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जायस में खुदाई के दौरान सैकड़ों वर्ष पुरानी देवी जी की मूर्ति मिली
Updated Sun, 08 Jul 2018 12:05 AM IST
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तालाब में खोदाई के दौरान निकली मूर्ति
जायस (रायबरेली)। अमेठी जिले के जायस कस्बे में शनिवार को खोदाई के दौरान सैकड़ों वर्ष पुरानी देवी जी की मूर्ति मिली है।
तालाब से कई मूर्तियों के अवशेष भी मिले। इसकी जानकारी होते ही मौके पर मजमा लग गया। पुलिस भी पहुंच गई और बरामद मूर्ति व अवशेष को कोतवाली स्थित मंदिर में रखवा दिया।
पुलिस का मानना है कि जांच के बाद ही पता चलेगा कि मूर्ति कितने साल पुरानी है। हालांकि जानकारों का कहना है कि बरामद मूर्ति की कलाकृति उड़ीसा जिले के कोणार्क मंदिर में लगी मूर्तियों की तरह है।
जायस निवासी चंदे सोनकर और जगदीश सोनकर कोतवाली के पास स्थित तालाब में मछली पालन का काम करते हैं। शनिवार को ये लोग तालाब की खोदाई करा रहे थे।
इसी दौरान तालाब से एक मूर्ति निकली। इसके अलावा कई मूर्तियों के अवशेष भी निकले। इसकी जानकारी मिलते ही मजमा लग गया। लोग हंगामा करने लगे कि मूर्ति सैकड़ों साल पुरानी है।
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सूचना पर कोतवाल रावेंद्र सिंह भी पहुंच गए। मूर्ति व अवशेष कब्जे में लेकर कोतवाली स्थित मंदिर में रखवा दिया गया है। साथ ही इसकी सूचना पुरातत्व विभाग के अलावा एसपी, एएसपी को सूचना दे दी गई है।
कोतवाल का कहना है कि बरामद मूर्ति करीब 200 वर्ष से ज्यादा पुरानी लग रही है। मूर्ति की कलाकृति उड़ीसा के कोणार्क मंदिर में लगी मूर्तियों की तरह ही है। जांच के बाद पता चल पाएगा कि बरामद मूर्ति कितनी पुरानी है।
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जायस (रायबरेली)। अमेठी जिले के जायस कस्बे में शनिवार को खोदाई के दौरान सैकड़ों वर्ष पुरानी देवी जी की मूर्ति मिली है।
तालाब से कई मूर्तियों के अवशेष भी मिले। इसकी जानकारी होते ही मौके पर मजमा लग गया। पुलिस भी पहुंच गई और बरामद मूर्ति व अवशेष को कोतवाली स्थित मंदिर में रखवा दिया।
पुलिस का मानना है कि जांच के बाद ही पता चलेगा कि मूर्ति कितने साल पुरानी है। हालांकि जानकारों का कहना है कि बरामद मूर्ति की कलाकृति उड़ीसा जिले के कोणार्क मंदिर में लगी मूर्तियों की तरह है।
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जायस निवासी चंदे सोनकर और जगदीश सोनकर कोतवाली के पास स्थित तालाब में मछली पालन का काम करते हैं। शनिवार को ये लोग तालाब की खोदाई करा रहे थे।
इसी दौरान तालाब से एक मूर्ति निकली। इसके अलावा कई मूर्तियों के अवशेष भी निकले। इसकी जानकारी मिलते ही मजमा लग गया। लोग हंगामा करने लगे कि मूर्ति सैकड़ों साल पुरानी है।
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सूचना पर कोतवाल रावेंद्र सिंह भी पहुंच गए। मूर्ति व अवशेष कब्जे में लेकर कोतवाली स्थित मंदिर में रखवा दिया गया है। साथ ही इसकी सूचना पुरातत्व विभाग के अलावा एसपी, एएसपी को सूचना दे दी गई है।
कोतवाल का कहना है कि बरामद मूर्ति करीब 200 वर्ष से ज्यादा पुरानी लग रही है। मूर्ति की कलाकृति उड़ीसा के कोणार्क मंदिर में लगी मूर्तियों की तरह ही है। जांच के बाद पता चल पाएगा कि बरामद मूर्ति कितनी पुरानी है।