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दिन में ठप रही 100 गांवों की बिजली
रायबरेली। विद्युत उपकेंद्र उतरपारा के हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। रात में कटौती की जाती है, दिन में पेड़ की डालियों की कटाई के नाम पर बिजली ठप कर दी जाती है। यह सिलसिला एक सप्ताह से चल रहा है। शुक्रवार को सुबह नौ बजे बिजली काट दी गई। इससे 100 गांव के लोग बेहाल रहे। उपभोक्ता अवधेश कुमार, अजय बाबा व अजय कुमार मौर्य ने बताया कि उपकेंद्र से चार फीडर बेलाखारा, मधुपुरी, बेलाटेकई, उतरपारा निकले हैं। बेलाटेकई को छोड़कर सभी फीडर दिन में बंद कर दिए गए। शुक्रवार सुबह नौ बजे से चार बजे तक बिजली कटी रही। इससे उपभोक्ताओं को परेशानी झेलनी पड़ी। मुख्य अभियंता रविचंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि अघोषित कटौती ऊपर से होती है। दिन में इतनी ज्यादा कटौती क्यों की जाती है। पूछताछ की जाएगी। (संवाद)
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शहर क्षेत्र में 24 घंटे बिजली आपूर्ति का शेड्यूल है, लेकिन ट्रिपिंग की वजह से 20 घंटे ही बिजली मिल पाती है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में 18 घंटे के बजाय टुकड़ों में 10 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। शाम पांच बजे के बाद अघोषित कटौती का सिलसिला शुरू हो जाता है, जो पूरी रात चलता है। एक घंटे बिजली आने के बाद काट दी जाती है।
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ऊंचाहार के उपभोक्ता रामप्यारे, डलमऊ के मनोज कुमार यादव व खीरों के शिवलोचन तिवारी ने बताया कि शाम की कटौती से कारोबार चौपट हो रहा है। किसान रामकेश व अतुल बाजपेयी ने बताया कि बिजली के अभाव में धान की नर्सरी, ढैचा व मूंग की फसल सूख रही है।
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दिन में ठप रही 100 गांवों की बिजली
रायबरेली। विद्युत उपकेंद्र उतरपारा के हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। रात में कटौती की जाती है, दिन में पेड़ की डालियों की कटाई के नाम पर बिजली ठप कर दी जाती है। यह सिलसिला एक सप्ताह से चल रहा है। शुक्रवार को सुबह नौ बजे बिजली काट दी गई। इससे 100 गांव के लोग बेहाल रहे। उपभोक्ता अवधेश कुमार, अजय बाबा व अजय कुमार मौर्य ने बताया कि उपकेंद्र से चार फीडर बेलाखारा, मधुपुरी, बेलाटेकई, उतरपारा निकले हैं। बेलाटेकई को छोड़कर सभी फीडर दिन में बंद कर दिए गए। शुक्रवार सुबह नौ बजे से चार बजे तक बिजली कटी रही। इससे उपभोक्ताओं को परेशानी झेलनी पड़ी। मुख्य अभियंता रविचंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि अघोषित कटौती ऊपर से होती है। दिन में इतनी ज्यादा कटौती क्यों की जाती है। पूछताछ की जाएगी। (संवाद)